ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर ट्रंप का 25% टैरिफ ऐलान
वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों पर 25% शुल्क लगाने की घोषणा की। राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह घोषणा ऐसे समय में की जब ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शन जारी हैं।

ट्रंप का आदेश देना होगा 25% शुल्क
बताते चले कि ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रुथ पर एक पोस्ट में दोहराया कि यह फैसला “तत्काल प्रभाव से” लागू होगा और इस बात पर जोर दिया कि यह “आदेश अंतिम और निर्णायक है।” उन्होंने कहा- “कोई भी देश जो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार कर रहा है उस देश पर यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अमेरिका के साथ किए जाने वाले किसी भी और सभी व्यापार पर 25% शुल्क देना होगा। यह आदेश अंतिम और निर्णायक है।”
ईरान के ट्रेड पार्टनर्स पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% टैरिफ का भारत पर बहुत कम असर होने की संभावना है। भारत के लिए, ईरान टॉप 50 ग्लोबल ट्रेडिंग पार्टनर्स में भी शामिल नहीं है। पिछले साल, ईरान के साथ भारत का कुल व्यापार $1.6 बिलियन था, जो भारत के कुल व्यापार का लगभग 0.15% है।… pic.twitter.com/PfP2c72QE0
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 13, 2026
ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए अमेरिका मजबूर
ट्रंप लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि यदि देशव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रहे तो अमेरिका को ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इस बीच उन्होंने यह भी खुलासा किया कि तेहरान ने बातचीत के लिए अमेरिका से संपर्क किया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान बातचीत चाहता है, तो डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- “हां, वे चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने कल बातचीत के लिए फोन किया। ईरान के नेताओं ने फोन किया। वे बातचीत करना चाहते हैं। मुझे लगता है कि वे अमेरिका से थक चुके हैं। ईरान बातचीत चाहता है।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हालांकि एक बैठक की व्यवस्था की जा रही है लेकिन ज़मीनी हालात अमेरिका को बातचीत से पहले ही कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इस बीच, रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने 25% शुल्क लगाने के ट्रंप के फैसले की सराहना की और इसे ईरान के नेतृत्व को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की दिशा में “बेहद प्रभावशाली” कदम बताया।
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ईरानी शासन अपने ही लोगों को मार रहे
ग्राहम ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- “ट्रंप, आज आपके कदमों के जरिए इस शासन को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में आपका निर्णायक नेतृत्व बेहद प्रभावशाली है। प्रदर्शनकारियों के समर्थन और इस शासन को यह स्पष्ट संदेश देने का आपका वादा कि आप हत्याओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे, ने इस कट्टर शासन की स्थापना के बाद से सबसे बड़े जन-आंदोलन को जन्म दिया है। मेरा मानना है कि ईरानी शासन सभी सीमाएं पार करते हुए बड़ी संख्या में अपने ही लोगों को मार रहे हैं और आपके नेतृत्व का धत्ता दिया जा रहा है। अब निर्णायक सैन्य कार्रवाई का समय है।”
ईरान में 17 वे दिन भी विद्रोह जारी है,अब तक 6000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों मस्जिदें आग के हवाले कर दिए गए हैं।आपके नजर में इस हिंसा के लिए कौन से कारण जिम्मेदार है –
— A.k Tiwari advo (@highcourtadvo) January 13, 2026
1- कठोर इस्लामी नियम
2- अमेरिकी षड्यंत्र
3- खामनेई का गलत निर्णय
pic.twitter.com/lknkCHfaNH
भारत पर पड़ सकता है असर
राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले का भारत पर भी बड़ा असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत ईरान के साथ निर्यात और आयात दोनों के माध्यम से महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध बनाए हुए है। भारत पहले से ही अमेरिका को अपने निर्यात पर 50% शुल्क का सामना कर रहा है, जिसमें से 25% शुल्क को अमेरिका भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से जोड़ता है। अमेरिका का कहना है कि इससे रूस के यूक्रेन युद्ध को वित्तीय मदद मिलती है।
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गौरतलब है कि भारत और ईरान प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं और हाल के वर्षों में भारत, ईरान के पांच सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल रहा है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता न्यूज़ एजेंसी के अनुसार अमेरिका की ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% आयात शुल्क लगाने की यह घोषणा ऐसे समय में की गयी है जब ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 646 हो गई है।
