उत्तर प्रदेश

जातीय बैठक पर नाराज बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी में मचा घमासान

UP Politics: यूपी में भारतीय जनता पार्टी में ‘ठाकुर कुटुंब’ के बाद हाल ही में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक से जातीय समीकरणों को लेकर हलचल तेज हो गई है। बताते चले कि कुछ महीनों पहले उत्तर प्रदेश के राजपूत विधायकों ने एक बैठक की थी तो वहीं अब ब्राह्मण विधायकों ने बैठक कर राजनीतिक बवाल मचा दिया है। जिसपर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी विधायकों की भोज पर नाराजगी जताई है।

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प्रदेश अध्यक्ष बैठक से हुए नाराज

बताते चले कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी ब्राह्मण विधायकों की भोज बैठक पर नाराजगी जताते हुए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भाजपा जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि वे किसी तरह की नकारात्मक राजनीति का शिकार न बनें। वहीं इस बैठक को पार्टी में जातीय संतुलन को लेकर उभर रहे असंतोष के तौर पर भी देखा जा रहा है। वहीं सियासी दृष्टिकोण से इसे ठाकुर बनाम ब्राह्मण की राजनीति के तौर पर भी देखा जा रहा हैं।

जातीय बैठक पर नाराज बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी में मचा घमासान

वहीं सूत्रों की मानें तो इस बैठक में पार्टी के अंदर ब्राह्मण समाज की भूमिका, उनके प्रतिनिधित्व और शक्ति को लेकर चर्चा की गई है। जिससे इस बात बल मिलता दिख रहा है कि पार्टी में उनकी आवाज दब रही है जिससे उनमें असुरक्षा और असंतोष बढ़ रहा है।

पंकज चौधरी ने किया आगाह

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भाजपा जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि वे किसी तरह की नकारात्मक राजनीति का शिकार न बनें, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की बैठकों का कोई भी कृत्य भाजपा के संविधान एवं आदर्शो के अनुरूप नहीं माना जाना चाहिये। भाजपा और उसके कार्यकर्ता परिवार या वर्ग विशेष को लेकर राजनीति करने में विश्वास नहीं करते। ऐसी कोई भी गतिविधि भाजपा की संवैधानिक परंपराओं के अनुकूल नहीं।

आपको बताते चले कि यूपी में ठाकुर और ब्राह्मण वर्ग शुरू से ही बीजेपी का वोट बैंक रहा है, वहीं अब ठाकुर बनाम ब्राह्मण की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि ब्राह्मणों की आवाज कमजोर हो रही है, हालांकि ये बात यूं ही नहीं उठी है। वहीं पहले भी योगी सरकार पर कई बार ब्राह्मणों की अनदेखी आरोप भी लगे हैं। जिसको लेकर समाजवादी पार्टी भी कई बार इस मुद्दे पर हवा देते देखी जा सकती है और सरकार पर मुख्यमंत्री की जाति (ठाकुर) के लोगों को सरंक्षण देने और बचाने का आरोप भी लगाती रही है।

जातीय बैठक पर नाराज बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी में मचा घमासान

बीजेपी में शामिल जाति

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यूपी में ब्राह्मणों की आबादी करीब 10-11 फीसदी है जबकि ठाकुरों की आबादी लगभग 6-7% है। यूपी विधानसभा में बीजेपी के कुल 258 विधायक हैं, इनमें से 42 ब्राह्मण, 45 ठाकुर, 84 ओबीसी, 59 अनुसूचित जाति, 0 मुस्लिम और 28 दूसरी सवर्ण जातियों के विधायक है। जिनमें वैश्य, कायस्थ, पंजाबी और खत्री समेत अन्य जातियां शामिल हैं।

वहीं विधान परिषद् में बीजेपी के पास कुल 79 एमएलसी हैं, जिनमें 14 ब्राह्मण, 23 ठाकुर, 26 ओबीसी, 2 अनुसूचित जाति, 2 मुस्लिम और 12 दूसरी सवर्ण जातियां हैं। इन आंकड़ों पर नजर डाले तो जातीय समीकरणों के हिसाब से ब्राह्मणों की संख्या ठाकुरों से ज्यादा है लेकिन विधानसभा और विधान परिषद् में राजपूतों के मुकाबले उनका प्रतिनिधित्व कम है।

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बैठक से क्या निकला संदेश

ठाकुर विधायकों की कथित बैठक के बाद ब्राह्मण बीजेपी विधायकों और एमएलसी ने भी बैठक की, इसके बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। सवाल यह नहीं है कि विधायक मिले या साथ बैठे। दरअसल, सवाल यह है कि यह बैठक किस मैसेज के साथ सामने आई और इस समय इसके क्‍या मायने है? हालांकि उप मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने तो बस यह कह दिया कि विधायकों का मिलना, बैठना अलग विषय है। इसको अलग चश्मे से नहीं देखना चाहिए।

https://navbharatlive.com/uttar-pradesh/bjp-state-president-warning-on-brahmin-community-meetings-1482994.html

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