राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी, क्या है इसकी परंपरा
दिल्ली: कर्तव्य पथ पर सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में सेना की 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) ने राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की पारंपरिक सलामी दी। इसकी एक विशेषता यह रही कि आर्टिलरी बैटरी ने देश में ही बनी 105 मिमी लाइट फील्ड तोपों से फायरिंग कर सलामी दी।
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राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी
गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा है। यह कर्तव्य पथ के लॉन से राष्ट्रीय ध्वज को दिया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। इन तोपों से फायरिंग एक साथ होने वाली तीन गतिविधियों का तालमेल होती है जिसमें प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराना, सेना बैंड द्वारा राष्ट्रगान बजाना और राष्ट्रपति बॉडीगार्ड द्वारा राष्ट्रीय सलामी देना शामिल है। यह सेरेमोनियल बैटरी दिल्ली में तैनात है और इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय महत्व के अलग-अलग अवसरों पर पारंपरिक फायरिंग कर सलामी देना है।
Watch | 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सेरेमोनियल फील्ड बैटरी के बंदूकधारियों ने देशी 105MM लाइट फील्ड गन (LFG) से पारंपरिक 21 तोपों की सलामी प्रस्तुत की। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय ध्वज फहराने के समय किया गया, समारोह में उपस्थित गणमान्य लोगों ने इसे श्रद्धा और गर्व के साथ देखा।
— यूनीवार्ता (@univartaindia1) January 26, 2026
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21 तोपों की सलामी की खासियत
यह बैटरी 1721 फील्ड रेजिमेंट का हिस्सा है जो मुख्यालय 36 आर्टिलरी ब्रिगेड के तहत आती है। सेरेमोनियल बैटरी ने 21 तोपों की सलामी देने के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल किया जो स्वदेशी तोप प्रणाली है। पहले यह फायरिंग ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोप से की जाती थी।
यह तोप प्रणाली आत्मनिर्भर भारत में देश की रक्षा निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करती है। पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था। 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) सेना की एक विशेष इकाई है जो गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में 21 तोपों की पारंपरिक सलामी देती है। सलामी में ध्वनि और धुएं के लिए विशेष सेरेमोनियल कारतूसों का इस्तेमाल किया जाता है जिससे किसी को नुकसान नहीं होता।
