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Meta–WhatsApp को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

Supreme Court meta Whatsapp: सुप्रीम कोर्ट whatsapp और Meta को प्राइवेसी पॉलिसी मामले में फटकार लगाते हुए कहा- आपको सिर्फ अपने मुनाफे से मतलब है। आप यह बखूबी समझते है कि लोग whatsapp के आदी हो चुके है। हर कोई आज इसका इस्तेमाल कर रहा है पर आप उनकी जानकारी चुरा रहे है। इसके साथ ही SC ने कहा- नियम मानो या भारत से निकल जाओ…

Meta–WhatsApp को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

Whatsapp-meta प्राइवेसी पॉलिसी पर SC

आपको बताते चले कि व्हाट्सएप-मेटा प्राइवेसी पॉलिसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सख्त टिप्पणी करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- गुमराह करने वाली नीतियों से देश के नागरिकों की निजता से समझौता नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई कंपनी देश के संविधान और कानूनों का पालन नहीं कर पाती, तो उसके लिए विकल्प स्पष्ट हैं.. भारत से निकल जाएं। जानें 213 करोड़ जुर्माने और 3 जजों की बेंच की अगली सुनवाई पर पूरी रिपोर्ट।

बताते चले कि CJI सूर्यकांत ने Meta से कहा – आप अपना कमर्शियल इंटरेस्ट जानते हैं और आप यह भी जानते हैं कि आपने कंज्यूमर्स को APP का आदी कैसे बनाया है। हर कोई इसका इस्तेमाल करता है। तमिलनाडु के किसी गांव में बैठा व्यक्ति, जो सिर्फ़ अपनी भाषा समझता है, वह आपकी शर्तें कैसे समझेगा? आप एक अंडरटेकिंग दीजिए, फिर हम केस की मेरिट के आधार पर सुनवाई करेंगे।

WhatsApp डेटा इकट्ठा करने और बेचने के लिए नहीं है। आप मैसेजिंग और कम्युनिकेशन सर्विस देने के लिए हैं। हम आपको कई उदाहरण दिखा सकते हैं। आप अपने डॉक्टर से दवाइयां मांगते हैं, जैसे ही वह प्रिस्क्रिप्शन भेजते हैं। आप देखेंगे कि 5 मिनट में आपके पास क्या मैसेज आते हैं, जस्टिस बागची ने कहा – DPDP एक्ट सिर्फ़ प्राइवेसी के बारे में बात करता है। आप ऑनलाइन विज्ञापन के मकसद से डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

Meta–WhatsApp को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

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सुप्रीम कोर्ट में उठा Meta-WhatsApp पर यह मुद्दा

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि ‘निजता का अधिकार’ कोई विकल्प नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया एक ‘मौलिक अधिकार’ है। हालांकि, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के वकील ने एनसीएलएटी (NCLAT) के कुछ निष्कर्षों पर आपत्ति जताई है।

व्हाट्सएप की नीति पर सवाल उठाते हुए सीजेआई ने कहा, “आपने इसे इतनी चालाकी से तैयार किया है कि इसे समझना लगभग नामुमकिन है। वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने मेटा, व्हाट्सएप और सीसीआई (CCI) द्वारा दायर तीन मुख्य अपीलें थीं। वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने इन अपीलों पर पक्ष रखा। मेटा के वकील ने दलील दी कि कोर्ट के आदेशानुसार, 213 करोड़ रुपए के जुर्माने का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा- व्यावसायिक लाभ के लिए लोगों के डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है और अब तक लाखों यूजर्स के डेटा का दुरुपयोग हो चुका है। इस पर Meta के वकील अखिल सिबल ने तर्क दिया कि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए सीमित डेटा शेयरिंग की अनुमति है।

सीजेआई ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा- “यदि आपको डेटा का कोई भी हिस्सा बेचने लायक लगेगा, तो आप उसे बेच देंगे। सिर्फ इसलिए कि भारतीय उपभोक्ता शांत हैं और उनके पास आवाज नहीं है, आप उन्हें शिकार नहीं बना सकते।”

फिलहाल अदालत की तीखी टिप्पणियों और सवालों के बीच मुकुल रोहतगी ने कहा कि Meta एक हलफनामा दायर कर अपनी गतिविधियों का विवरण देगा और अदालत उसे पढ़ने के बाद निर्णय ले सकती है। इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए अदालत ने Meta और WhatsApp को हलफनामे दाखिल करने की अनुमति देते हुए मामले की सुनवाई अगले सोमवार तक स्थगित कर दी। साथ ही, सीसीआई के वकील समर बंसल के सुझाव पर अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी इस मामले में पक्षकार बना दिया।

क्या है यह पूरा मामला

Meta–WhatsApp को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

यह विवाद भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के नवंबर 2024 के उस आदेश से उत्पन्न हुआ है, जिसमें व्हाट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट की जांच की गई थी। यह पाया गया कि भारत के ओटीटी मैसेजिंग बाजार में प्रभुत्व रखने वाले WhatsApp ने उपयोगकर्ताओं पर ‘लो या छोड़ दो’ (Take it or leave it) ढांचा थोप दिया, जिससे उन्हें वास्तविक रूप से बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं मिला।

सीसीआई के अनुसार, Meta ने अपनी मैसेजिंग सेवा तक निरंतर पहुंच को Meta प्लेटफॉर्म्स समूह की अन्य इकाइयों के साथ विस्तारित डेटा साझा करने की शर्त से जोड़ दिया। इसे प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत प्रभुत्व के दुरुपयोग के रूप में माना गया। इसके आधार पर सीसीआई ने Meta प्लेटफॉर्म्स पर 213.14 करोड़ का जुर्माना लगाया और उपभोक्ता विकल्प बहाल करने के लिए कई सुधारात्मक निर्देश जारी किए। Meta प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सऐप ने जनवरी 2025 में इस आदेश को NCLAT में चुनौती दी। नवंबर 2025 में, NCLAT ने विज्ञापन से संबंधित डेटा साझा करने पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध को हटाते हुए सीसीआई के इस निष्कर्ष को पलट दिया कि WhatsApp ने अपने प्रभुत्व का अवैध रूप से विस्तार किया है। हालांकि, उसने मेटा प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए 213.14 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा था फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

https://navbharatlive.com/india/supreme-court-slams-meta-whatsapp-data-privacy-fundamental-right-theft-case-1548784.html

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