हर हफ्ते रविवार की तरह आज ज्योतिष ज्ञान में वृद्धि का विषय है “विचारो से भाग्य का निर्माण” यानि की मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता खुद है।
Read Moreरावण संहिता में लिखा गया है काल पुरुष के विविध अंगों में मेष से लेकर मीन राशियों तक बारह राशियों की स्थापना किया गया है
Read Moreमैं तथा मेरा शरीर का विचारो का खेल में सुख-दुख होता है, मैं ईश्वर का अंश जीव अविनाशी हूं ये शरीर पांच तत्वों से बना है, ग्रह नक्षत्र ब्रह्मांड से बना है, ब्रह्मांड तत्वों से बना है।
Read Moreजैसा कि आप सभी जानते है कि मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता खुद होता है, मनुष्य चाहता तो सब कुछ है लेकिन करता क्या है
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