5 बार ट्रैफिक नियम तोड़े तो 3 महीने का लाइसेंस सस्पेंड
Traffic Rule Change: सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और लगातार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों पर लगाम कसने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। नए मोटर वाहन नियमों के तहत अब यदि कोई वाहन चालक एक कैलेंडर वर्ष में पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। यह नया नियम 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो चुका है।

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सरकार का साफ संदेश है कि अब केवल जुर्माना भरकर नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। बार-बार लापरवाही करने वालों को इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
RTO और DTO को मिला लाइसेंस सस्पेंड करने का अधिकार
सेंट्रल मोटर व्हीकल्स (तीसरा संशोधन) नियम 2026 के तहत अब क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) और जिला परिवहन कार्यालय (DTO) को सीधे तौर पर ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंशन की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार दे दिया गया है। पहले लाइसेंस सस्पेंड करने के लिए गंभीर अपराध साबित करना जरूरी होता था, लेकिन अब केवल चालानों की संख्या के आधार पर भी कार्रवाई संभव होगी। हालांकि, न्याय प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए ड्राइवर को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। बिना सुनवाई के लाइसेंस निलंबित नहीं किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री @nitin_gadkari ने कल सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए वाहन से वाहन संचार के लिए 30 गीगाहर्ट्ज़ रेडियो फ्रीक्वेंसी के आवंटन की जानकारी दी
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) January 24, 2026
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की सलाहकार समिति ने सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए बहुआयामी उपायों पर जोर दिया… pic.twitter.com/AGqgqPm840
छोटी गलतियां भी पड़ेंगी भारी
अब तक ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंशन की कार्रवाई मुख्य रूप से गंभीर अपराधों जैसे—नशे में गाड़ी चलाना, अत्यधिक ओवरस्पीडिंग, जानलेवा दुर्घटना, किडनैपिंग या हमला जैसे मामलों में होती थी। लेकिन नए नियमों के तहत इसका दायरा काफी बढ़ा दिया गया है।
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अब हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, रेड लाइट जंप करना, मोबाइल फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग करना, गलत लेन में वाहन चलाना जैसी “छोटी” दिखने वाली लापरवाहियों को भी गंभीरता से लिया जाएगा। यदि कोई चालक साल में पांच बार ऐसी गलतियां करता है, तो उसे “आदतन अपराधी” माना जाएगा और उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि यही छोटी लापरवाहियां आगे चलकर बड़े सड़क हादसों का कारण बनती हैं।
हर साल मिलेगा नया मौका, रिकॉर्ड होगा रीसेट
FOR SAFER ROADS. FOR A SAFER TOMORROW.
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) January 24, 2026
Join us for a special gathering of thought leaders and inspiring voices championing road safety as a shared responsibility that every citizen must uphold, on 25th January 2026 (Sunday), from 11 AM onwards.#SadakSurakshaAbhiyan2026… pic.twitter.com/0f2dYvVA57
इस नियम के तहत राहत की बात यह है कि चालानों की गिनती सालाना आधार पर होगी। यानी पिछले वर्ष किए गए उल्लंघन अगले साल के रिकॉर्ड में नहीं जोड़े जाएंगे। हर कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में ड्राइवर का रिकॉर्ड स्वतः “जीरो” से शुरू होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य ड्राइवरों को सुधार का मौका देना है, ताकि वे भविष्य में अधिक जिम्मेदारी से वाहन चला सकें।
डिजिटल चालान और ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य
मंत्रालय ने डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन सिस्टम को और मजबूत करने पर जोर दिया है। अब सीसीटीवी कैमरे, ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर (ANPR) और सेंसर आधारित सिस्टम के जरिए नियम तोड़ने वालों की पहचान की जाएगी।
चालान जारी होने के बाद वाहन चालक को तीन दिनों के भीतर ऑनलाइन या 15 दिनों के भीतर फिजिकल तरीके से जुर्माना भरना होगा। यदि 45 दिनों तक कोई जवाब नहीं दिया जाता है, तो चालान को स्वतः स्वीकार मान लिया जाएगा और भुगतान अगले 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।

यदि कोई चालक चालान को चुनौती देता है, तो संबंधित प्राधिकरण को सुनवाई करनी होगी। समाधान न होने पर व्यक्ति 50 प्रतिशत जुर्माना जमा कर अदालत में अपील कर सकता है।
सेवाएं हो सकती हैं ब्लॉक
नियमों के अनुसार, जब तक जुर्माना पूरा नहीं चुकाया जाता, तब तक ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल, वाहन पंजीकरण, यहां तक कि वाहन की खरीद-फरोख्त जैसी सेवाएं भी सरकारी पोर्टल पर ब्लॉक की जा सकती हैं। यह प्रावधान नियमों के पालन को और प्रभावी बनाने के लिए जोड़ा गया है।
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सड़क दुर्घटनाएं कम करना है उद्देश्य

भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। मंत्रालय का कहना है कि नए नियमों का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में कमी लाना और ड्राइवरों में अनुशासन की भावना विकसित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि लाइसेंस सस्पेंशन का डर जुर्माने से कहीं ज्यादा प्रभावी होता है। यह नया नियम वाहन चालकों पर एक तरह का मानसिक दबाव बनाएगा, जिससे वे नियमों का पालन करने के लिए मजबूर होंगे।
निष्कर्ष:- कुल मिलाकर, यह नया नियम देश की सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब वाहन चलाते समय सिर्फ अपनी जान ही नहीं, बल्कि अपने ड्राइविंग लाइसेंस की “लाइफ” का भी ध्यान रखना होगा। बार-बार की गई लापरवाही अब महंगी साबित हो सकती है।
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