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डिजिटल जनगणना की कल से शुरुआत, पूछे जाएंगे ये सवाल

Census 2027: भारत में जनगणना की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने जा रही है, लेकिन इस बार इसका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। 1 अप्रैल से शुरू हो रही जनगणना 2027 का पहला चरण कई मायनों में ऐतिहासिक और तकनीकी रूप से उन्नत माना जा रहा है। यह पहली बार होगा जब देश में जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी और इसमें जियो-रेफरेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा। इससे न केवल डेटा संग्रहण की प्रक्रिया तेज और सटीक होगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

कल से डिजिटल जनगणना की शुरुआत, पूछे जाएंगे ये सवाल
कल से डिजिटल जनगणना की शुरुआत, पूछे जाएंगे ये सवाल

डिजिटल जनगणना की नई शुरुआत

इस बार जनगणना का सबसे बड़ा बदलाव इसका डिजिटल होना है। पहले जहां जनगणना कर्मी घर-घर जाकर कागजों पर जानकारी दर्ज करते थे, वहीं अब मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए डेटा इकट्ठा किया जाएगा। जियो-रेफरेंसिंग तकनीक के माध्यम से हर घर की सटीक लोकेशन डिजिटल मैप पर दर्ज की जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि कोई भी मकान छूटेगा नहीं और डुप्लीकेट एंट्री की संभावना भी खत्म हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से जनगणना अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनेगी, जिससे नीतियों के निर्माण में बेहतर मदद मिलेगी।

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2246847&reg=3&lang=2

दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

जनगणना 2027 को दो मुख्य चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू हो रहा है, जिसमें हाउस लिस्टिंग यानी मकानों और घरों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इस चरण में घर की संरचना, सुविधाएं, संसाधन और परिवार से संबंधित बुनियादी जानकारी दर्ज की जाएगी।

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दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या की विस्तृत गणना की जाएगी। इस चरण में व्यक्तियों से जुड़ी जानकारी जैसे आयु, शिक्षा, रोजगार और अन्य सामाजिक-आर्थिक डेटा एकत्र किया जाएगा। आधिकारिक आंकड़े 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि के आधार पर तय किए जाएंगे।

कल से डिजिटल जनगणना की शुरुआत, पूछे जाएंगे ये सवाल
कल से डिजिटल जनगणना की शुरुआत, पूछे जाएंगे ये सवाल

आज़ादी के बाद पहली बार जातिगत डेटा

इस जनगणना की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें जाति से जुड़ा डेटा भी शामिल किया जाएगा। आज़ादी के बाद यह पहली बार होगा जब इस तरह की जानकारी जुटाई जाएगी। इससे पहले आखिरी बार 1931 में जातिगत जनगणना हुई थी।

इस डेटा के जरिए सरकार को समाज के विभिन्न वर्गों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगेगा, जिससे सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

सेल्फ एन्यूमरेशन: खुद भरें अपनी जानकारी

इस बार लोगों को एक नया विकल्प दिया गया है—सेल्फ एन्यूमरेशन यानी स्व-गणना। इसके तहत नागरिक खुद ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने घर और परिवार की जानकारी भर सकते हैं। इसके लिए पोर्टल se.census.gov.in पर जाना होगा।

प्रक्रिया काफी सरल रखी गई है:

  • सबसे पहले पोर्टल पर लॉगिन करना होगा
  • राज्य और भाषा का चयन करना होगा
  • मोबाइल नंबर के जरिए OTP वेरिफिकेशन करना होगा
  • घर की लोकेशन मैप पर सेट करनी होगी
  • 33 सवालों के जवाब भरने होंगे
  • अंत में डेटा सबमिट कर SE ID प्राप्त करनी होगी

यह SE ID बाद में जनगणना कर्मियों को दिखानी होगी, जिससे वे डेटा का सत्यापन कर सकें।

33 सवालों के जरिए जुटेगा डेटा

पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो मुख्य रूप से मकान, परिवार और सुविधाओं से जुड़े होंगे। इनमें घर की बनावट, दीवार और छत की सामग्री, कमरों की संख्या, पानी और बिजली की उपलब्धता, शौचालय, रसोई, इंटरनेट, मोबाइल, टीवी और वाहनों की जानकारी शामिल है।

इसके अलावा परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य) और परिवार के सदस्यों की संख्या भी दर्ज की जाएगी। यह डेटा देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत चित्र प्रस्तुत करेगा।

लिव-इन संबंधों को नई पहचान

इस बार जनगणना में सामाजिक बदलावों को भी ध्यान में रखा गया है। यदि कोई जोड़ा लंबे समय से साथ रह रहा है, तो उसे विवाहित युगल की श्रेणी में गिना जाएगा, भले ही उन्होंने औपचारिक विवाह न किया हो। यह बदलाव समाज में बदलती जीवनशैली को स्वीकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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डिजिटल उपकरणों और वाहनों की अलग गणना

जनगणना में डिजिटल संसाधनों और वाहनों को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। अगर मोबाइल फोन में FM रेडियो की सुविधा है, तो उसे रेडियो माना जाएगा। लेकिन मोबाइल पर वीडियो देखने को टीवी नहीं माना जाएगा—इसके लिए अलग टीवी होना जरूरी है।

वाहनों की श्रेणी में भी अंतर किया गया है। ट्रैक्टर को कार या जीप में शामिल नहीं किया जाएगा, और ई-रिक्शा या ऑटो को भी अलग श्रेणी में रखा जाएगा। इससे डेटा अधिक सटीक और उपयोगी बनेगा।

डेटा सुरक्षा पर खास जोर

जनगणना के दौरान जुटाई जाने वाली जानकारी को बेहद संवेदनशील माना गया है। इसे “क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर” (CII) की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इस डेटा को उच्च स्तर की सुरक्षा दी जाएगी, जैसा कि परमाणु संयंत्रों या सैन्य नेटवर्क को दी जाती है।

डेटा की निगरानी विशेष एजेंसियों द्वारा की जाएगी और इसे पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। यह जानकारी न तो RTI के तहत उपलब्ध होगी और न ही किसी अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल की जा सकेगी।

क्या नहीं पूछ सकते जनगणना कर्मी?

जनगणना के दौरान नागरिकों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कुछ जानकारियां ऐसी हैं, जिन्हें पूछने की अनुमति नहीं है:

  • मासिक आय या बैंक बैलेंस
  • आधार, पैन या अन्य पहचान पत्र
  • बैंक खाता नंबर या OTP
  • यदि कोई व्यक्ति ऐसी जानकारी मांगता है, तो नागरिक उसे देने से मना कर सकते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना?

जनगणना केवल जनसंख्या गिनने का कार्य नहीं है, बल्कि यह देश की योजना निर्माण की नींव होती है। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किस क्षेत्र में कितनी सुविधाएं चाहिए, किस वर्ग को किस प्रकार की सहायता की जरूरत है और विकास की दिशा क्या होनी चाहिए।

डिजिटल तकनीक के साथ यह जनगणना भारत को डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। इससे नीतियां अधिक सटीक, प्रभावी और समावेशी बनेंगी।

जनगणना 2027: पहले चरण में पूछे जाएंगे ये 33 सवाल

  • भवन संख्या (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण का नंबर)
  • जनगणना मकान नंबर
  • मकान में इस्तेमाल सामग्री (मिट्टी, लकड़ी, सीमेंट, पत्थर आदि)
  • दीवार में इस्तेमाल सामग्री (घास, ईंट, पत्थर, कंक्रीट आदि)
  • छत में इस्तेमाल सामग्री (खपरैल, टिन, लोहे की चादर, कंक्रीट आदि)
  • मकान का उपयोग (आवासीय, दुकान या अन्य)
  • मकान की हालत (अच्छी, रहने योग्य या जर्जर)
  • घर का नंबर (परिवार के लिए)
  • परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों की कुल संख्या
  • परिवार के मुखिया का नाम
  • मुखिया का लिंग (पुरुष / महिला / थर्ड जेंडर)
  • क्या मुखिया अनुसूचित जाति (SC) से है?
  • क्या मुखिया अनुसूचित जनजाति (ST) से है?
  • क्या मुखिया किसी विशेष समुदाय से है? (जाति संबंधी जानकारी)
  • मकान का मालिकाना हक (अपना या किराए का)
  • परिवार के पास रहने के लिए कमरों की संख्या
  • परिवार में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या
  • पीने के पानी का मुख्य स्रोत (नल, हैंडपंप, कुआं आदि)
  • क्या पानी का स्रोत परिसर के भीतर है या बाहर?
  • रोशनी का स्रोत (बिजली, केरोसिन, सौर ऊर्जा आदि)
  • शौचालय की उपलब्धता और उसका प्रकार
  • गंदे पानी की निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था
  • स्नान (नहाने) की सुविधा की उपलब्धता
  • रसोई की उपलब्धता और LPG/PNG कनेक्शन
  • खाना पकाने का ईंधन (गैस, लकड़ी, कोयला आदि)
  • रेडियो / ट्रांजिस्टर की उपलब्धता
  • टेलीविजन की उपलब्धता
  • इंटरनेट की सुविधा (ब्रॉडबैंड / मोबाइल डेटा)
  • लैपटॉप / कंप्यूटर की उपलब्धता
  • टेलीफोन / मोबाइल फोन / स्मार्टफोन
  • साइकिल की उपलब्धता
  • स्कूटर / मोटरसाइकिल / मोपेड की उपलब्धता
  • कार / जीप / वैन की उपलब्धता

निष्कर्ष- जनगणना 2027 भारत के इतिहास की सबसे आधुनिक और व्यापक जनगणना बनने जा रही है। डिजिटल प्रक्रिया, जियो-रेफरेंसिंग, सेल्फ एन्यूमरेशन और जातिगत डेटा जैसे बदलाव इसे खास बनाते हैं। साथ ही, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर दिया गया जोर नागरिकों के विश्वास को मजबूत करता है।
यह केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के भविष्य की योजना बनाने का आधार है। ऐसे में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इसमें सही और पूर्ण जानकारी देकर भागीदारी निभाए, ताकि देश का विकास सही दिशा में आगे बढ़ सके।

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