छात्रों के समर्थन में राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन को लिखा पत्र
दिल्ली : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है।
Read More: सुपारी आयात में करोड़ों का घोटाला, DRI का बड़ा खुलासा!
राहुल ने दी हेमंत को सुझाव
उन्होंने हेमंत सोरेन से आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनने और उनके समाधान के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया है।

राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा है कि झारखंड के छात्र राज्य की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और उनकी मांगें जायज हैं। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री द्वारा गठित समिति के माध्यम से छात्रों से संवाद शुरू किया है और कई मांगों पर सहमति भी बनी है। इसके बावजूद आंदोलन जारी है और कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

जानें क्या था राहुल का पत्र
कांग्रेस नेता ने कहा- ‘मैं सुझाव देना चाहता हूं कि आप व्यक्तिगत रूप से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करें। इससे उनकी शेष चिंताओं के समाधान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।’ उन्होंने कहा कि भारत के युवा देश का भविष्य हैं और ऐसे संकट के समय उनके साथ एकजुटता और समर्थन खड़ा करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और इस मुद्दे के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
"The youth of India is its future. We owe them our solidarity and support at this moment of crisis. Please do your utmost to hear them out and take appropriate action towards the resolution of this issue.”
— Congress (@INCIndia) August 17, 2026
LoP Shri @RahulGandhi writes to Jharkhand CM Shri @HemantSorenJMM… pic.twitter.com/2WREi26DOJ
राहुल गांधी ने पत्र में कहा है कि कांग्रेस संविधान में निहित शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लोकतंत्र का एक केंद्रीय स्तंभ मानती है और पिछले कुछ महीनों से पेपर लीक तथा शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का पूरा समर्थन कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था को आरएसएस और भाजपा ने अपने कब्जे में लेकर छात्रों के शोषण और दमन का माध्यम बना दिया है तथा यह एक दशक पहले जैसी मजबूत ज्ञान-व्यवस्था नहीं रह गई है।

