RSS में पद का आधार काम है, जाति नहीं: मोहन भागवत
Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ा बयान देते हुए समाज, मातृभाषा, धर्मांतरण, रोजगार, जनसंख्या, ब्राह्मण, घुसपैठ और राष्ट्रीय एकता पर अपने विचार रखे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा- संघ का सरसंघचालक किसी जाति का नहीं होगा, ब्राह्मण, क्षत्रिय या अन्य जाति का होना जरूरी नहीं है। केवल एक शर्त है, जो बने वह हिंदू होना चाहिए।
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जानें कौन बन सकता है सरसंघचालक
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बतादें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने बयान में कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की, उन्होंने साफ कहा कि संघ में कोई पद जाति, वर्ग या क्षेत्र के आधार पर नहीं मिलता, बल्कि जो व्यक्ति काम करता है और योग्य होता है, वही जिम्मेदारी संभालता है। इसके लिए संघ का सरसंघचालक एससी, एसटी, ब्राह्मण या किसी खास वर्ग से ही हो, ऐसा कोई नियम नहीं है। जो हिंदू होगा, जो काम करेगा और जो सबसे उपयुक्त होगा, वही सरसंघचालक बनेगा। उन्होंने कहा कि वह खुद खाली थे, इसलिए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई। जाति या वर्ग संघ में कोई मानक नहीं है।
उन्होंने बताया कि उनके 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं और उन्होंने खुद निवृत्त होने की इच्छा जताई थी, लेकिन संघ के कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक काम करने की क्षमता है, तब तक सेवा जारी रखनी चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि वह पद से निवृत्त हो सकते हैं, लेकिन कार्य से नहीं…अंतिम खून की बूंद तक काम करना संघ की परंपरा है।
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बांग्लादेश हिंसा पर हिंदू हो जाए एक
वहीं बांग्लादेश में हो रही हिंसा और वहां के हिंदुओं की स्थिति को लेकर RSS प्रमुख ने बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा- 1.25 करोड़ हिंदू अगर अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए डटकर खड़े होने का फैसला करते हैं, तो उन्हें पूरी दुनिया के हिंदूओं का साथ मिलेगा। भागवत का यह बयान न केवल वहां के अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का भरोसा देता है, बल्कि भारत की अखंडता और अवैध घुसपैठ जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार के कड़े रुख का समर्थन भी करता है। अगर वे वहां रुकने और अपनी रक्षा के लिए लड़ने का फैसला करते हैं, तो दुनिया भर के सभी हिंदू उनकी मदद करेंगे।
आपको बताते चले कि पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं के खिलाफ हिंसक भीड़ के हमलों में भारी वृद्धि देखी गई है। यह तनाव तब और बढ़ गया जब 5 अगस्त 2024 को छात्र नेतृत्व वाले ‘जुलाई विद्रोह’ के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा। हाल के महीनों में भारत विरोधी कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसा और भड़की। हिंसक भीड़ ने देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू नागरिकों, व्यापारियों और छात्रों को निशाना बनाया है, जिसमें कई लोगों की जान गई है।
अंग्रेजी से हमारा बैर नहीं है। जहां अंग्रेजी के बिना काम नहीं चलता वहां हम अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं। पर हमारा प्रयास रहता है कि अपनी मातृभाषा या फिर हिन्दी भाषा का ही प्रयोग करें।- डा. मोहन भागवत जी #NewHorizons
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संघ प्रचार से नहीं, मुस्लिम समाज
सरसंघचालक ने कहा कि संघ का काम प्रचार करना नहीं, बल्कि संस्कार देना है। उनके अनुसार, व्यक्ति का प्रचार करने से प्रसिद्धि आती है और प्रसिद्धि से अहंकार पैदा होता है, जो नुकसानदायक है। इसलिए संघ व्यक्ति नहीं, काम का प्रचार करता है। इसी कारण संघ प्रचार के मामले में अक्सर पीछे रह जाता है। इसके साथ ही मुस्लिम समाज के साथ संघ के संबंधों पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा – जैसे दांतों के बीच जीभ आ जाए तो हम दांत नहीं तोड़ते, वैसे ही मुस्लिम समाज भी हमारे समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक मुस्लिम समाज के बीच जाकर सेवा कार्य करते हैं और उन्हें अलग नहीं माना जाता।
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संघ के नेता होटलों नहीं घरों में रुकते हैं
RSS की फंडिंग और सादगी संघ के फंड्स को लेकर उठने वाली जिज्ञासाओं पर विराम लगाते हुए भागवत ने कहा कि RSS किसी कॉर्पोरेट या संस्थागत पैसे पर निर्भर नहीं है। हम अपने स्वयंसेवकों से धन जुटाते हैं, यात्रा के दौरान हम खाना खरीदने के बजाय अपना टिफिन साथ रखते हैं और होटलों के बजाय कार्यकर्ताओं के घरों में रुकते हैं।
सोशल मीडिया और समाज की जिम्मेदारी
संघ का सरसंघचालक कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता, कोई क्षत्रिय नहीं बन सकता, कोई अन्य जाति का नहीं बन सकता, हां जो कोई भी बनेगा वह हिन्दू ही होगा। – डा. मोहन भागवत जी #NewHorizons pic.twitter.com/KA5kSuEY34
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उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह मन, वचन और कर्म से सतर्क रहे। जाति और कर्म को जबरन जोड़ना केवल राजनीति के लिए किया जाता है। अगर कोई विचार अब प्रासंगिक नहीं है, तो उसे शांति से छोड़ देना चाहिए, ताकि समाज को नुकसान न हो।
संघ में अंग्रेजी नहीं चलेगी
मोहन भागवत ने मातृभाषा को लेकर स्पष्ट कहा – अंग्रेजी सीखनी चाहिए, इतनी अच्छी कि अंग्रेज भी आपकी भाषा सुनने के लिए टिकट लें, लेकिन अपनी मातृभाषा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ में अंग्रेजी नहीं चलाई जाएगी, वहां केवल मातृभाषा का ही उपयोग होगा।
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घुसपैठ, SIR और रोजगार का मुद्दा
उन्होंने कहा कि घुसपैठ को रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। डिटेक्शन होना चाहिए और फिर डिपोर्टेशन… SIR और जनसंख्या गिनती जैसी प्रक्रियाएं आएंगी, जिन्हें रोका नहीं जा सकता, बल्कि समझदारी से अपनाना होगा। रोजगार देश के नागरिकों को मिलना चाहिए, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, लेकिन विदेशी घुसपैठियों को नहीं…क्योंकि अब भारत को कोई तोड़ नहीं सकता।
घरेलू मुद्दों पर चर्चा करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने देश के बदलते जनसंख्या पैटर्न पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उन्होंने इसके पीछे जन्म दर और अवैध घुसपैठ को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा- अब भारत को तोड़ा नहीं जा सकता। जो भारत को तोड़ने की कोशिश करेंगे, वे खुद टूट जाएंगे, उन्होंने लोगों से ‘अवैध घुसपैठियों’ को पहचानने और पुलिस को रिपोर्ट करने की भी अपील की।
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जनसंख्या, परिवार और सामाजिक संतुलन
जनसंख्या के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर परिवार में तीन भाई-बहन होते हैं तो लोग बचपन से ही एक-दूसरे के साथ रहना और संतुलन बनाना सीख लेते हैं। उन्होंने कहा कि संतान की संख्या से ज्यादा जरूरी उनकी परवरिश है और इसके लिए समाज के पास कई उपाय मौजूद हैं।
रोजगार, उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर विचार
मोहन भागवत ने कहा – देश में रोजगार बढ़ाने के लिए मानवीय तकनीक को बढ़ावा देना होगा। ऐसी अर्थव्यवस्था बनानी होगी, जहां खाली हाथों को काम मिले। साथ ही गुणवत्ता वाला उत्पादन बढ़े, ताकि भारतीय उत्पाद विदेशों तक पहुंच सकें।

धर्मांतरण, आरक्षण, जाति, राजनीति, वोट…
धर्मांतरण पर मोहन भागवत ने कहा कि भगवान चुनना व्यक्ति का निजी अधिकार है, लेकिन जोर-जबरदस्ती या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना गलत है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में घर वापसी एक समाधान है और जो लोग वापस आना चाहते हैं, उन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए।
आरक्षण पर उन्होंने कहा कि संविधान सम्मत सभी आरक्षणों का संघ समर्थन करता है। जातिगत भेदभाव खत्म होना चाहिए। जो वर्ग अभी भी पीछे है, उसे ऊपर लाना समाज का दायित्व है। ऊपर बैठे लोगों को झुकना होगा और नीचे वालों को हाथ पकड़कर आगे बढ़ाना होगा. केवल सद्भावना से ही समाज आगे बढ़ सकता है।
मोहन भागवत ने कहा कि राजनेता जातिवादी नहीं, बल्कि वोटवादी होते हैं। समाज को समझदारी से चलना होगा ताकि वोट इधर-उधर भटक कर सामाजिक ताने-बाने को नुकसान न पहुंचाएं।
