लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सनातन संस्कृति अतीत को स्मरण करने की परंपरा मात्र नहीं, बल्कि अतीत से वर्तमान और वर्तमान से भविष्य को जोड़ने वाली जीवन-दृष्टि है।
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पितृ पक्ष सनातन भाव
पितृ पक्ष इसी सनातन भाव की अभिव्यक्ति का अवसर है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और उनकी दी हुई संस्कृति, संस्कार तथा जीवन-मूल्यों को आगे बढ़ाना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को संबोधित संदेश में कहा कि पितृ पक्ष में श्राद्ध के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। पिंडदान हमें याद दिलाता है कि आज हम जो कुछ हैं, उसमें हमारे पूर्वजों के तप, त्याग, परिश्रम और संस्कारों का भी योगदान है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता अपने उत्तराधिकार को समझने का संस्कार है।
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों, हमारी महान सनातन संस्कृति अतीत को स्मरण करने की परंपरा मात्र नहीं, अपितु अतीत से वर्तमान और वर्तमान से भविष्य को जोड़ने वाली जीवन-दृष्टि है। पितृ पक्ष इसी सनातन भाव की अभिव्यक्ति का अवसर है। इन दिनों श्राद्ध के माध्यम से हम अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं, तर्पण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। पूर्वजों से मिली स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की विरासत को आगे बढ़ाना भी हमारा दायित्व है। हमारी सरकार प्रदेश के प्रत्येक परिवार के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आइए, स्वच्छता को अपनी दिनचर्या बनाएं, अपने आस-पास झाड़ियां न उगने दें, जलभराव न होने दें, बुखार जैसे लक्षणों को गंभीरता से लें और ‘दस्तक’ को हर घर में स्वास्थ्य-जागरूकता का अभियान बनाएं। स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज से ही विकसित उत्तर प्रदेश का सपना साकार होगा।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 5, 2026
पहले की पीढ़ियों ने हमें जो दिया, उसे संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों को उससे अधिक समृद्ध विरासत सौंपना हमारा धर्म है। सनातन विकास का यही भाव परिवार को जोड़ता है, समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है तथा प्रदेश और राष्ट्र को नई ऊर्जा प्रदान करता है।
योगी ने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक प्रसंग हैं, जब लोगों ने अपने आराध्य के केंद्र में रहे शासकों के पानी के लिए बनाए सरोवरों और कुओं को पितृ सेवा माना। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पूर्वजों का स्मरण केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भी बोध कराता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें इस विरासत को केवल स्मरण तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि अपने आचरण में भी उतारना चाहिए।
12 से 31 अक्टूबर तक दस्तक अभियान
उन्होंने कहा है कि परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना, बच्चों को अपने संस्कारों से परिचित कराना तथा ज्ञान, सेवा और सदाचार की उस परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और भविष्य को दिशा देती है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों से मिली स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की विरासत को आगे बढ़ाना भी सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। प्रदेश सरकार प्रत्येक परिवार के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के लिए निरंतर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इसी कड़ी में एक से 31 अक्टूबर, 2026 तक विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान तथा 12 से 31 अक्टूबर तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अभियानों के दौरान स्वास्थ्यकर्मी, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा अन्य विभागों के कर्मचारी घर-घर पहुंचकर स्वच्छता, रोग-लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार के लिए लोगों को जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में होने वाला यह अभियान मच्छरजनित रोगों और अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सामूहिक प्रयास और जन जागरूकता से संक्रमण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। योगी ने प्रदेश वासियों से आह्वान किया कि वे स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, अपने आसपास गंदगी न होने दें, जलभराव रोकें, बुखार जैसे लक्षणों को गंभीरता से लें और ‘दस्तक’ को हर घर में स्वास्थ्य-जागरूकता का अभियान बनाएं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज से ही विकसित उत्तर प्रदेश का सपना साकार होगा।