RBI ने दी महंगाई बढ़ने की चेतावनी, तेल की कीमतों से बढ़ी चिंता
RBI : रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की इस महीने के आरंभ में हुई बैठक में सदस्यों ने आशंका जतायी है कि खुदरा महंगाई अभी और बढ़ सकती है और इसे लेकर सावधान रहने की जरूरत है।
मौद्रिक नीति समिति की बैठक
मौद्रिक नीति समिति की 3 से 5 अगस्त 2026 के दौरान हुई बैठक का कार्यवृत्त [भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ज़ेडएल के अंतर्गत]
— ReserveBankOfIndia (@RBI) August 19, 2026
Minutes of the Monetary Policy Committee Meeting, August 3 to 5, 2026
[Under Section 45ZL of the Reserve Bank of India Act, 1934]…
समिति की तीन दिवसीय बैठक 03-05 अगस्त को हुई थी। बुधवार को बैठक का विवरण (मिनट्स) जारी किया गया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा बैठक में दिये अपने वक्तव्य में कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि मुद्रास्फीति धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसके तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में चरम पर पहुंचने और उसके बाद घटने की संभावना है।
उन्होंने कहा था कि खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि मुख्यतः आपूर्ति-पक्ष के झटकों के कारण है। कोर मुद्रास्फीति के सीमित रहने के कारण मुद्रास्फीति के व्यापक होने के संकेत कम हैं। नीतिगत दरों में किसी बदलाव से पहले उन्होंने मुद्रास्फीति के रुझान पर अधिक निश्चितता आने की प्रतीक्षा करना ज्यादा उचित समझा।
https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR9257E0CB4D769F24658B0AB41428CA46F97.PDF
अभी और बढ़ सकती है महंगाई
डॉ. नागेश कुमार ने चेताया कि हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास और मुद्रास्फीति के परिदृश्य में थोड़ा सुधार हुआ है लेकिन इससे आत्मसंतुष्ट होने की जरूरत नहीं है। कृषि क्षेत्र का परिदृश्य अल नीनो के कारण अब भी अनिश्चित बना हुआ है। पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से उत्पन्न चिंताएं अभी कम नहीं हुई हैं।

अमेरिका ने बेगारी का आरोप लगाते हुए भारतीय निर्यात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है। जेनेरिक दवाओं के आयात पर 2028 से 100 प्रतिशत और 2029 से 200 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। उन्होंने सलाह दी कि भारत को तत्काल अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने की जरूरत है।
श्री सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि का परिदृश्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जून 2026 की समीक्षा के अनुमानों की तुलना में स्थिति में कुछ सुधार के बावजूद मुद्रास्फीति के मामले में सावधानी जरूरी है। ऊंची ईंधन कीमतों से कंपनियों की लागत बढ़ी है जिससे उपभोक्ता कीमतों में दूसरे चरण की मुद्रास्फीति देखने को मिल सकती है।
कच्चे तेल और उसके उत्पादों के दाम बढ़ रहे
प्रो. राम सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल और उसके उत्पादों के दाम बढ़ रहे हैं। घरेलू अर्थव्यवस्था में भी मुद्रास्फीति और वृद्धि दोनों पर करीबी नजर रखने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पिछली दो तिमाहियों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और रुपये में कमजोरी का घरेलू अर्थव्यवस्था में अब तक सीमित असर हुआ है।

हालांकि आरबीआई के उद्यम सर्वेक्षण से पता चलता है कि कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ रहा है और अब यह धीरे-धीरे खुदरा मुद्रास्फीति में दिखाई देने लगा है। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडर, औद्योगिक कच्चे माल, रसायन, रबर और प्लास्टिक उत्पादों जैसी कई वस्तुओं में दिखाई दे रहा है। इसका पूरा प्रभाव आने वाले महीनों में ही स्पष्ट होगा।
श्री इंद्रनील भट्टाचार्य ने कहा कि हाल में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है, लेकिन संघर्ष बढ़ने पर इसमें अचानक तेजी का जोखिम अभी भी है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही और वित्त वर्ष 2027-28 की तीसरी तिमाही तक आपूर्ति-पक्ष के झटकों से व्यापक अर्थव्यवस्था में दूसरे चरण की मुद्रास्फीति का खतरा है। कीमतों में तेजी मुख्यतः अस्थिर खाद्य और ईंधन श्रेणियों में केंद्रित है। इसके कारण बढ़ी हुई लागत सेवाओं में भी दिखाई देने लगी है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में मानसून तथा खाद्य और ईंधन मुद्रास्फीति के रुझान के बारे में अधिक स्पष्टता मिलने की संभावना है।

