पश्चिम एशिया संकट से भारत की अर्थव्यवस्था पर खतरा: RBI
दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट और इसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देश के आर्थिक विकास और महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर रही हैं, हालांकि विकास की संभावनाएं अब भी सकारात्मक हैं। आरबीआई ने कहा- पश्चिम एशिया संकट से देश के आर्थिक विकास और महंगाई पर प्रतिकूल असर होगा।
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RBI ने जारी की वार्षिक रिपोर्ट
Annual Basic Statistical Return (BSR)-1 on Credit by Scheduled Commercial Banks – March 2026https://t.co/8HICZu0wfT
— ReserveBankOfIndia (@RBI) May 29, 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में कहा – भारतीय बैंकिंग प्रणाली के मजबूत बने रहने की उम्मीद है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों का लगातार जारी रहना निकट भविष्य में कॉर्पोरेट की आय और बैंकों के ऋण पोर्टफोलियो के प्रदर्शन के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

महंगाई दर पर नकारात्मक प्रभाव
इसमें पश्चिम एशिया संकट और उसके कारण ईंधनों की कीमतों में तेजी, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा, वित्तीय बाजारों में अस्थिरता, वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता तथा मौसम संबंधी चिंताओं के कारण विकास और महंगाई दर पर नकारात्मक प्रभाव की आशंका व्यक्त की गयी है।
Annual Basic Statistical Return (BSR)-2 on Deposits with Scheduled Commercial Banks – March 2026https://t.co/wA1nF9iBGq
— ReserveBankOfIndia (@RBI) May 29, 2026
केंद्रीय बैंक ने कॉर्पोरेट और बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर लगातार जोर और प्रमुख साझेदार देशों के साथ व्यापार समझौतों के क्रियान्वयन से निवेश और विकास की गति बनी रहने की उम्मीद जतायी है।
भारतीय अर्थव्यवस्था रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है, “कुल मिलाकर, मजबूत बुनियादी आर्थिक स्थिति और मजबूत बैलेंस शीट के चलते घरेलू वित्तीय प्रणाली प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है।”
इसमें इस बात को रेखांकित किया गया है कि सरकार की राजकोषीय संतुलन बनाये रखने की प्रतिबद्धता और रिजर्व बैंक द्वारा तरलता बढ़ाने के उपाय बॉन्ड यील्ड पर दबाव को नियंत्रित करने में मदद करेंगे।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दिनों कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल, उर्वरक और सोने की ऊंची कीमतों से विदेशी मुद्रा व्यय पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा- “भारत अंतर्राष्ट्रीय उर्वरक और सोने की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि का भी सामना कर रहा है। इन तीनों के भुगतान विदेशी मुद्रा में करने होंगे। वहां रुपये में व्यापार नहीं हो रहा है।”
