
BRICS: भारत-रूस की बड़ी डील
12th BRICS Parliamentary Forum: राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को रूसी संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन के नेतृत्व में आए रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में शामिल सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय पीठासीन अधिकारियों तथा प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के लिए दोपहर के भोज का आयोजन किया।
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राधाकृष्णन ने रूसी संसद के अध्यक्ष से की मुलाकात
Vice-President of India and Chairman of the Rajya Sabha, Shri C. P. Radhakrishnan, hosted a luncheon today for the Presiding Officers and Heads of Delegations of BRICS member and partner countries attending the 12th BRICS Parliamentary Forum 2026 at the Samvidhan Sadan in the Parliament House Complex, New Delhi.Welcoming the dignitaries, he highlighted India’s rich democratic traditions and the timeless wisdom of its civilisational heritage.Emphasising the spirit of BRICS, the Vice President called for greater cooperation, mutual trust and collective action to address shared global challenges, expressing confidence that the Forum would further strengthen dialogue, foster innovation and advance the shared vision of an inclusive and prosperous world.
— Vice-President of India (@VPIndia) October 27, 2026
रूसी प्रतिनिधिमंडल के साथ उन्होंने आतंकवाद से मुकाबले में रूस के निरंतर समर्थन के लिए आभार जताया और भरोसा व्यक्त किया कि भारत और रूस वर्ष 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लेंगे। रूसी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने वोलोदिन को दोबारा स्टेट ड्यूमा का अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी।
उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच नियमित संसदीय आदान-प्रदान दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सभापति ने आतंकवाद से मुकाबले में दोनों देशों के साझा संकल्प के प्रति रूस के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर
उन्होंने भारत और रूस के बीच 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर विश्वास जताया। यह लक्ष्य दोनों देशों के नेतृत्व की सहमति से तय किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ की तैयारियां चल रही हैं। द्विपक्षीय सहयोग के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अंतर-क्षेत्रीय सहयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क शामिल हैं। सभापति ने दोनों देशों के बीच हाल के उच्चस्तरीय संपर्कों का भी उल्लेख किया।
Marking the conclusion of the 12th BRICS Parliamentary Forum 2026, formally handed over the gavel to the Head of the Chinese Delegation, symbolising the transfer of the Forum’s Chairmanship to the Parliament of the People’s Republic of China.#BRICS2026 #BRICSParliamentaryForum https://t.co/S0ebtWGlXD
— Om Birla (@ombirlakota) October 27, 2026
उन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले और उसके जवाब में भारतीय सेनाओं के ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में सुश्री कनिमोझी करुणानिधि के नेतृत्व में पांच सांसदों के रूस दौरे तथा गत दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का जिक्र किया।
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि इस तरह की मुलाकातें दोनों देशों की प्राथमिकताओं को समझने, अनुभव साझा करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने में मदद करती हैं। सभापति ने संसदीय मंच में भाग लेने आए सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय पीठासीन अधिकारियों तथा प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के लिए दोपहर का भोज आयोजित किया।
भारत लोकतंत्र की जननी
इसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, ब्रिक्स और साझेदार देशों की संसदों के अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्यसभा और लोकसभा के महासचिव तथा विभिन्न देशों के अधिकारी और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि देश में लोकतंत्र की परंपरा प्राचीन काल से रही है। उत्तर में वैशाली और दक्षिण में चोल शासकों की ‘कुडवोलाई’ व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत को लोकतंत्र की जननी बताया।
ब्रिक्स के बढ़ते महत्व पर उन्होंने कहा कि यह मंच वैश्विक सहयोग का महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है। ब्रिक्स ऐसा मंच है जहां अलग-अलग संस्कृतियां, समृद्ध इतिहास और गतिशील अर्थव्यवस्थाएं एक संतुलित, समावेशी और समृद्ध विश्व व्यवस्था के साझा लक्ष्य के साथ एकजुट होती हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय मंच की चर्चाएं वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य और साझेदार देशों के बीच एकजुटता, संवाद और आपसी विश्वास के साथ काम करने के साझा संकल्प को दर्शाती हैं।
सी. पी. राधाकृष्णन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें ब्रिक्स देशों को वैश्विक नवाचार और समाधान के महत्वपूर्ण केन्द्र बताया गया था। उन्होंने विश्वास जताया कि 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच इन प्रयासों को आगे बढ़ाएगा और सदस्य तथा साझेदार देशों में विकसित हो रहे नवाचारों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
