
CJP का बड़ा ऐलान CEC इस्तीफे दे, आंदोलन शुरू होगा
दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए गुरुवार को कहा कि यदि 48 घंटे के भीतर ज्ञानेश कुमार ने पद से इस्तीफा नहीं दिया तो पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी और उनके इस्तीफे के बिना पीछे नहीं हटेगी।
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13 करोड़ वोट हटाए जा चुके- CJP
CJP के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के चुनाव आयुक्त बनने के बाद महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि पश्चिम बंगाल में 97 लाख लोगों को मतदान से वंचित किया गया। उन्होंने कहा कि पूरे देश में अब तक 13 करोड़ वोट हटाए जा चुके हैं।
If CEC Gyanesh Kumar doesn’t resign in 48 hours, we will start a nationwide agitation.
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 24, 2026
Gyanesh Kumar Isteefa Do! pic.twitter.com/mzsU8i5pft
उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जीतने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और हारने वाले इंडिया गठबंधन के बीच सिर्फ तीन प्रतिशत का अंतर था। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाया जाना चुनाव परिणामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि चुनाव चिह्न से जुड़े मामलों में भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा- “राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) तथा शिवसेना के चुनाव चिह्न उठाकर भाजपा की ‘शेल’ पार्टियों को दे दिये गये।
SIR हटा रही मतदाता सूची
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ भी ऐसा ही हुआ।” उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। CJP के संस्थापक सदस्य एवं सह-संयोजक आशुतोष रांका ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गणतंत्र बनने के बाद से प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार मिला है।
उन्होंने कहा कि जब देश में अधिकांश मतदाता गरीब थे, तब भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार दिया था, लेकिन अब 13 करोड़ मतदाताओं को गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के जरिए मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि मतदाताओं को मतदान से रोकने की प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है। उन्होंने गोवा, पश्चिम बंगाल और बिहार में कथित तौर पर मतदाता पहचान को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के मामलों का भी उल्लेख किया।
We’re putting forward 3 clear demands:
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 24, 2026
1. Gyanesh Kumar’s resignation and initiation of criminal proceedings against him.
2. Freeze SIR & restore the January 2025 voter list.
3. Repeal the 2023 law & reform the Election Commission. pic.twitter.com/4zELnMymfw
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
आशुतोष रांका ने कहा, “गोवा में राशन जैसी योजनाओं को भी मतदान के अधिकार से जोड़ दिया गया। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार ने कहा है कि जनकल्याण योजनाओं का फायदा उन्हें ही मिलेगा जो मतदाता हैं। बिहार में भी ऐसा ही हो रहा है। जिन 13 करोड़ लोगों को मतदाता सूची से हटाया गया है, उन्हें धीरे-धीरे कल्याणकारी योजनाओं से अलग कर दिया जायेगा।
इसके जरिये भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कहना चाहती है कि अगर आप उसे वोट नहीं करेंगे तो न सिर्फ आपसे मतदान का अधिकार छीना जाएगा, बल्कि कल्याणकारी योजनाएं भी आपसे दूर रखी जाएंगी।” इस बीच, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि देश में मतदाताओं के अधिकारों का महत्व कम किया जा रहा है और युवाओं को मतदाता सूची में शामिल होने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि SIR के तहत फॉर्म-6 में नए मतदाताओं से उनके माता-पिता के पिछले SIR में शामिल होने से संबंधित सवाल पूछा जा रहा है।
Why are the questions asked to the Election Commission being answered by BJP’s Sambit Patra?
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 24, 2026
Either Sambit Patra should take over the Election Commission, or Gyanesh Kumar should join the BJP. pic.twitter.com/VcDx3YwoMZ
SIR को तत्काल रोके
उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही इसे वैकल्पिक बताया जा रहा हो, लेकिन सॉफ्टवेयर इसे अनिवार्य मान रहा है, जिसके कारण कई युवा मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। सौरव दास ने दावा किया कि एक चुनाव आयुक्त ने इस व्यवस्था को अनधिकृत और नए मतदाताओं को परेशान करने वाला तरीका बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि युवा मतदाताओं, विशेषकर जेन-ज़ी मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में बाधाएं पैदा की जा रही हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में 60 लाख लोगों को “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” के आधार पर हटाए जाने और बाद में 33 लाख लोगों को सूची में शामिल किए जाने का दावा किया।
उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने इसके खिलाफ अदालत में अपील भी दायर की थी, हालांकि दो चुनाव आयुक्तों ने इसपर आपत्ति भी दर्ज की थी। सौरव दास ने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि उन्हें निर्देश कौन दे रहा है। उन्होंने आगामी सभी चुनावों को स्थगित करने और SIR को तत्काल रोकने की मांग की। उन्होंने उच्चतम न्यायालय से SIR से संबंधित फाइलों को जब्त कर अपनी निगरानी में लेने की मांग भी की, ताकि रिकॉर्ड के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
Gyanesh, it’s done bro.
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 24, 2026
Sign the petition and demand Electoral Integrity:https://t.co/dRcPKRzGiM
देश “बहुत संवेदनशील समय” से गुजर रहा
सौरव दास ने चुनाव आयोग से संबंधित 2023 के कानून को निरस्त करने और ऐसा नया कानून बनाने की मांग की जिससे लोगों का चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया में विश्वास कायम हो सके। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और युवाओं तथा सामाजिक संगठनों को इस मुद्दे पर आगे आना चाहिए।

अभिजीत दिपके ने कहा- देश “बहुत संवेदनशील समय” से गुजर रहा है और लोगों के मतदान के अधिकार से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा- “अगर आप जानते हैं कि चुनाव में धांधली की जा रही है तो आपको सख्त होना पड़ेगा। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो आपके लिए कोई खड़ा नहीं होगा।” उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश की जनता के अधिकार का सवाल है।
