SIR के दौरान BLO की मौत पर कांग्रेस ने BJP पर उठाए सवाल
- SIR के बहाने लोगों वोट काटे जा रहे – आराधना मिश्रा मोना, नेता विधानमंडल दल, कांग्रेस
- चौधरी चरण सिंह ने जीवन पर्यंत किसानों के हितों के लिए समर्पित रहे – आराधना मिश्रा मोना
- आधी अधूरी तैयारी और शीघ्रता से SIR कराने का BLO पर अत्यधिक दबाव बना BLO की मौत की वजह – आराधना मिश्रा मोना, नेता विधानमंडल दल, कांग्रेस
विधानसभा : कांग्रेस विधानमंडल दल नेता आराधना मिश्रा मोना ने SIR प्रक्रिया के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में BLO की हुई दुखद मौत पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, और SIR प्रक्रिया को आधी अधूरी तैयारी और बिना प्रशिक्षण, बिना इंतजाम के बहुत कम समय में कराने का आरोप लगाया, जिसकी वजह से BLO के ऊपर अत्यधिक मानसिक दबाव होना, और जिसकी वजह से हुई BLO की मौत की जिसकी जिम्मेदार भाजपा योगी आदित्यनाथ सरकार है।
आज विधानसभा सत्र के तृतीय दिवस पर, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी के जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें नमन करने का सौभाग्य मुझे अपनी पार्टी की ओर से प्राप्त हुआ।
— Aradhana Misra-Mona (@aradhanam7000) December 23, 2025
चौधरी चरण सिंह जी अन्नदाता किसान की सच्ची आवाज थे और उन्होंने अपना पूरा सार्वजनिक जीवन किसान, खेतिहर मजदूर… pic.twitter.com/ovUekB9RYu
SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
आराधना मिश्रा ने SIR प्रक्रिया को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जब पहले से SIR होना तय था तो फिर प्रक्रिया में लगे BLO को पहले ट्रेनिंग क्यों नहीं दी गई ? क्या एक शिक्षक से यह अपेक्षा उचित है कि वह बच्चों को पढ़ाए भी और पूरा प्रशासनिक सिस्टम भी संभाले, जिन स्कूलों में शिक्षक BLO ड्यूटी पर हैं , वहां बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है ? और तो और भाजपा सरकार की चेतना तभी जागृत होती है जब किसी कर्मचारी की मौत हो जाती है, यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब विपक्ष किसी विषय पर सरकार को सुझाव देता है तो सरकार उस सुझाव को सकारात्मक लेने के बजाय विपक्ष की नियत पर ही सवाल खड़ा कर देती है।
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आराधना मिश्रा मोना ने कहा- हम SIR के विरोध में नहीं हैं, मतदाता सूची का शुद्धिकरण होना चाहिए यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है , लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप SIR के नाम पर अमानवीय तरीके से उस प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों को परेशान करें और जो इस देश के मतदाता हैं वोट जिनका मूल अधिकार है, उनको वोटर लिस्ट में नाम के लिए पूरी प्रक्रिया को इतना कठिन बना दें कि वह बार-बार फॉर्म भरने लाइन में लगे और अपना पूरा समय निकाल दें, क्या चुनाव आयोग या सरकार ने सोचा कि इस प्रदेश का गरीब मजदूर, किसान, दिहाड़ी और श्रमिक जो रोज काम करते और कमाते हैं अब वह बार-बार फॉर्म भरने लाइन लगने में जा सकते हैं ऐसा संभव नहीं है, इस प्रक्रिया से महिलाएं बुजुर्ग और दिव्यांग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

वोट काटने की पूरी तैयारी चल रही- आराधना
आराधना मिश्रा मोना ने कहा- बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो मतदाता 2003 की वोटर लिस्ट में है और 2025 में भी है, जीवित है पात्र है उसे किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं लेकिन चुनाव आयोग द्वारा अधिकारी, स्टाफ, कलेक्टर स्तर पर अधिकांश मतदाताओं को सीधे कैटेगरी सी में डाला जा रहा है मतलब संदेहात्मक करके उन मतदाताओं का वोट काटने की पूरी तैयारी चल रही है, यह सीधे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है।
SIR ड्यूटी के चलते स्कूल हुए खाली
आराधना मिश्रा मोना ने कहा- स्कूल खाली पड़े हैं क्योंकि सभी शिक्षकों को SIR ड्यूटी पर लगा दिया है, SIR की प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन उसको लेकर कोई स्पष्ट कार्य योजना नहीं बनी, ना ही समुचित प्रशिक्षण दिया गया, ना ही समय सीमा का आवश्यक आकलन किया गया, न ही कोई जमीनी सुविधा दी गई और उसका परिणाम है कि BLO अत्यधिक दबाव में है, दर्जन भर से ज्यादा BLO की जान इस प्रक्रिया की वजह से जा चुकी है।

BLO की बचाई जा सकती थी जान
आखिर सरकार ने बाद में चुनाव आयोग ने समय बढ़ाया अगर पहले से ही समय बड़ा के रखा गया होता तो हो सकता है इन BLO की जान बचाई जा सकती थी, बिजनौर में शोभा रानी, देवरिया में लेखपाल आशीष, फतेहपुर में 27 वर्षी लेखपाल सुधीर कुमार कुरील, गोंडा में विपिन यादव, बरेली इंटर कॉलेज के प्रवक्ता अजय अग्रवाल, बांदा में SIR में लगे शिक्षा मित्र, लखनऊ में विजय कुमार वर्मा, देवरिया की रंजू दुबे, इन सभी की मौत SIR प्रक्रिया ड्यूटी के दौरान ही हुई, यहां तक की बुलंदशहर में प्राथमिक शिक्षक विद्यालय ने शिक्षिका रजनी ने व्हाट्सएप पर संदेश लिखा और आत्महत्या कर ली, मेरठ में BLO ने आत्महत्या की कोशिश की।
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आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि तो तमाम ऐसी दुखद घटनाएं यह दर्शाती है कि सिस्टम का फेल होने का प्रमाण है। आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि हमारी सरकारों में भी SIR हुआ लेकिन इस तरीके से वोट बनाने वाले और वोटर को परेशान नहीं किया गया, SIR हो लेकिन तैयारी के साथ हो, ट्रेनिंग के साथ हो, बिना डर के हो ।
किसानों के सच्चे मसीहा और 'भारत रत्न' चौधरी चरण सिंह जी को सादर नमन |
— UP Congress (@INCUttarPradesh) December 23, 2025
श्रीमती @aradhanam7000 जी ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्ब प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को याद किया, जब उन्होंने भूमि सुधार कानून लागू कर किसानों को समानता और उनके अधिकारों का हक दिलाया।… pic.twitter.com/G6t9JPmbIa
कांग्रेस सदैव किसान के हित में काम करी
आराधना मिश्रा मोना ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर नमन कर कांग्रेस पार्टी की तरफ से उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए और सदन में चर्चा के दौरान सदन चौधरी चरण सिंह जी के ऊपर प्रकाश डाला और चौधरी साहब द्वारा किसानों के लिए किए गए कार्य, जमींदारी उन्मूलन के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए देशवासियों की तरफ से कृतज्ञता जाहिर की।
आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सदैव किसानों के हित में काम करती रही है हमने UPA 1 और UPA 2 सरकार में किसानों के लिए तमाम योजनाएं बनाई, कम ब्याज पर किसान क्रेडिट कार्ड दिए, 72000 करोड़ रुपए कर्ज माफ किया, भूमि अधिग्रहण बिल लेकर आए, चौधरी चरण सिंह जी भी किसानों के प्रति समर्पित थे , वर्तमान भाजपा सरकार चौधरी चरण सिंह जी की जयंती पर किसानों के प्रति ईमानदारी से किए गए कार्यों से सीख लेनी चाहिए, सिर्फ उद्योगपतियों का विकास करके इस देश का भला नहीं हो सकता, किसान इस देश की रीढ़ हैं, अन्नदाता आज की भाजपा योगी आदित्यनाथ सरकार में सबसे ज्यादा प्रताड़ित है।
वंदे मातरम कोई नारा नहीं, आज़ादी की चेतना है।
— Aradhana Misra-Mona (@aradhanam7000) December 24, 2025
यह गीत बंकिम चंद्र जी की लेखनी और टैगोर जी की आवाज़ से जन-आंदोलन बना। कांग्रेस वर्किंग कमेटी और संविधान सभा में सर्वसम्मति से राष्ट्रगीत का दर्जा मिला।
सवाल यह नहीं कि वंदे मातरम कौन गाता है, सवाल है उसे समझता कौन है। देशभक्ति थोपी… pic.twitter.com/5NONRIT7jb
वंदे मातरम आजादी की चेतना है- कांग्रेस
वंदे मातरम कोई नारा नहीं, आज़ादी की चेतना है। यह गीत बंकिम चंद्र जी की लेखनी और टैगोर जी की आवाज़ से जन-आंदोलन बना। कांग्रेस वर्किंग कमेटी और संविधान सभा में सर्वसम्मति से राष्ट्रगीत का दर्जा मिला। सवाल यह नहीं कि वंदे मातरम कौन गाता है, सवाल है उसे समझता कौन है। देशभक्ति थोपी नहीं जाती—वह दिल से उपजती है, जैसा अटल जी ने कहा। वंदे मातरम को राजनीति नहीं, राष्ट्रीय एकता का सूत्र बनाना चाहिए। विधानसभा शीतकालीन सत्र के द्वितीय दिवस पर वंदे मातरम से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे को सदन में रखा!
