गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की गोली मारकर हत्या, मचा हड़कंप
Gaddafi Son Murder: लीबिया के पूर्व तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के बेटे और कभी देश के सबसे शक्तिशाली उत्तराधिकारी माने जाने वाले 53 वर्षीय सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। खबरों से मिली जानकारी की मानें तो उनकी पॉलिटिकल टीम ने ये पुष्टि कर दी है कि 53 साल के सैफ अल-इस्लाम की मौत हो चुकी है। वहीं उनके वकील ने बताया कि जिंटान शहर में उनके घर पर 4 लोगों की कमांडो यूनिट ने उनकी हत्या की है।

हत्या को लेकर आई जानकारी
बताते चले कि उनके राजनीतिक सलाहकार अब्दुल्ला उस्मान अब्दुर्रहीम ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस खबर की पुष्टि की है। ऐसे में इस घटना से लीबिया में वर्षों से चली आ रही उनकी स्थिति को लेकर अनिश्चितता समाप्त हो गई है। हालांकि सैफ अल इस्लाम की हत्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
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वहीं रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना मंगलवार दोपहर पश्चिमी लीबिया के जिंतान शहर में हुई। बताया जा रहा है कि चार नकाबपोश बंदूकधारियों ने सैफ अल-इस्लाम के आवास पर हमला किया। हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने से पहले घर के बाहर लगे सुरक्षा कैमरों को नष्ट कर दिया। इसके बाद हुई “सीधी मुठभेड़” में सैफ अल-इस्लाम की मौत हो गई। लीबियाई अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने बुधवार को पुष्टि की कि फोरेंसिक जांच में मौत का कारण गोलियां लगना पाया गया है।

हमले को लेकर ब्रिगेड ने बयान किया जारी
पहले इस हमले के पीछे ‘444 ब्रिगेड’ का हाथ होने का दावा किया गया था, लेकिन ब्रिगेड ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ब्रिगेड ने स्पष्ट किया है कि जिंतान क्षेत्र में उनकी कोई सैन्य उपस्थिति नहीं है।
कौन है सैफ अल इस्लाम?
सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को लंबे समय तक अपने पिता का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता रहा। 1969 से 2011 तक लीबिया पर शासन करने वाले मुअम्मर गद्दाफी के बाद उन्हें देश का सबसे ताकतवर और प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता था। सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी, साल 2011 में अपने पिता की मौत के बाद से ही विवादों और गुमनामी के बीच जी रहे थे। वह हाल के वर्षों में लीबिया के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि वह किसी आधिकारिक पद पर नहीं थे, लेकिन गद्दाफी समर्थकों के बीच उनकी प्रतीकात्मक अहमियत बरकरार थी। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने भी उन पर मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए वारंट जारी कर रखा था।
1972 में जन्मे सैफ अल-इस्लाम ने साल 2000 से ही लीबिया और पश्चिमी देशों के बीच रिश्ते सुधारने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि साल 2011 में गद्दाफी शासन के खिलाफ हुए विद्रोह के दौरान उन पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने में अहम भूमिका निभाने के आरोप लगे। गद्दाफी की मौत के बाद उन्हें जिंतान शहर की एक प्रतिद्वंद्वी मिलिशिया ने करीब छह साल तक जेल में रखा। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की ओर से भी उन पर मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप लगाए थे और मुकदमा चलाने की मांग की थी।

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हत्याकांड की जांच शुरू
लीबियाई न्यायपालिका ने इस हत्याकांड की उच्च स्तरीय आपराधिक जांच शुरू कर दी है ताकि हमलावरों और इस साजिश के पीछे के मास्टरमाइंड की पहचान की जा सके। इस घटना ने लीबिया के पहले से ही अस्थिर राजनीतिक माहौल में नई हलचल पैदा कर दी है।
गौरतलब है कि लीबिया में कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, और 444 ब्रिगेड, भी इनमें से एक है पर अन्य समूहों की तुलना में इसकी छवि एक ‘कानून प्रवर्तन इकाई’ की है। आम जनता के बीच इसकी लोकप्रियता का कारण अपराधियों के खिलाफ इसकी सख्त कार्रवाई और शहरों के बीच सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
