- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मोदी की गारंटी: पंकज
- जीएसटी स्लैब में सुधार से कर व्यवस्था हुई सरल, व्यापारियों को राहत देने पर सरकार का जोर: पंकज चौधरी
- छोटे व्यापारियों के लिए कारोबार सुगम बनाना, प्रक्रियागत जटिलताएं कम करना और व्यापारिक पारदर्शिता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता: पंकज चौधरी
लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य ऐसा कारोबारी वातावरण तैयार करना है, जिसमें छोटे व्यापारी, उद्यमी और व्यवसायी अनावश्यक प्रक्रियागत कठिनाइयों से मुक्त होकर कारोबार का विस्तार कर सकें। जीएसटी व्यवस्था का सरलीकरण, पारदर्शिता और व्यापार सुगमता इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मोदी की गारंटी है।
भाजपा सरकार व्यापार की जटिलताओं को खत्म कर उसके सरलीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है: प्रदेश अध्यक्ष श्री @mppchaudhary https://t.co/0oJCrA6vSl
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) October 9, 2026
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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मोदी
Recommendations of the 57th Meeting of the GST Council ➤ GST Council recommends removal of arrest provisions under #GST ➤ GST Council recommends raising prosecution threshold from ₹1 crore to ₹5 crore ➤ GST Council recommends reduction in general penalty from ₹25,000 to ₹10,000 ➤ GST Council recommends wider eligibility for input tax credit and refunds ➤ GST Council recommends further simplification of registration and compliance processes Read here for more details: https://t.co/QdK8CZu4tz #57thGSTCouncil #GSTCouncil @FinMinIndia @cbic_india (1/2)
— PIB India (@PIB_India) October 8, 2026
पंकज चौधरी ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में गुरुवार को आयोजित GST परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए निर्णय इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा हैं। सरकार द्वारा जीएसटी प्रक्रिया को सरल बनाने और कारोबार संबंधी कठिनाइयों को कम करने के लिए किए जा रहे सुधार व्यापारियों को अपने व्यवसाय के विस्तार तथा राष्ट्र की आर्थिक प्रगति में अधिक प्रभावी योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि व्यापारियों को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक कारोबारी वातावरण मिले। व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, इस लक्ष्य के प्रमुख आयाम हैं।
कारोबार सुगम बनाना
GST व्यवस्था को ‘कम नोटिस, कम दंड, कम हस्तक्षेप और ज्यादा कारोबार’ वाली व्यवस्था बनाने की तैयारी. 57वीं GST Council की बैठक में GST नोटिस और कार्यवाही के लिए समान मानक तय करने की सिफारिश की गई है. 10,000 रुपये से कम राशि के मामलों में नया नोटिस जारी नहीं होगा और इस सीमा से नीचे के लंबित नोटिस भी वापस ले लिए जाएंगे. माल का निरीक्षण, हिरासत या जब्ती केवल सप्लायर राज्य या गंतव्य राज्य के अधिकारी द्वारा किए जाने का सुझाव है. माल को केवल विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर और कम से कम संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी की अनुमति से रोका जा सकेगा. इससे मनमानी जांच पर रोक लगेगी और माल की आवाजाही आसान होगी. परिषद ने GST के तहत गिरफ्तारी की शक्तियां समाप्त करने, अभियोजन सीमा 1 से बढ़ाकर 5 करोड़ करने और सामान्य जुर्माना 25,000 से घटाकर 10,000 करने की भी सिफारिश की है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर छोटे विक्रेताओं के लिए सरल GST पंजीकरण व्यवस्था और सेवाओं के निर्यात से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता से MSME, निर्यातकों और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी. वित्त मंत्री @nsitharaman ने GST काउंसिल की बैठक के बाद इन फैसलों के बारे में बताया. ये GST परिषद की सिफारिशें हैं जिन प्रस्तावों में कानून बदलने की जरूरत होगी, उन्हें केंद्र सरकार GST कानून में संशोधन के रूप में संसद में ला सकती है CBIC और राज्यों द्वारा अधिसूचनाएं (Notifications) जारी की जाएंगी. राज्यों को भी अपने-अपने GST कानूनों में आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं. #GSTCouncil #GSTReforms #TaxReforms #NirmalaSitharaman
— SansadTV (@sansad_tv) October 8, 2026
पंकज चौधरी ने कहा कि GST लागू होने के बाद समय-समय पर इसमें आवश्यक बदलाव किए गए हैं। चार कर स्लैब के स्थान पर दो प्रमुख स्लैब की व्यवस्था तथा आम जनजीवन में उपयोग होने वाली अधिकांश वस्तुओं को 5 प्रतिशत या उससे कम कर दरों के दायरे में लाने से कर व्यवस्था को अधिक सरल और जनोपयोगी बनाने का प्रयास किया गया है। सरकार की प्राथमिकता कर अनुपालन संबंधी कठिनाइयों को कम करने और कारोबार करना आसान बनाने की है।
उन्होंने कहा कि कर संबंधी मामलों में गिरफ्तारी की प्रक्रिया, कानूनी कार्रवाई की सीमा और न्यूनतम जुर्माने जैसे विषयों पर व्यापारियों की चिंताओं को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। पहले जहां न्यूनतम जुर्माना 25,000 रुपये था, उसे घटाकर 10,000 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही 10,000 रुपये से कम की कर देनदारी होने पर कार्रवाई नहीं किए जाने का प्रावधान भी व्यापारियों को राहत प्रदान करेगा। इन बदलावों से छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी और कारोबारी गतिविधियों में विश्वास बढ़ेगा।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि मालवाहक वाहनों को रास्ते में रोकने से संबंधित प्रक्रियाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप कम करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। इससे व्यापारियों को होने वाली असुविधा कम करने और माल की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

