उन्नाव दुष्कर्म मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत पर लगाई रोक
दिल्ली: उन्नाव दुष्कर्म कांड को लेकर कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा, उनकी जमानत के आदेश पर रोक लगायी गई हैं। बतादें कि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उन्नाव दुष्कर्म मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर रोक लगा दी थी और उन्हें जमानत दे दी थी।

यह आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए जारी किया गया था। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने की।
Read More: शीतलहर में यूपी सरकार अलर्ट, सीएम योगी ने स्कूल बंद किए
न्यायालय ने दिया चार सप्ताह का समय
बताते चले कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आदेश जारी करते हुए कहा- इस मामले में कानून के कई महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़े हुए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि आमतौर पर जमानत पर रिहा हुए व्यक्ति को सुने बिना उसके आदेश पर रोक नहीं लगाई जाती लेकिन इस मामले के तथ्य ‘असाधारण’ हैं। न्यायालय ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
#WATCH | Delhi: Mehmood Pracha, Advocate for Unnao rape case survivor, says," … The CBI is still not cooperating. They lived up to our expectations that they would hide things from us… They withheld the copy till about last night… This has been a strategy not only in this… pic.twitter.com/B6e2qxHemk
— ANI (@ANI) December 29, 2025
इस मामले में सीबीआई ने एक विशेष अनुमति याचिका दायर 26 दिसंबर, 2025 को दायर की थी। इसमें 23 दिसंबर के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने सेंगर की अपील लंबित रहने के दौरान उनके आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगा दी थी। सेंगर को दिसंबर 2019 में एक विशेष सीबीआई अदालत ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के लिए दोषी ठहराया था और 25 लाख रुपये के जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
Read More: कोहरे और प्रदूषण की दोहरी मार, दिल्ली में AQI-400 पार
10 साल की सजा काट रहा दोषी सेंगर
सेंगर ने जनवरी 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर की थी और बाद में मार्च 2022 में अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग करते हुए एक आवेदन प्रस्तुत किया था। उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर को अपने आदेश में सेंगर की सजा पर रोक लगा दी थी और उनकी अपील के निपटारे तक कुछ शर्तों के अधीन उन्हें जमानत दे दी। हालांकि सेंगर अभी भी जेल में बंद है क्योंकि वह पीड़िता के पिता की गैर-इरादतन हत्या से संबंधित एक अलग सीबीआई मामले में 10 साल की सजा काट रहा है।

कुलदीप सेंगर को फांसी की सजा मिले: पीड़िता
पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर पर खुशी जताई है। पीड़िता ने कहा- ‘मैं कोर्ट के फैसले से बहुत खुश हूं। सुप्रीम कोर्ट से मुझे न्याय मिला और पूरा भरोसा है कि आगे भी मिलता रहेगा। मैं इस लड़ाई को लगातार लड़ती रहूंगी और यह सुनिश्चित करूंगी कि उसे फांसी की सजा मिले तभी हमारे परिवार को सच्चा न्याय मिलेगा। मैं उन सभी की आभारी हूं जो मेरे साथ खड़े रहे और मुझे न्याय दिलाने में मदद की, मेरे पिता की आत्मा को तभी शांति मिलेगी, जब कुलदीप सिंह सेंगर को फांसी होगी।’
