लखनऊ: उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को अपने आठ प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिये जिनमें कार्यकाल पूरा कर रहे दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा सहित किसी निवर्तमान सदस्य का नाम नहीं है।
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आठ नये चेहरे उतारे
पार्टी ने सर्वश्री धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, राम प्रताप सिंह चौहान और प्रियंका सिंह रावत तथा श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने अगले वर्ष के प्रारंभ में होने वाले विधान सभा चुनाव के मद्देनजर टिकट देने में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखा है। उत्तर प्रदेश से भरी जा रही दस सीटों में नौ सीटें 25 नवंबर को रिक्त हो रही हैं। जबकि एक सीट दिनेश शर्मा के सितंबर में इस्तीफे से रिक्त है।
आज घोषित हुए सभी सम्मानित प्रत्याशी गणों को हार्दिक बधाई। आप सभी की ऐतिहासिक विजय हेतु अनंत मंगलकामनाएं।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 5, 2026
दिनेश शर्मा को पहले ही अंडमान एवं निकोबार का उप-राज्यपाल बनाया जा चुका है। उनका राज्य सभा का कार्यकाल भी नवंबर में ही समाप्त होने वाला था। भाजपा ने नवंबर में कार्यकाल पूरा कर रहे सात सदस्यों में से किसी को भी दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाया है। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के अलावा बृजलाल, नीरज शेखर, अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, गीता उर्फ चंद्र प्रभा शामिल हैं।
भाजपा के नये प्रत्याशियों में श्रुति गंगवार बरेली शहरी सहकारी बैंक की अध्यक्ष हैं और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। प्रकाश पाल भाजपा के ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं तथा पार्टी की कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रीय इकाई के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी से 16वीं लोकसभा की सदस्य रह चुकी हैं।
दो केंद्रीय मंत्रियों को भी नहीं मिला टिकट

वह भाजपा के प्रमुख महिला चेहरों में शामिल हैं और संगठन में प्रदेश तथा राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रही हैं। राधाकांत ओझा मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं और इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके भाई शिवाकांत ओझा भाजपा के टिकट पर प्रतापगढ़ से विधायक रहे और प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने। धर्मपाल सिंह बरेली की आंवला विधानसभा सीट से विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री हैं। पार्टी संगठन में भी वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। राम प्रताप सिंह चौहान आगरा के पूर्व विधायक और भाजपा के प्रदेश महामंत्री हैं।
लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे चौहान ने जमीनी कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया और संगठन के विभिन्न दायित्वों से होते हुए प्रदेश नेतृत्व में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। गोपी कृष्ण पांडे भी लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। उन्हें वरिष्ठ संगठनकर्ता के रूप में जाना जाता है और वह पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक अभियानों में भूमिका निभाते रहे हैं। विद्यासागर सोनकर भाजपा के वरिष्ठ दलित चेहरों में शामिल हैं। जौनपुर के रहने वाले सोनकर लोकसभा सांसद, विधान परिषद सदस्य और प्रदेश महामंत्री समेत संगठन और सदन में कई जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
16 अक्टूबर को मतदान
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। निर्वाचन आयोग ने सितंबर में चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। इन सीटों में भाजपा के पास वर्तमान में आठ सीटें हैं, जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास एक-एक सीट थी। मौजूदा विधानसभा के आंकड़ों के आधार पर भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए आठ सीटों का दावा मजबूत है, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में है। हालांकि तीसरे उम्मीदवार के सवाल और संभावित क्रॉस वोटिंग ने मुकाबले को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।
समाजवादी पार्टी ने पहले ही प्रो. राम गोपाल यादव और उद्योग जगत से जुड़े धनराज पारिमल नाथवाणी को उम्मीदवार बनाया है। तीसरी सीट के लिए उसके रुख को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा रही है। राज्यसभा चुनाव के परिणाम 16 अक्टूबर को मतदान के बाद उसी दिन घोषित किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक संख्या बल की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।