गुरुवार का ज्ञान: गुरु शिक्षा में सीखे राहु से धनवान बनना
गुरु शिक्षा: गुरु प्रसाद में आज गुरु ज्ञान का आज का विषय है राहु से धनवान बनना, फर्श से अर्श पर जाना…
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राहु और केतु की उत्पत्ति

महर्षि परासर ऋषि ने राहु और केतु को छाया माना है ग्रह मंडल में केवल 7 ग्रह होते है, समुद्र मंथन के समय जब वृषभानु नामक चतुर राक्षस भेष बदलकर देव सेना में जा बैठा और छुपकर अमृत का पान कर लिया। उसी समय सूर्य और चंद्रमा की निगाह पड़ी शोर मचाया तब श्री हरि ने अपने चक्र को चलाया उसका सर कलम कर दिया। धड़ तो श्री हरि के चरणों में गिर जो मोक्ष का अधिकारी बना परन्तु सिर दूर गिरा, भगवान शिव की कृपा से सर को राहु और धड़ को केतु नाम दिया गया। छाया के रूप में ग्रह मंडल में देखा जाता हैं।
राहु से धनवान बनना

केतु को ज्ञान, मोक्ष, वैराग्य, इमोशनल भाव संवेदना व्यक्त करना बताया जाता हैं।
राहु को अपने मस्तिष्क से लक्ष्य बनाना जिसको देखता है, या जहां रहता हैं, वहां उसको अपने जाल में फंसा कर काम करना। कुंडली के बारहों भाव में जहां पर रहता है या जहां पर देखता है यदि ग्रह स्थित उसके अनुसार है तो करोड़ पति बना देता है। यदि उसके अनुसार नहीं है तो व्यापार में घाटा, मुकदमा में जेल जाना आदि तमाम समस्या से गुजरना पड़ता है।
राहु का उपाय

वैसे त्रिखंडाय तीसरा छठा ग्यारहवां भाव में राहु शत्रु संहारक योग बनाता हैं। सभी अवरोधक को समाप्त कर मुकदमा आदि में विजय हासिल करेगा, राजनीति में सफलता मिलेगी। राहु धन सम्मान खुशियां सब कुछ देता हैं, इसके लिए जीवित मछली शनिवार शाम को जल में डालकर जीव दान करने से अपार धन संपदा प्राप्त होती हैं। परिवार में खुशियां मिलेगी।
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