उत्तर प्रदेश

माघ मेला 2026: पौष पूर्णिमा पर संगम में उमड़ा आस्था का महासैलाब

Prayagraj Magh Mela 2026: उत्तर प्रदेश के तीर्थराज प्रयागराज में वार्षिक माघ मेले का भव्य शुभारंभ पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर हो गया है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर आस्था, परंपरा और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। ठंड के मौसम में आयोजित यह पवित्र आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की सनातन परंपराओं और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण भी है।

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44 दिनों तक चलेगा माघ मेला

प्रयागराज संगम की पावन रेती पर 44 दिनों तक चलने वाले माघ मेले की शुरुआत शनिवार, 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ हुई। पहले ही दिन लाखों श्रद्धालु देश के कोने-कोने से संगम तट पर पहुंचे और पुण्य की डुबकी लगाई। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह 7 बजे तक करीब 31 लाख श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया, जबकि सुबह 8 बजे तक यह संख्या बढ़कर लगभग 65 लाख तक पहुंच गई।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास में संगम स्नान और कल्पवास का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दौरान संगम में स्नान करने और संयमित जीवन अपनाने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इसी आस्था के चलते हजारों कल्पवासी अगले 44 दिनों तक संगम तट पर रहकर साधना, ध्यान और भक्ति में लीन रहेंगे।

आस्था की डुबकी, परंपरा की जीवंतता

पौष पूर्णिमा के अवसर पर किन्नर अखाड़ा के सदस्यों सहित साधु-संतों, अखाड़ों और आम श्रद्धालुओं ने संगम में अनुष्ठानिक स्नान किया और विधिवत पूजा-अर्चना की। ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। संगम तट “हर-हर गंगे” और “जय तीर्थराज प्रयाग” के जयघोष से गूंज उठा।

माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, संस्कृति और सामाजिक समरसता का उत्सव है। यहां साधु-संतों के प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाएं होती हैं, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती हैं।

माघ मेला 2026: पौष पूर्णिमा पर संगम में उमड़ा आस्था का महासैलाब

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के व्यापक इंतजाम किए हैं। करीब 8 किलोमीटर लंबा स्नान घाट तैयार किया गया है, जहां डीप वॉटर बैरिकेडिंग की गई है ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। संगम नोज पर एनडीआरएफ, जल पुलिस और पीएसी के जवानों को अलर्ट मोड पर तैनात किया गया है।

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पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी के लिए 300 से अधिक एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा संगम नोज पर एक विशेष वॉच टावर बनाया गया है, जहां से पुलिसकर्मी 24 घंटे पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रख रहे हैं। ड्रोन कैमरों से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारी ग्राउंड जीरो पर

माघ मेले को सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी सुबह से ही ग्राउंड जीरो पर मौजूद हैं। अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं और श्रद्धालुओं से संवाद कर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करा रहे हैं। आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए पांटून पुलों का विशेष प्रबंधन किया गया है।

पांटून पुल नंबर एक और महावीर मार्ग को झूंसी की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए खोला गया है, जबकि दूसरे पांटून पुल को झूंसी से मेला क्षेत्र में आने वालों के लिए आरक्षित किया गया है। इस बार मेला क्षेत्र में कुल 9 पांटून पुलों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था सुचारु बनी हुई है।

माघ मेला 2026: पौष पूर्णिमा पर संगम में उमड़ा आस्था का महासैलाब

प्रमुख स्नान पर्व और अनुमानित भीड़

माघ मेले के दौरान कुल छह प्रमुख स्नान पर्व आयोजित किए जाएंगे। आगामी 14 जनवरी को मकर संक्रांति और 18 जनवरी को मौनी अमावस्या का प्रमुख स्नान होगा। मौनी अमावस्या के दिन 3 से 5 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। पूरे 44 दिनों के मेले के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी की लगातार निगरानी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं लखनऊ से माघ मेले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और मेला पूरी तरह सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बना रहे। सीएम योगी ने माघ मेले के शुभारंभ पर प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं भी दी हैं।

सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि माघ मेला भारतीय आस्था, संस्कृति और आध्यात्म का प्रतीक है और संगम में स्नान करने वाले सभी श्रद्धालुओं, साधु-संतों और कल्पवासियों का प्रयागराज में हार्दिक स्वागत है।

राजनीतिक नेताओं की शुभकामनाएं

माघ मेला 2026 के शुभारंभ पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। सभी नेताओं ने माघ मेले को आस्था और संस्कृति का महासंगम बताते हुए श्रद्धालुओं के सुखद और सुरक्षित प्रवास की कामना की है।

75 वर्षों बाद दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग

इस वर्ष माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन होने से 75 वर्षों बाद एक दुर्लभ और शुभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण इस वर्ष का माघ मेला अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरान किया गया स्नान, दान और तप विशेष पुण्य प्रदान करता है।

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आस्था का महापर्व

प्रयागराज का माघ मेला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय समाज की सामूहिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। संगम तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ यह साबित करती है कि आधुनिकता के इस दौर में भी आस्था और परंपरा की जड़ें कितनी गहरी हैं।

माघ मेला 2026 एक बार फिर यह संदेश दे रहा है कि तीर्थराज प्रयाग केवल एक स्थान नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और संस्कृति का केंद्र है, जहां हर डुबकी के साथ आत्मा को शांति और मन को संतोष मिलता है।

https://www.indiatv.in/religion/news-magh-mela-2026-magh-mele-me-banega-shubh-sanyog-magh-mela-important-date-2025-12-15-1183275

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