AI समिट में मैक्रों बोले – भारत डिजिटल क्रांति का वैश्विक मॉडल
दिल्ली : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता दौड़ में डिजिटल सार्वजनिक मूलभूत ढांचों पर आधारित पहचान-पत्र, जनधन खातों, स्वास्थ्य कार्ड और UPI जैसी सुलभ डिजिटल भुगतान सुविधाओं का संदर्भ देते हुए प्रौद्योगिकी को जन-जन के लिए सुलभ बनाने के क्षेत्र में भारत की तारीफ की तथा AI जैसी प्रौद्योगिकी के लिए वैश्विक नियम-कायदे बनाने पर जोर दिया।
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फ्रांस, यूरोप और भारत मिल कर चले- मैक्रों
राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में गुरुवार को यहां भारत AI इम्पैक्ट समिट एवं प्रदर्शनी -2026 में हिस्सा लेते हुए कहा कि AI को नवाचार और रफ्तार के साथ-साथ जिम्मेदार बनाने के लिए फ्रांस, यूरोप और भारत को मिल कर चलना चाहिए।
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) February 19, 2026
उन्होंने पिछले साल पेरिस में आयोजित AI सम्मेलन में AI को विश्व समाज को मजबूत करने का माध्यम बनाने के लिए भारत और फ्रांस की साझा पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि एक साल में ही इसका असर दिखा है। उन्होंने फ्रांस में 15 साल तक के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की अपनी सरकार की पहल को -‘सभ्यता से जुड़ा विषय’ बताया। उन्होंने AI को नागरिकों पर केंद्रित बनाने के लिए सरकारों और कंपनियों के बीच मजबूत भागीदारी पर बल दिया।
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डिजिटल पहचान से बदला लोगों का जीवन
Solutions to our digital challenges are not found on Google, but built with Google and all stakeholders.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) February 19, 2026
At the Delhi AI Summit, together with @sundarpichai, we discussed the priorities of the French G7 Presidency. And I shared one message: Choose France! pic.twitter.com/tRWqzDw6V8
मुंबई से हो कर दिल्ली पहुंच फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने अपने भाषण की शुरुआत मुंबई के रेहड़ी-पटरीवाले की कहानी से शुरू की जो दस साल पहले बैंक खाता नहीं खोल पा रहा था क्योंकि उसके पास कोई पहचान या औपचारिक पता नहीं था। आज उसका खाता है और वह बैंक खाते के जरिए देश भार के अपने ग्राहकों से निश्चिंत रूप से डिजिटल भुगतान प्राप्त करता है। इसके माध्यम से उन्होंने भारत में 1.4 अरब लोगों की डिजिटल पहचान प्रणाली खड़ी करने और उससे नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उत्पन्न सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोगों का दैनिक जीवन बदल गया है।
उन्होंने भारत को एक “सभ्यतागत शक्ति’ बताते हुए कहा- भविष्य उन देशों का होगा जो “नवाचार को ज़िम्मेदारी के साथ, प्रौद्योगिकी को इंसानियत के साथ” जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने 1.4 अरब लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में जोड़कर कर वह कर दिखाया है जिसे दुनिया कभी नामुमकिन कहती थी। उन्होंने कहा कि भारत अब भुगतान की एक ऐसी बुनियादी सुविधा का संचालन करता है जो “हर महीने 20 अरब लेन-देन” का काम संभाती है और देश में “50 करोड़ डिजिटल हेल्थ कार्ड ” जारी किये जा चुके हैं।
Les solutions aux défis du numérique ne se trouvent pas sur Google, mais se construisent avec Google et tous les acteurs.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) February 19, 2026
Au Sommet de Delhi sur l’IA, avec @sundarpichai nous avons parlé des priorités de la Présidence française du G7. Et j’ai porté un message : choose France ! pic.twitter.com/KTpKh3nlzx
उन्होंने आगे कहा- “इसे इंडिया स्टैक- ओपन इंटरऑपरेबल सॉवरेन (सार्वजनिक अवसंरचनात्क प्रणाली) कहते हैं और इंडिया AI इम्पैक्ट सम्मेलन इसी बारे में है।
AI से बढ़ेगी इंसानी तरक्की
फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने कहा- AI- को इंसानी तरक्की के लिए एक बदलाव लाने वाली ताकत के तौर पर लिया जाना चाहिए। उन्होंने पिछले साल पेरिस में भारत और फ्रांस के सहयोग से आयोजित AI एक्शन समिट का जिक्र करते हुए उस सम्मेलन को प्रौद्योगिकी के लिये वैश्विक नियम तय करने में एक अहम मोड़ बताया।
उन्होंने कहा कि पेरिस AI सम्मेलन में “हमने उन टेक्नोलॉजी के लिए एक वैश्विक मार्गदर्शक सिद्धांत तय किया था जो हमारे समाज और हमारी अर्थव्यवस्था को बदल देंगे। हम कहते हैं कि AI मानवता को तेज़ी से नवाचार करने, स्वास्थ्य सुरक्षा, ऊर्जा, परिवहन सेवाओं, खेती और सरकारी सेवाओं में मानव जाति की भलाई के लिए बदलाव लाने में मदद करेगा। हम दोनों इस क्रांति में विश्वास करते हैं।”
L'avenir de l'IA sera construit par ceux qui sauront allier innovation et responsabilité, technologie et humanité.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) February 19, 2026
La France, l'Europe, l'Inde et ses partenaires sont dans la course, le voyage ne fait que commencer. Jai Ho! pic.twitter.com/VQDQFsPD9u
AI को लेकर चेतावनी- मैक्रों
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि AI आज बड़ी रणनीतिक स्पर्धा का क्षेत्र गया है और “बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां और भी बड़ी हो गई हैं।” उन्होंने साथ में चेतावनी दी कि इस प्रौद्योगिकी के चलते शक्ति के खतरनाक केंद्रीयकरण का खतरा भी बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि भारत का “स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स”, ‘कार्य विशेष पर केंद्रित , स्मार्टफोन-रेडी AI टूल्स पर जानबूझकर दांव लगाना और स्टार्टअप्स को कम कीमत पर 38,000 जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स) की सुविधाएं देना एक अलग संप्रभु रणनीति का उदाहरण है। भारत ने इस सोच को चुनौती दी कि AI तो एक “एक ऐसा खेल है जिसे सिर्फ बड़े लोग ही खेल सकते हैं।”
Protéger nos enfants et nos adolescents est une question de civilisation.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) February 19, 2026
Il n'y a aucune raison pour qu'ils soient exposés en ligne à ce qui est légalement interdit dans le monde réel. pic.twitter.com/dO3lMulHFr
उन्होंने कहा कि AI, जीपीयू, चिप्स अब भू-राजनीतिक और आर्थिक शब्दावली का हिस्सा बन गये हैं और पेरिस एआई सम्मेलन के बाद से बड़ी टेक्नोलॉजी फर्मों के बीच शक्ति का केंद्रीयकरण और भी तेज हो गया है। श्री मैक्रों ने भारत, फ्रांस और यूरोप से “मानव -केंद्रित AI” पर आधारित एक साझा रास्ता बनाने की अपील की, जिसमें लोगों के अधिकारों की रक्षा हो, जो सबके लिए समान तरीके से सुलभ हो और रफ्तार के लिए जिम्मेदारी को बलि पर न चढ़ाया जाए।उन्होंने कहा- “AI का भविष्य वे लोग बनाएंगे जो नवाचार और ज़िम्मेदारी के साथ चलेंगे। भारत और फ्रांस मिलकर इस भविष्य को बनाने में मदद करेंगे।”
In Delhi, we are inaugurating the Franco-Indian Center for Artificial Intelligence in Health, jointly led by AIIMS, Sorbonne University, and the Paris Brain Institute.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) February 18, 2026
Research, training, innovation: France and India are harnessing AI for the common good! pic.twitter.com/MCW9XPxUpo
AI से नवाचार प्रभावित होगा
फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने कहा “भारत और फ्रांस, यूरोप और हमारे उन भागीदारों के साथ, जो हमारे तरीके में विश्वास करते हैं… उनका तरीका अलग हो सकता है।” उल्लेखनीय है कि पेरिस AI एक्शन समिट में अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने AI कंपनियों पर किसी तरह के औपचारिक नियमन नियंत्रण के सुझाव पर असहमति जताते हुए कहा कि था कि इससे इस नवाचार प्रभावित होगा।
When friends connect, innovation follows. Ready for The AI Impact Summit! pic.twitter.com/oh4700pQ09
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) February 18, 2026
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, “AI का भविष्य वे लोग बनाएंगे जो इनोवेशन और ज़िम्मेदारी, टेक्नोलॉजी को मानवता के साथ जोड़ेंगे और भारत तथा फ्रांस इस भविष्य को बनाने में मदद करेंगे।” उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का मकसद AI के विकास की रफ़्तार को सिर्फ तेज़ करना नहीं था, बल्कि इस क्षेत्र में वैश्विक चर्चाओं को ठोस आकार देना है और अब इस कहानी को बेहतर दिशा देनी है।

उन्होंने AI के क्षेत्र में फ्रांस-भारत भागीदारी के विस्तार पर ज़ोर देते हुए कहा – दोनों देशों की यह भागीदारी कूटनीति से आगे बढ़कर ठोस सहयोग में बदल गई है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के लिए नया भारत- फ्रांस केंद्र इस भागीदारी का एक प्रतीक है। इसे सोरबोन यूनिवर्सिटी और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट के साथ मिल कर स्थापित किया गया है। यह AI-संचालित स्वास्थ्य सेवा की संभावनाओं पर केंद्रित दुनिया के दो बड़े चिकित्सा और अनुसंधान संस्थानों को जोड़ता है।
