माघ मेला 2026: शंकराचार्य–प्रशासन टकराव, धरने पर संत, सियासत गरम
Prayagraj Magh Mela 2026: प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच हुआ टकराव अब एक बड़े धार्मिक-राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। संगम नोज पर स्नान को लेकर उत्पन्न हुए इस विवाद में न सिर्फ पुलिस और संतों के अनुयायियों के बीच झड़प हुई, बल्कि इसके बाद धरना, आरोप-प्रत्यारोप और सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है।
संगम स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद
शंकराचार्य जी महाराज का धरना प्रदर्शन जारी पूरी रात ऐसे ही शिविर के बाहर बैठे रहे कल से अन्न भी ग्रहण नहीं किया, संतों एवं शिष्यों का लगातार पहुंचना जारी प्रशासन मौन सरकार का अहंकार अपने चरम पर #प्रयागराज #माघमेला #शंकराचार्य #ShankaracharyaJyotirmath… pic.twitter.com/RRfjN9fY3y
— 1008.Guru (@jyotirmathah) January 19, 2026
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने लगभग 200 अनुयायियों के साथ रथ/पालकी पर सवार होकर संगम नोज पर मौनी अमावस्या स्नान के लिए निकले। प्रशासन का कहना था कि संगम क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र किसी भी साधु-संत को पालकी या रथ से जाने की अनुमति नहीं है और सभी को पैदल ही स्नान के लिए जाना होगा।
प्रशासन के अनुसार, शंकराचार्य ने इसके लिए कोई पूर्व अनुमति भी नहीं ली थी। वहीं शंकराचार्य का कहना है कि पिछले 39 वर्षों से वह इसी गरिमा और परंपरा के अनुसार संगम स्नान करते आ रहे हैं और शंकराचार्य पद की मर्यादा के अनुरूप पालकी पर जाना उनका अधिकार है।
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पुलिस और अनुयायियों के बीच झड़प
स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने सुरक्षा बैरिकेडिंग लगाकर आगे बढ़ने से रोका। आरोप है कि शंकराचार्य के कुछ अनुयायियों ने बैरियर तोड़ने की कोशिश की, जिससे पुलिस और साधुओं के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई हो गई। इस दौरान कई साधुओं को पुलिस द्वारा हटाए जाने और कुछ को हिरासत में लेने की भी बात सामने आई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शंकराचार्य का रथ सादी वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा खींचकर संगम नोज से करीब एक किलोमीटर दूर छोड़ दिया गया, जिसे उनके समर्थकों ने “अपमानजनक कृत्य” बताया।
प्रयागराज, यूपी: माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना को लेकर धरने पर बैठे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "हम कल सुबह अपने शिविर से संगम स्नान करने निकले थे। उसके बाद प्रशासन ने हमें स्नान नहीं करने दिया। हमारा अपहरण कर लिया। हमारे लोगों को हमसे… pic.twitter.com/udP1kzAqDe
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धरने पर बैठे शंकराचार्य
घटना के बाद नाराज़ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ कहा कि जब तक प्रशासन उन्हें पूरे सम्मान और तय प्रोटोकॉल के तहत संगम तक नहीं ले जाता, तब तक वे गंगा स्नान नहीं करेंगे। शंकराचार्य ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके और उनके अनुयायियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
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कंप्यूटर बाबा का समर्थन
इस विवाद में शंकराचार्य को कंप्यूटर बाबा का खुला समर्थन मिला। कंप्यूटर बाबा धरना स्थल पर जमीन पर लेटकर धरना देते नजर आए। उन्होंने कहा- “ आज देश में संतों, शंकराचार्यों और सनातन का अपमान हो रहा है। माघ के पवित्र महीने में प्रयागराज में संतों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाना बेहद दुखद है। जो सरकार खुद को सनातनी कहती है, उसी सरकार के राज में संतों का अपमान हो रहा है।” उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा- ऐसी सरकार का विरोध किया जाना चाहिए जो संतों और धर्माचार्यों का अनादर कर रही है।
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विपक्ष का हमला, संजय सिंह का बयान
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले को लेकर योगी सरकार और यूपी पुलिस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा – “यह सिर्फ एक संत को रोकने की घटना नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक और धार्मिक मर्यादाओं को रौंदने का मामला है। शंकराचार्य जैसे विश्वविख्यात धर्माचार्य के साथ ऐसा व्यवहार सत्ता के अहंकार को दर्शाता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी पुलिस अब संविधान से नहीं, बल्कि राजनीतिक आदेशों से संचालित हो रही है और असहमति की हर आवाज़ को कानून-व्यवस्था का नाम देकर दबाया जा रहा है।
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के रथ को रोका गया और उनके शिष्यों के साथ पुलिस प्रशासन की झड़प हुई।
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सोशल मीडिया पर बवाल मचा है। सबसे मजेदार उन लोगों को पढ़ना लग रहा है, जो सनातन, संत, हिंदू आदि अनादि विषयों पर कटाक्ष करते हैं। मखौल उड़ाते हैं। कोई बात नहीं,… pic.twitter.com/n05FUxnONe
प्रशासन का पक्ष
प्रयागराज की मंडल आयुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया कि माघ मेले में किसी भी साधु-संत को पालकी या रथ से संगम तक जाने की अनुमति नहीं है। यह नियम सभी के लिए समान है।
माघ मेला 2026 | सुरक्षित मेला, स्मार्ट व्यवस्था
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प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन संगम क्षेत्र में करोड़ों श्रद्धालु मौजूद थे और सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक भगदड़ जैसी बड़ी घटना को जन्म दे सकती थी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पूरे क्षेत्र में 452 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और फुटेज के आधार पर बैरिकेडिंग तोड़ने व अव्यवस्था फैलाने वालों पर FIR दर्ज की जाएगी।
करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था
प्रशासन के मुताबिक, मौनी अमावस्या के दिन दोपहर 12 बजे तक 3.15 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई, जबकि रात तक यह संख्या 4 से 5 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। मेला क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है और AI तकनीक व पैरामिलिट्री फोर्स की मदद से सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है।
माघ मेला-2026 के मुख्य स्नान पर्व मौनी अमावस्या का आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित रूप से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिला प्रशासन के द्वारा मौनी अमावस्या पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के दृष्टिगत बनाई गई समुचित योजना तथा सभी संबंधित विभागों के प्रभावी समन्वय एवं अथक… pic.twitter.com/9vIUucTFhI
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बढ़ता विवाद, गहराता सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर धार्मिक परंपराओं और संतों की गरिमा से समझौता किया जा सकता है? वहीं दूसरी ओर प्रशासन का तर्क है कि इतने बड़े आयोजन में नियमों का उल्लंघन किसी के लिए भी स्वीकार्य नहीं हो सकता, चाहे वह कितना ही बड़ा धर्माचार्य क्यों न हो।
फिलहाल शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने धरने पर अडिग हैं और प्रशासन कार्रवाई की बात कर रहा है। ऐसे में माघ मेला 2026 का यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, जिसका असर धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है।
