ज्योतिष ज्ञान में सीखें ज्योतिष: जानें कुंडली में बारहवां भाव का फल क्या है
ज्योतिष ज्ञान: राम राम जी जैसा कि आप सभी जानते है कि हम हर हफ्ते के ज्योतिष ज्ञान आप सभी के लिए ज्योतिष से जूड़े विशेष ज्ञान कुछ ना कुछ लाते हैं ठीक हर हफ्ते रविवार की तरह ज्योतिष ज्ञान में वृद्धि के लिए आज ज्योतिष ज्ञान का विषय है कुंडली में बारहवां भाव का फल क्या हैं।
ज्योतिष ज्ञान में वृद्धि के लिए आज ज्योतिष ज्ञान का विषय है कुंडली में बारहवां भाव का फल क्या हैं। पिछले सप्ताह में सिखा एकादश भाव के भावेश का सभी बारहों भाव का फल क्या होता हैं।

कुंडली में बारहवां भाव
बारहवां भाव खर्च का मोक्ष का घर होता हैं विदेश जाना वहां बस जाना या जन्म स्थान से दूर रहकर कर्म करना हैं।
- बारहवें भाव का मालिक अगर उच्च का स्वगृही या मित्र के घर में जाता है तो अच्छा फल देता है। अगर नीच राशि या शत्रु भाव में होता है तो गलत तरीके से धन का खर्चा करता अर्थात राजा से रंक बनता हैं।
- बारहवें भाव का मालिक अगर लग्न में होता है तो अच्छा फल देता, तब मनुष्य मिट्टी को सोना बनाता हर जगह सफल होता धर्म के मार्ग पर चलता रहता है।
- बारहवें भाव का मालिक अगर धन भाव में अच्छा फल देता है, तो धर्म मार्ग से धन कमाता और खर्चा भी करता हैं।
- बारहवें भाव का मालिक अगर तीसरे स्थान में होता भाइयों से सहयोग मिलेगा। जातक के व्यापार में वृद्धि होगी, अगर नीच राशि या शत्रु भाव से जुड़ा हो तो आपसी बिखराव रहेगा, धन का खर्चा होगा।
- बारहवें भाव का मालिक अगर चौथे स्थान में है तो माता को तीर्थ स्थलों में घूमता रहता हैं। माता से सहयोग लेकर जमीन वहां का सुख भोगता हैं।
- बारहवें भाव का मालिक अगर पाँचवें स्थान में होता है तो पिता धर्म गुरु के इशारे पर पुत्र रहता या धन का खर्चा करता हैं।
- बारहवें भाव का मालिक अगर छठे स्थान में होता जो शत्रु भाव है वह शत्रु अपने आप नष्ट हो जाते हैं। हनुमान पूजन दर्शन से लाभ होगा।
- बारहवें भाव का मालिक अगर सप्तम भाव अर्थात पत्नी भाव में होता है तो पत्नी के साथ धन खर्चा करता हैं। दोनों के सहयोग से लाभ होगा।
- बारहवें भाव का मालिक अगर अष्टम भाव में होता है, जो मृत्यु का घर होता मोक्ष की प्राप्ति होती, नीच राशि का फल अधोगति होती, पुन जन्म लेता कर्म फल भोगता हैं।
- बारहवें भाव का मालिक अगर धर्म भाव में होता हैं, जहां पिता धर्म गुरु से मार्गदर्शन लेकर काम बनेगा, समाज का मुखिया बनना।
- बारहवें भाव का मालिक अगर दशम भाव अर्थात कर्म भाव में रहता तो न्याय संगत काम से सफलता मिलती हैं।
- बारहवें भाव का मालिक अगर आय भाव में होता तो पहले खर्चा करता है। फिर व्यापार से धन कमाता दूर यात्रा अर्थात विदेश से धन कमाता हैं।
