भारत में जल्द ही (V2V) लागू, गाड़ियां करेगी आपस में बात
V2V Communication Technology: भारत में आए दिन हो रही सड़क दुर्घटना से कई लोगों की जान चली जाती हैं। ऐसे में अब सड़क दुर्घटना पर रोक लगाने के लिए भारत में जल्द ही व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी लागू होने वाली हैं। इसके जरिए सड़क पर होने वाली दुर्घटना को रोका जा सकेगा क्योंकि दुर्घटना से पहले गाड़ियां आपस में बात करेगी।
🚨 India to mandate vehicle-to-vehicle (V2V) communication in all new cars to prevent collisions using a dedicated 30 MHz spectrum. pic.twitter.com/YkvEv4xgjv
— Indian Tech & Infra (@IndianTechGuide) January 9, 2026
V2V जल्द होगा लागू
आपको बताते चले कि केंद्र सरकार सड़क हादसों को कम करने के लिए भारत में जल्द ही व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी लागू करने वाली हैं, इस टेक्नोलॉजी के जरिए पीछे से तेज रफ्तार में आने वाली गाड़ियों और सड़क किनारे खड़े वाहनों के बीच होने वाले हादसों को रोका जा सकेगा। यानी की (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के जरिए गाड़ियां बिना किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट के आपस में सीधे बात कर सकेंगी और जैसे ही कोई वाहन किसी दूसरे वाहन के बहुत पास आएगा, दुर्घटना से पहले ही ड्राइवर को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
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आपको जानकर खुशी होगी कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि यह सिस्टम 2026 के अंत तक नई गाड़ियों में शुरू होगा और ADAS के साथ काम करेगा। ये पहल सड़क दुर्घटनाओं और जानलेवा हादसों को कम करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

किसको मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
- V2V तकनीक सर्दियों में घने कोहरे और कम दिखाई देने वाले इलाकों में होने वाले बड़े हादसों को रोकने में भी मदद करेगी।
- V2V तकनीक के माध्यम से ड्राइवरों को वास्तविक समय में जरूरी जानकारी मिल सकेगी और सड़क पर सुरक्षा का स्तर काफी बढ़ जाएगा।
- इससे सड़क किनारे पार्क वाहनों से पीछे से टकराने की घटनाएं रोकने में मदद मिलेगी।
- तेज रफ्तार ट्रैफिक में अचानक ब्रेक या दूरी कम होने की स्थिति में हादसे को टालने में मदद मिलेगी।
- यह तकनीक हादसे से पहले ड्राइवर को पहले ही अलर्ट करेगी, जिससे समय रहते ब्रेक लगाया जा सकें।
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रोल आउट कैसे होगा?
बतादें कि सरकार वाहन निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर इस टेक्नोलॉजी के स्टैंडर्ड तय कर रही है। पहले ये नई गाड़ियों में लागू होगा, बाद में पुराने वाहनों में भी इसे रेट्रोफिट करके लगाया जा सकता है। सिस्टम के लिए विशेष रेडियो स्पेक्ट्रम भी अलॉट किया जाएगा, ताकि सिग्नल बिना रुकावट काम करें।
'Vehicle-to-Vehicle Communication System (V2V)' वाहनों के बीच संवाद स्थापित कर ड्राइवर को सतर्क करेगी।#RoadSafety #SadakSurakshaAbhiyaan #सड़कसुरक्षाअभियान pic.twitter.com/ipM79GTctn
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) January 9, 2026
क्या है V2V टेक्नोलॉजी?
व्हीकल-टू-व्हीकल तकनीक के तहत वाहनों में एक खास डिवाइस को लगाया जाएगा। यह डिवाइस दिखने में एक SIM कार्ड जैसा होगा। यह डिवाइस आसपास चल रही या फिर पार्क दूसरी गाड़ियों से लगातार सिग्नल एक्सचेंज करती रहेंगी। इस सिग्नल की वजह से जैसे ही कोई दो वाहन एक-दूसरे के करीब पहुंचेंगे, तो ड्राइवर को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
परिवहन मंत्रालय इस तकनीक को 2026 के अंत तक लाने की तैयारी में है। शुरुआत में यह सिस्टम सिर्फ नई गाड़ियों में लगाया जाएगा और इसके बाद धीरे-धीरे सभी वाहनों में इसे लागू किया जाएगा। सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर के अनुसार इस प्रोजेक्ट में करीब 5,000 करोड़ रुपये का है।

नितिन गडकरी ने क्या कहा
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य सड़क परिवहन मंत्रियों के साथ हुई बैठक में इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा- अक्सर सड़क पर खड़े वाहनों से टकराने और पीछे से तेज रफ्तार में आने वाले वाहनों के कारण गंभीर हादसे होते हैं। इसी तरह, कोहरे के समय कई वाहन एक-दूसरे से टकराकर बड़े एक्सीडेंट का कारण बन जाते हैं। V2V तकनीक ड्राइवर को समय रहते अलर्ट कर ऐसे हादसों को टाल सकती है।

बसों में भी लगेंगे सेफ्टी फीचर्स
इस दौरान उन्होंने बसों की खराब डिजाइन पर भी चिंता जताई। उन्होंने बस बॉडी कोड के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि खराब डिजाइन के कारण अब तक कम से कम 6 बड़े हादसों में 135 लोगों की जान जा चुकी है। अब मौजूदा बसों में भी अतिरिक्त सेफ्टी फीचर्स लगाए जाएंगे। इनमें फायर एक्सटिंग्विशर, ड्राइवर के लिए ड्राउजनेस डिटेक्शन सिस्टम और यात्रियों के लिए इमरजेंसी हैमर जैसे जरूरी सेफ्टी फीचर्स शामिल होंगे।
