भारत-जापान की युवा दोस्ती का नया अध्याय
- मुख्यमंत्री आवास पर भारत-जापान की युवा पीढ़ी का मिलन, ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ में गूंजा दोस्ती और भविष्य का संदेश
- सीएम योगी ने जापानी विद्यार्थियों का किया आत्मीय स्वागत, बोले, यह केवल छात्रों का नहीं, दो संस्कृतियों और दो परंपराओं का मिलन है
- एक लखनऊ के गांव से, दूसरा जापान के गांव से, भाषाएं अलग लेकिन भविष्य की कहानी लिखने का संकल्प समान: मुख्यमंत्री
- यामानाशी के गवर्नर बोले, यह मुलाकात आज तक सीमित न रहे, भारतीय और जापानी विद्यार्थी इस दोस्ती को दीर्घकालिक संबंधों में बदलें
- जापान के सामाजिक सामंजस्य के दर्शन और भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को साथ लेकर आगे बढ़ने की साझा भावना, विद्यार्थियों ने समझी एक-दूसरे की संस्कृति
- अयोध्या, मथुर, ताजमहल, बिंदी और डोरेमोन से लेकर जापानी अनुशासन तक, संवाद में बच्चों ने साझा किए भारत-जापान से जुड़े अपने अनुभव
- जापानी विद्यार्थियों ने सुनाया अपनी भाषा में गीत, ईशान ने ‘कौशल्या दशरथ के नंदन’ से बांधा समां, ओरिगेमी में दिया शांति-मित्रता का संदेश
आज लखनऊ में भारत और जापान के विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 21, 2026
विद्यार्थियों के साथ यह भेंट दो समृद्ध संस्कृतियों, महान परंपराओं और दो देशों के भविष्य का सुंदर संगम है।
सभी युवा साथियों का हार्दिक अभिनंदन एवं उज्ज्वल भविष्य की अनंत शुभकामनाएं। pic.twitter.com/VKxK7Eustm
लखनऊ : शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसमें कूटनीति की औपचारिकता की जगह बच्चों की मुस्कान थी, भाषाओं की दूरी की जगह संवाद था और दो देशों की संस्कृति के बीच दोस्ती का एक सहज सेतु बनता दिखाई दे रहा था।
उत्तर प्रदेश-जापान निवेश बैठक के क्रम में आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ में जापान के यामानाशी प्रान्त से आए 13 विद्यार्थियों और उनके फैकल्टी सदस्यों ने लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यामानाशी प्रान्त के गवर्नर कोटारो नागासाकी की मौजूदगी में हुआ यह संवाद आने वाले भारत-जापान संबंधों की उस तस्वीर को सामने ला रहा था, जिसकी नींव आज की युवा पीढ़ी के मन में रखी जा रही है।
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भारत-जापान की युवा पीढ़ी का मिलन
मुख्यमंत्री ने जापान के यामानाशी से आए विद्यार्थियों और उनके फैकल्टी सदस्यों तथा लखनऊ के युवा साथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए जापानी अभिवादन ‘ओहायो गोजाइमासु’ से अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है और 25 करोड़ से अधिक आबादी वाला उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है। यह प्रदेश भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र है और इसे ‘हार्टलैंड ऑफ इंडिया’ के रूप में भी देखा जा सकता है।
जब जापान और भारत की Strength साथ आएंगी, तो केवल दोनों देशों के बच्चों का भविष्य ही बेहतर नहीं होगा, अपितु Global Stage पर नई संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे… pic.twitter.com/AX9wjSOhJ1
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 21, 2026
उन्होंने कहा कि जिस अवध क्षेत्र में आज यह संवाद हो रहा है, उसी क्षेत्र में अयोध्या स्थित है, जो मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि है। जापानी विद्यार्थियों ने आगरा में ताजमहल देखा, मथुरा, जो भगवान् श्री कृष्ण की जन्मभूमि है, पास में ही है और अब वाराणसी तथा सारनाथ जाने का अवसर उन्हें मिलेगा। सारनाथ वह पावन स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश दिया था। वाराणसी दुनिया की प्राचीनतम नगरियों में से एक है। इस तरह जापान से आए इन विद्यार्थियों के लिए उत्तर प्रदेश की यात्रा भारत की आध्यात्मिकता, संस्कृति और सभ्यतागत विरासत को करीब से जानने का अवसर भी है।
‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल विद्यार्थियों का मिलन नहीं है। यह दो संस्कृतियों, दो परंपराओं और दो देशों की युवा पीढ़ियों का मिलन है। अगले वर्ष भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और ऐसे समय में दोनों देशों के ये विद्यार्थी भविष्य के राजदूत के रूप में इस संबंध को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखते हैं।
भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंध प्राचीन हैं।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 21, 2026
जापान की Philosophy 'वा', साथ मिलकर आगे बढ़ने एवं भारत की संस्कृति 'वसुधैव कुटुंबकम्' दुनिया को एक परिवार के रूप में मान्यता देती है… pic.twitter.com/IpLqMWa45B
उन्होंने कहा कि एक ओर भारत की सबसे बड़ी युवा कार्यशक्ति वाले उत्तर प्रदेश के बच्चे हैं और दूसरी ओर तकनीक, परंपरा और प्रतिबद्धता के लिए पहचाने जाने वाले जापान के बच्चे। एक बच्चा लखनऊ के किसी गांव से आया है और दूसरा जापान के किसी गांव से। एक हिंदी बोलता है, दूसरा जापानी, लेकिन दोनों के बीच सबसे बड़ी समानता यह है कि दोनों अपने भविष्य की कहानी लिख रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान से आए विद्यार्थियों के लिए भारत की विविधता में एकता, वसुधैव कुटुम्बकम्, भारतीय भाषाओं, दर्शन, पर्व और त्योहारों तथा उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने का यह अवसर है। उन्होंने कहा कि जापान की नई पीढ़ी भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक साझा सभ्यतागत मित्र के रूप में जाने, यह इस संवाद की बड़ी उपलब्धि होगी।
दो संस्कृतियों और दो परंपराओं का मिलन
वहीं भारतीय विद्यार्थियों के लिए जापान की कार्य संस्कृति, जीवन दर्शन, अनुशासन, ‘इकीगाई’, टीमवर्क, पारस्परिक सम्मान, स्वच्छता, समयबद्धता, पारंपरिक कलाओं और उत्सवों को समझने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आदान-प्रदान कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत ही यही है कि दोनों देश एक-दूसरे से सीखें और अपनी श्रेष्ठ बातों को साझा करें।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने जापान के सामाजिक सामंजस्य के दर्शन और भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की वैचारिकी के बीच की सुंदर समानता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति मानती है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। ‘अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।’ उन्होंने कहा कि यह अपना है और यह पराया है, ऐसी सोच संकुचित मन वाले लोगों की होती है, उदार चरित्र वाले लोगों के लिए पूरी दुनिया ही एक परिवार है। इसी भावना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के संकल्प में भी देखा जा सकता है।
विद्यार्थियों ने समझी एक-दूसरे की संस्कृति

मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान की स्ट्रेंथ सेल्फ डिसिप्लिन, प्रिसिजन, क्वालिटी, टीम वर्क और इनोवेशन में है, जबकि भारत की शक्ति युवा शक्ति, प्रतिभा, विविधता, सृजनात्मकता और सबको साथ लेकर चलने की भावना में है। जब जापान की शक्ति और भारत की शक्ति साथ आएंगी, तो इसका लाभ केवल दोनों देशों के बच्चों को नहीं मिलेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज वे विद्यार्थी हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में इन्हीं में से वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ, कलाकार, खेल चैंपियन, नीतिनिर्माता और वैश्विक नेतृत्वकर्ता निकलेंगे।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे एक-दूसरे की भाषा सीखने के साथ एक-दूसरे की भावनाओं को समझने का भी प्रयास करें। एक-दूसरे की संस्कृति, मूल्यों और जीवन दृष्टि का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि सबसे मजबूत रिश्ते कक्षाओं, परिसरों, प्रयोगशालाओं और युवा मस्तिष्कों के बीच बनते हैं। आज के यही बच्चे कल भारत-जापान साझेदारी के सबसे प्रभावशाली राजदूत होंगे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन का समापन जापानी भाषा में ‘अरिगातो गोजाइमासु’ कहकर किया।

भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’
यामानाशी प्रान्त के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने दोनों देशों के विद्यार्थियों को संवाद का यह अवसर दिया। उन्होंने लखनऊ के विद्यार्थियों का भी विशेष धन्यवाद किया, जिन्होंने जापानी बच्चों का आत्मीय स्वागत किया। गवर्नर ने कहा कि दोनों देशों को और बेहतर ढंग से जोड़ने के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि हमारे बीच क्या समानताएं हैं और क्या भिन्नताएं।
उन्होंने भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और यामानाशी की उस सोच का उल्लेख किया, जिसमें एक-दूसरे के लोगों को समृद्ध बनाने के साथ अपनी समृद्धि को भी सुनिश्चित करने की भावना है। गवर्नर कोटारो नागासाकी ने कहा कि यह मुलाकात केवल एक दिन का कार्यक्रम बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जापानी और भारतीय मित्रों के साथ इस दोस्ती को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश साथ मिलकर समृद्ध हों और युवा पीढ़ी इस रिश्ते को और मजबूत बनाए, यही इस संवाद की सबसे बड़ी अपेक्षा है।
गूंजा दोस्ती और भविष्य का संदेश
जापान एवं भारत के विद्यार्थियों से भेंट हेतु लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में…https://t.co/MRnhjsZIBe
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मुख्यमंत्री और जापानी गवर्नर के संबोधन के बाद संवाद और भी आत्मीय हो गया। जापानी विद्यार्थियों ने मिलकर जापानी भाषा में गीत प्रस्तुत किया। उनकी सामूहिक प्रस्तुति के दौरान मुख्यमंत्री आवास का वातावरण तालियों से गूंज उठा। इसके जवाब में भारत की ओर से ईशान ने भगवान श्रीराम को समर्पित ‘कौशल्या दशरथ के नंदन’ गीत प्रस्तुत किया। जापानी भाषा का मधुर गीत और रामभक्ति से सराबोर भारतीय गीत, दो अलग भाषाओं में प्रस्तुत इन दोनों गीतों ने एक ही भाव को सामने रखा, संस्कृतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन संगीत और भावनाएं दिलों को जोड़ती हैं।
लखनऊ की छात्रा अक्षरा पांडेय ने जापानी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सभी यहां आए, यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि जापानी विद्यार्थियों को ताजमहल पसंद आया, यह उनके लिए भी सुखद है। उन्होंने अपने बचपन की याद साझा करते हुए कहा कि भारत के बच्चे डोरेमोन देखते हुए बड़े हुए हैं। भारत की संस्कृति में अतिथि को भगवान का स्वरूप माना जाता है, इसलिए जापान से आए सभी विद्यार्थी यहां केवल अतिथि नहीं, अपने हैं और उनका पूरा सम्मान है। उन्होंने जापानी भाषा में ‘अरिगातो’ कहकर उनका स्वागत किया।
‘कौशल्या दशरथ के नंदन’ से बांधा समां
जापानी विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव खुलकर साझा किए। जापानी छात्र कजामा ने कहा, “भारत आना मेरे लिए बहुत खास अनुभव है, क्योंकि मैं पहली बार अपने देश से बाहर निकला हूं। यहां आकर जिस तरह लोगों ने हमसे मित्रवत व्यवहार किया, वह मेरे दिल को छू गया। भारत की सड़कों पर इतनी सारी मोटरसाइकिल और गाड़ियां देखना मेरे लिए बिल्कुल नया अनुभव था। टोक्यो में ऐसा अनुभव कम मिलता है। मुझे ताजमहल देखने का अवसर मिला। उसके सुंदर संगमरमर और भव्यता ने मुझे बहुत प्रभावित किया। हम सभी हाईस्कूल के विद्यार्थी हैं और मैं चाहता हूं कि हम भारत और जापान के बीच मैत्री और समझ का सेतु बनें। आज यहां जो अनुभव मिला है, उसे मैं हमेशा याद रखूंगा।”
Had a fruitful meeting and meaningful discussion with Mr. ONO Keiichi, Ambassador of Japan to India, at my official residence in Lucknow today.
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Under the visionary leadership of Hon. PM Shri @narendramodi Ji, India-Japan relations are scaling new heights, with greater… pic.twitter.com/0tInAFfDIR
जापानी छात्रा मियागी मोतो ने कहा, “इतने लोगों के सामने अपने विचार साझा करने का अवसर मेरे लिए बहुत विशेष है। मैं पहले भी कई देशों के विद्यार्थियों के साथ ऐसे संवाद कार्यक्रमों का हिस्सा रही हूं, लेकिन भारत का अनुभव अपने आप में अलग है। मैं यामानाशी में रहती हूं और मेरा मानना है कि अलग-अलग संस्कृतियों को समझना और एक-दूसरे की संस्कृति का सम्मान करना बहुत जरूरी है। भारत आकर ताजमहल देखना मेरे लिए अद्भुत अनुभव रहा। मैंने पहली बार बिंदी लगाई और मुझे यह बहुत अच्छा लगा। हमारे साथ 13 अन्य विद्यार्थी भी आए हैं और हम सभी इस यात्रा से मिली यादों और अनुभवों को अपने भविष्य का हिस्सा बनाना चाहते हैं। मैं भारत और जापान की मित्रता को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाने के लिए बहुत उत्सुक हूं।”
जापानी विद्यार्थियों ने सुनाया अपनी भाषा में गीत
इसी क्रम में एक अन्य जापानी छात्रा ने कहा कि हम शांति और मैत्री की प्रार्थना करते हैं। जापानी विद्यार्थियों ने अपनी भावनाओं को ओरिगेमी की कला में भी पिरोया था। उन्होंने कागज से बनाए गए सुंदर ओरिगेमी के माध्यम से शांति और मित्रता का संदेश मुख्यमंत्री को भेंट किया। बच्चों के हाथों से बना यह छोटा सा उपहार अपने भीतर एक बड़ी भावना समेटे था, दो देशों की नई पीढ़ियों के बीच शांति, मित्रता और साथ आगे बढ़ने की कामना।
संवाद के आत्मीय माहौल के बीच मुख्यमंत्री ने जापानी विद्यार्थियों और लखनऊ के बच्चों के साथ सेल्फी भी ली। मुख्यमंत्री के साथ तस्वीर लेने को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था। यह सहज क्षण कार्यक्रम की औपचारिकता से अलग एक ऐसी याद बन गया, जिसे भारतीय और जापानी विद्यार्थी लंबे समय तक अपने साथ संजोकर रखेंगे।
मजबूत भारत-जापान साझेदारी की नींव
Had a productive meeting and fruitful discussion with Mr. Kotaro Nagasaki, Hon. Governor of Yamanashi Prefecture, Japan at my official residence in Lucknow today.
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 21, 2026
Under the visionary leadership of Hon. PM Shri @narendramodi Ji, India-Japan relations continue to reach new… pic.twitter.com/S0OonlbETK
मुख्यमंत्री आवास पर शुक्रवार को हुआ यह कार्यक्रम अंततः निवेश और आर्थिक साझेदारी से कहीं आगे निकलकर मानवीय रिश्तों का उत्सव बन गया। यहां 13 जापानी विद्यार्थी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों से मिले, अपनी भाषा में गीत सुनाया, ओरिगेमी के माध्यम से शांति और मित्रता का संदेश दिया और भारत के अनुभव अपने साथ लेकर लौटने की तैयारी की।
वहीं भारतीय विद्यार्थियों ने जापानी संस्कृति को करीब से जाना और अपनी संस्कृति की झलक उन्हें दिखाई। एक तरफ यामानाशी के बच्चे थे, दूसरी तरफ लखनऊ के बच्चे। भाषाएं अलग थीं, संस्कृतियां अलग थीं, लेकिन भविष्य का सपना एक था। यही ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ की सबसे बड़ी तस्वीर रही, आज की दोस्ती से कल की मजबूत भारत-जापान साझेदारी की नींव।

