ज्योतिष ज्ञान में सीखें ज्योतिष: जानें कुंडली में दशम भाव का फल क्या है
ज्योतिष ज्ञान: राम राम जी जैसा कि आप सभी जानते है कि हम हर हफ्ते के ज्योतिष ज्ञान आप सभी के लिए ज्योतिष से जूड़े विशेष ज्ञान कुछ ना कुछ लाते हैं ठीक हर हफ्ते रविवार की तरह ज्योतिष ज्ञान में वृद्धि के लिए आज ज्योतिष ज्ञान का विषय है कुंडली का दशमं भाव क्या हैं।
ज्योतिष ज्ञान में सीखे कुंडली का दशमं भाव अर्थात कर्म का घर के बारे में.. जैसा कि हमने पिछले सप्ताह में सीखा नवमं भाव का मालिक नवमेश का सभी बारहों भाव का फल क्या होता हैं। वहीं आज का विषय है कर्म का भाव कहा जाता, कर्म करो फल ईश्वर देगा, कर्म क्या करें, क्यों करें, कैसे करें, और उसका फल हमें मिलता रहे।
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यह ज्योतिष के जानकार महर्षियों ने कहा मनुष्य वही कर्म करके सफल होगा जो पूर्व जन्म का संचित कर्म बचा है जिसे संचित कर्म कहते है, प्रारब्ध कहते है जिसकी जानकारी कुंडली का बारहों भाव दर्शाता है आओ सीखे कुंडली का रहस्य क्या हैं।
कुंडली में दशमं भाव
- पहले जाने दशमं भाव क्या है दशमं भाव को कर्म भाव कहते है। यहां का कारक ग्रह गुरु है। गुरु या सूर्य मंगल शनि उच्च का या मित्र का घर हो या स्वगृही हो तो व्यक्ति शासन प्रशासन में नौकरी करता हैं।
- दशमेश अगर केंद्र में हो जिसे लग्न अर्थात प्रथम भाव में तो दो केंद्र का मालिक उच्च पद पर होगा। फिर चाहे राजनीति में मंत्री मिनिस्टर या नौकरों में हो अगर व्यापार में होगा तो वहां भी राजयोग भोगता है।
- दशमेश अगर द्वितीय भाव में हो जिसे धन भाव कहते है यहां भी मित्र का घर या उच्च रश्मि या स्वगृही हो तो धन सम्मान यश कीर्ति वैभव को प्राप्त करता है। अगर नीच राशि का हो या पापा क्रांति गृह है तो स्मगलर अनीति पूर्वक धन कमाता है।
- दशमेश अगर तीसरे भाव में जिसे पराक्रम भाव कहते हैं छोटे भाई का घर कहते तो वहां भाइयों से मिलकर कर्म करता हैं। अच्छा भाव हो अच्छे ग्रहों से देखा जाए तो अच्छा फ़ल मिलता है अगर नीच भाव या शत्रु भाव का हो तो व्यक्ति का आपसी बिखराव होता हैं।
- दशमेश अगर चौथे स्थान में है तो यह घर माता के सुख का होता है, यहां कोई गृह मित्र का या स्वगृही या सौम्य ग्रह है तो मनुष्य मकान वाहन संबंधी सुख प्राप्त करता है।
- दशमेश अगर पंचम भाव में है तो यह घर बुद्धि का विद्या का संतान का होता है। यहां उच्च शिक्षा और संतान के साथ मिलकर काम करता है।
- दशमेश अगर छठे स्थान में है तो यह घर शत्रु का रोग का होता है। यहां ग्रह अच्छा है तो रोग से संबंधित डाक्टर वर्ग रिसर्च करता मेडिकल स्टोर चलाता अगर नीच का या क्रूर ग्रह है तो जातक को रोगी बनाता जो असाध्य होता हैं।
- दशमेश अगर सप्तम भाव में होता है तो यह घर पत्नी का होता है व्यापार का होता है पत्नी के साथ या पत्नी के भाग्य से कर्म करता है।
- दशमेश अगर अष्टम भाव में होता है तो यह घर रोग का मृत्यु का सर्च का होता है, अच्छा ग्रह स्थित है स्वगृही उच्च गृही मित्र गृही तो सर्च करता मेडिकल कॉलेज से दीर्घ जीवी होता हैं।
- दशमेश अगर नवम भाव में होता है तो यह घर धर्म का पिता का होता है। भाग्य शाली होता धर्म के मार्ग पर चलता रहता हैं।
- दशमेश अगर एकादश भाव में होता जो घर आय का होता बड़े भाई का होता उच्च पद से लाभ होगा, रुका हुआ काम बनेगा, परिवार में खुशियां मिलेगी।
- दशमेश अगर द्वादश भाव में है तो यह घर खर्च का होता मोक्ष का होता यात्रा का होता विदेश का होता जन्म स्थान से दूर रहकर कर्म करता है।
