कोलकाता ED रेड पर SC सख्त, ममता बनर्जी को SC का नोटिस
ED vs Mamata Banerjee: सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को झटका मिला क्योंकि कोर्ट ने कोलकाता में ED की रेड के खिलाफ FIR पर रोक लगा दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ नोटिस दिया है। बताते चले कि शीर्ष अदालत ने जांच में ‘बाधा डालने’ के आरोप लगाने वाली ईडी की याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और अन्य को नोटिस भेजा है।

सुप्रीम कोर्ट से सीएम ममता को झटका
आपको बतादें कि आज यानी की 15 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ED के खिलाफ FIR पर रोक लगा दी है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने I-PAC ऑफिस में रेड करने पर ED के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए बंगाल सरकार से कहा कि एजेंसी के काम में दखल नहीं दे सकते। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल पुलिस को आई-पैक परिसर पर छापेमारी की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।
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कोर्ट ने ममता सरकार से दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा
शीर्ष अदालत ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने आदेश दिया कि घटना का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखा जाएगा, इसके साथ ही ईडी के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को अगली सुनवाई तक स्थगित रखने का आदेश दिया गया। ई़डी ने अपने काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाया खटखटाया था। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस ममले पर जोरदार सुनवाई हुई, इससे पहले दोनों पक्षों की ओर से जमकर अपनी-अपनी दलीलें दी गई। कोर्ट ने ममता सरकार से दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा और कहा कि केंद्रीय एजेंसी के आरोप गंभीर है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है कि ईडी और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई में क्षेत्रीय पुलिस हस्तक्षेप कर रही है, संविधान हर एक व्यवस्था को स्वतंत्र तरीके से काम करने की छूट देता है। ऐसे में एक राज्य की एजेंसी या पुलिस को इस तरह की गतिविधि करने की छूट नहीं दी जा सकती, साथ ही अदालत ने कहा- स्थितियां और बिगड़ने और कानून का राज खत्म हो जाएगा। किसी भी केंद्रीय एजेंसी को किसी पार्टी के चुनावी कार्यक्रम में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। लेकिन सही तरीके से किसी गैरकानूनी गतिविधि के खिलाफ एक्शन ले सकती है।
ममता बनर्जी पर सबूत चोरी के आरोप
फिलहाल कोर्ट ने ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पुलिस को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी, कोर्ट ने ममता सरकार से दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा और कहा कि केंद्रीय एजेंसी के आरोप गंभीर है।
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असल में ED ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- 8 जनवरी 2026 को रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंचीं और इलेक्ट्रोनिक उपकरण और दस्तावेज अपने साथ ले गईं। ममता के साथ बंगाल DGP भी पुलिस टीम के साथ पहुंचे थे, पुलिस ने ED अफसरों के मोबाइल छीन लिए। ममता बनर्जी मीडिया के सामने भी गईं। इस तरह ED का मनोबल गिरता है और उनके काम में बाधा आती है।

बंगाल सरकार के वकील का बयान
बंगाल सरकार की ओर से जाने-माने वकील कपिल सिब्बल ने कहा- IPAC में कुछ भी नहीं था सिवाय चुनाव संबंधित दस्तावेजों के इन कामों से ईडी का कोई संबंध नहीं है। कपिल सिब्बल ने कहा- ममता बनर्जी, टीएमसी की अध्यक्ष होने के नाते, जेड कैटेगरी की सुरक्षा में हैं, इसलिए यह डीजीपी की जिम्मेदारी थी कि जब वह प्रतीक जैन के परिसर में प्रवेश करें, तो उनका साथ दें।
