यूपी में तैयार हो रही महिला ई-रिक्शा पायलटों की फौज, सफर रहेगा सुरक्षित
- महिला सुरक्षा में यूपी बन रहा मॉडल स्टेट, ‘सेफ मोबिलिटी’ से बदल रही गांवों की तस्वीर
- अयोध्या समेत 5 जिलों में हुई शुरुआत, लखनऊ और प्रयागराज समेत 8 जिलों में भी जल्द मिलेगी सुविधा
- बालिकाओं-महिलाओं का विद्यालय या कार्यस्थल तक का सफर रहेगा बेहद सुरक्षित
- समूह की महिलाओं को शुरुआत में 1000 ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जाएंगे, इसके बाद पूरे प्रदेश में होगा विस्तार

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’ के तहत प्रदेश में महिला ई-रिक्शा पायलटों की फौज तैयार की जा रही है, जिससे बालिकाओं और महिलाओं को विद्यालय, कार्यस्थल और अन्य जरूरी स्थानों तक सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक परिवहन मिल सकेगा।
Read More: यूपी सीएम ने किया 81 हजार पदों पर पुलिस भर्ती का ऐलान
अयोध्या समेत 5 जिलों में हुई शुरुआत
इस योजना के तहत शुरुआत में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 1000 ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, कौशांबी और झांसी में इस सुविधा की शुरुआत कर दी गई है, जबकि लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, देवरिया, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में इसे जल्द शुरू किया जाएगा।

योगी सरकार की यह पहल इसलिए भी खास है, क्योंकि इसका सीधा रिश्ता महिला सुरक्षा से जुड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं के लिए अब महिला चालकों द्वारा संचालित ई-रिक्शा सेवा बेहतर समाधान बनकर उभर रही है।
क्या है ‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’?
- यह कार्यक्रम सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम के तहत शुरू किया गया है।
- इसका उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित, सुलभ और भरोसेमंद परिवहन उपलब्ध कराना है।
- इसमें महिलाएं खुद ई-रिक्शा चलाकर पायलट (ड्राइवर) बन रही हैं।
योजना से जुड़ी महिलाएं 3 लाख रुपये से अधिक कमा रहीं
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के तकनीकी सहयोग से चल रहे इस कार्यक्रम ने अब तक प्रभावी परिणाम दिए हैं। पांच जनपदों में 119 महिलाओं को ई-रिक्शा देकर उद्यमी बनाया जा चुका है। वहीं, 629 महिलाओं को संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है और 244 महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध कराया गया है। इस पहल से जुड़ी महिलाएं अब सिर्फ वाहन ही नहीं चला रहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक धुरी भी बन रहीं हैं। योजना से जुड़ी महिलाओं की औसत वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक पहुंचने की बात इस मॉडल की सफलता को और मजबूत बनाती है।
Read More:जरूरतमंद को आवास और बीमार के इलाज की होगी व्यवस्था- CM योगी
गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
‘सेफ मोबिलिटी’ का असर केवल सड़क तक सीमित नहीं है। इससे बेटियों की स्कूल तक पहुंच आसान होगी, कामकाजी महिलाओं का सफर सुरक्षित बनेगा, गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनेंगी।

गांवों के सामाजिक-आर्थिक बदलाव की तैयारी
महिला सुरक्षा, सम्मानजनक परिवहन और स्वरोजगार इन तीनों मोर्चों पर एक साथ असर डालने वाली यह पहल उत्तर प्रदेश को नई पहचान दे रही है। यही वजह है कि महिला सुरक्षा में यूपी अब मॉडल स्टेट के रूप में अपनी अलग छाप छोड़ता दिख रहा है और ई-रिक्शा महिला पायलटों की यह नई फौज गांवों के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलने की तैयारी में है।
