दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को “पावर टू एम्पावर” को विकास के प्रति देश का मुख्य सिद्धांत बताते हुए कहा- भारत दूसरों की कीमत पर नहीं सबको साथ लेकर आगे बढ़ने में यकीन करता है।
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“पावर टू एम्पावर” का मतलब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ को संबोधित करते हुए कहा- “पावर टू एम्पावर” का मतलब उस शक्ति से है जो न सिर्फ अपने लिए हो, बल्कि जो अपने साथ दूसरों को भी सशक्त बनाती हो। उन्होंने कहा कि खनिज, भुगतान प्रणाली और प्रौद्योगिकी जैसी जिन चीजों ने कभी दुनिया को जोड़ा था, आज उन्हीं का इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है, दबाव और दबदबे के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी सबको साथ लेकर चलने की है। चाहे कोरोना के समय टीके की जरूरत हो या डिजिटल भुगतान के मजबूत मॉडल की या फिर प्रतिभाओं की, जरूरत के समय दुनिया ने भारत पर भरोसा दिखाया है। उन्होंने कहा- “जब भी दुनिया को एक स्थिर स्तंभ की जरूरत होती है, भारत अपना दायित्व समझते हुए हाथ बढ़ाता है। हम दूसरों की कीमत पर आगे नहीं बढ़ते, हम दुनिया के लिए आगे बढ़ते हैं।”
The greatest power is the power to empower! https://t.co/zG16Kh6G4b
— Narendra Modi (@narendramodi) October 13, 2026
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया के सामने बड़ा सवाल भरोसे का है- आपूर्ति श्रृंखला जारी रहेगी या नहीं, साझेदार देश साथ खड़ा रहेगा या नहीं – और यहीं पर भारत एक नए मिजाज के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में पहले भी कई वैश्विक साझेदारियां बनाई गईं जिनका उद्देश्य अपने-अपने हित साधना था। वहीं, भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, बिग कैट अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रिजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मंच दिए हैं जिसमें सबको साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा- “भारत जोड़ने पर और जुड़ने पर बल देता है।”
New Economy Forum
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- इसके बावजूद भारत जो करता है उसका क्रेडिट कभी नहीं चाहता। संभवतः पहली बार किसी प्रधानमंत्री की तरफ से “शून्य” के लिए रॉयल्टी के उल्लेख की नजीर बनाते हुए उन्होंने कहा- “भारत जो करता है उसका क्रेडिट कभी नहीं चाहता। भारत ने “शून्य” दिया लेकिन कभी उसके लिए रॉयल्टी नहीं मांगता।”
Speaking at the Bloomberg New Economy Forum. https://t.co/H91kiKqNQ8
— Narendra Modi (@narendramodi) October 13, 2026
उनके पद संभालने के बाद देश की अर्थव्यवस्था में आई मजबूती का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा- 12-13 साल पहले चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के चार प्रतिशत से भी अधिक था। अब यह घटकर 0.61 प्रतिशत रह गया है। देश के पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है और बैंकिंग तंत्र काफी मजबूत है। यही कारण है कि विभिन्न रेटिंग एजेंसियां भारत की सोवरेन रेटिंग अपग्रेड कर रही हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), दिवाला संहिता और श्रमिक संहिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रिफॉर्म एक्सप्रेस आज तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दुनिया के सभी देशों को “सं गच्छध्वं, सं वद्धवं, सं वो मनांसि जानताम्” का मंत्र देते हुए मिलकर चलने, एक सुर में बोलने और मिलकर सोचने की अपील की।
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322624®=48&lang=2