गुरुवार का ज्ञान : गुरु शिक्षा में सीखे जन्म कुंडली के भाव और प्रकार
गुरु शिक्षा: गुरु प्रसाद में आज सीखे ज्योतिष ज्ञान में जन्म कुंडली के बारह भाव…
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जन्म कुंडली के बारह भाव

केंद्र – प्रथम, चतुर्थ, सप्तम एवं दशम भाव को केंद्र कहते हैं।
पन्फर – द्वितीय, पंचम, अष्टम एवं एकादश भाव को कहते हैं।
अपोलिकम – तृतीय, षष्ठ, नवम एवं द्वादश भाव को कहते हैं।
त्रिकोण – पंचम एवं नवम भाव को कहते हैं।

त्रिक – षष्ठ, अष्टम तथा द्वादश भाव को कहते हैं।
त्रिशटाय – तृतीय, षष्ठ एवं एकादश भाव को कहते हैं।

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जन्म कुंडली के प्रकार
- जन्म कुंडली एवं लग्न कुंडली – सभी विषय की जानकारी होती है।
- चंद्र कुंडली – सभी विषय की जानकारी होती हैं।
- होरा कुंडली – धन संपत्ति की जानकारी होती हैं।
- सप्तांश कुंडली – संतान सुख की जानकारी होती हैं।
- नवमांश कुंडली – स्त्री सुख की जानकारी होती है।
- द्वादशांश कुंडली – माता-पिता की जानकारी होती है।
- त्रिशांश कुंडली – कामनाएं और स्त्री का चरित्र की जानकारी होती हैं।
ज्योतिष सभी शास्त्र का शिरोमणि है इसमें परमात्मा की ऊर्जा समाई हुई है पूर्व जन्म के संस्कार और गुरु की कृपा हो जाये तो जीवन धन्य हो जाता हैं।
NOTE: प्रत्येक गुरुवार को गुरु प्रसाद मिलता रहेगा जो जिज्ञासु लोग है उनकी इच्छा पूर्ण होती है। यह जानकारी गुरु के आशीर्वाद से मिलता है आप सभी को देने का प्रयास करता हूं। जिज्ञासु लोग कैरियर की जानकारी और लाइफ चेंज के लिए संपर्क करें। नोएडा-लखनऊ-कानपुर आप का साथी ज्योतिषाचार्य राम नजर मिश्र रत्न रुद्राक्ष विशेषज्ञ, 9415126330, 6386254344.
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