स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर उठे सवाल
प्रयागराज : प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उच्चतम न्यायालय की नोटिस का हवाला देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। मेला प्रशासन द्वारा ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य न माने जाने को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जवाब भी सामने आया है।
प्रेस वार्ता जारी, महाराज जी के समर्थन लगातार शिष्यों का, वकीलों का, विभिन्न दलो के नेताओ का आना जारी है। #प्रयागराज #माघमेला #ShankaracharyaJyotirmath #shankaracharyaavimukteshwaranandSaraswatijimaharaj #badrivishal #himalaya #SiddharthSamwat pic.twitter.com/qVlIxB8bnK
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अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया जवाब
उन्होंने साफ कहा है कि शंकराचार्य वह है जिसे बाकी अन्य तीन पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। उन्होंने दावा किया है कि बाकी दो पीठों द्वारका पीठ और श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य उन्हें शंकराचार्य कहते हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा- पिछले माघ मेले में उन्हें साथ लेकर दोनों शंकराचार्य स्नान कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि जब श्रृंगेरी और द्वारका के शंकराचार्य यह कह रहे हैं कि वह ही शंकराचार्य हैं, तो आखिर किस प्रमाण की आवश्यकता है कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं।
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गौ माता को राष्ट्र माता बनवाने के लिए माघ मेले में शिविर शिविर जाकर साधु संतों और महात्माओं से समर्थन लेते हुए। गौमाता के लिए एक आवाज़ गौमाता राष्ट्रमाता #प्रयागराज #माघमेला #ShankaracharyaJyotirmath #shankaracharyaavimukteshwaranandSaraswatijimaharaj #badrivishal #himalaya… pic.twitter.com/GkzkEbOz96
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क्या CM या राष्ट्रपति शंकराचार्य तय करेगा
उन्होंने कहा- “क्या अब यह प्रशासन तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं। क्या उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री या भारत का राष्ट्रपति तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है। भारत के राष्ट्रपति को भी यह अधिकार नहीं है कि वह यह तय करें कि शंकराचार्य कौन है। शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य करते हैं। हम निर्णीत हैं क्योंकि पुरी के शंकराचार्य ने हमारे बारे में कुछ नहीं कहा है।
परंपरा की दुहाई देने वाले अधिकारी देख ले यह वीडियो माघ मेला २०२४ की है तब भी शंकराचार्य जी पालकी से ही गए थे मौनी अमावस्या का स्नान करने के लिय तब भी यही प्रशासन था तो अब यह व्यवहार क्यो और किसके आदेश पर हो रहा है। #प्रयागराज #माघमेला #ShankaracharyaJyotirmath… pic.twitter.com/ou5Cy4YKmB
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उन्होंने न तो यह कहा कि वह शंकराचार्य नहीं है और ना ही यह कहा कि शंकराचार्य हैं। पुरी के शंकराचार्य इस मामले में मौन हैं। इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट में भी जो हलफनामा उनकी ओर से दाखिल किया गया है। उसको लेकर यह भ्रम फैलाया गया कि उन्होंने विरोध किया है लेकिन जब हम लोगों ने हलफनामे की उच्चतम न्यायालय से कापी निकाली तो उसमें यह लिखा गया है कि हमसे कोई समर्थन मांगा नहीं इसलिए हमने समर्थन नहीं दिया है।”
रात के अंधेरे में प्रशासन ने चुपचाप शिविर के बाहर यह नोटिस चस्पा किया। #प्रयागराज #माघमेला #ShankaracharyaJyotirmath #shankaracharyaavimukteshwaranandSaraswatijimaharaj #badrivishal #himalaya #SiddharthSamwat pic.twitter.com/zzJu6In05K
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अविमुक्तेश्वरानंद ने दी खुली चुनौती
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- “दो शंकराचार्य का प्रत्यक्ष और लिखित व व्यवहारिक समर्थन मुझे प्राप्त है। इसके साथ ही तीसरे पीठ के शंकराचार्य की मौन स्वीकृति हमारे साथ है। ज्योतिषपीठ का आखिर और कौन शंकराचार्य है यह बताइए। निर्विवाद रूप से ज्योतिष पीठ के हम शंकराचार्य हैं। अगर इस पर कोई विवाद दिखता है तो इसका मतलब वह दूषित भावना वाला है।” उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि अगर कोई यह कहता है कि मैं ज्योतिष पीठ पर शंकराचार्य हूं तो वह आकर मुझसे बात करें।
