पश्चिम एशिया संकट के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरेंगे भारत के LPG टैंकर
दिल्ली : पश्चिम एशिया संकट के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाजों को जल्द ही ईरान की ओर से सुरक्षित निकलने का रास्ता मिलने के संकेत मिले हैं। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने शुक्रवार को संवाददाताओं के इस सवाल पर कि क्या ईरान भारतीय जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने का रास्ता देगा, उन्होंने कहा कि इस बारे में जल्द ही अच्छी खबर मिलेगी। उन्होंने कहा- “हां, क्योंकि भारत हमारा मित्र देश है। आपको दो तीन घंटे में ही पता चल जायेगा। हमारा मानना है कि ईरान और भारत के इस क्षेत्र में समान हित हैं।

LPG के दो टैंकर की इजाजत
एलपीजी गैस की किल्लत को लेकर भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक ईरान ने भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर दो एलपीजी टैंकर ले जाने की इजाजत दे दी है। यह ऐसे समय में हुआ है जब शुक्रवार (13 मार्च 2026) को ही ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहाली ने संकेत दिया कि भारत को इस समय दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही के लिए सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा।
पीएम को सताई भारतीय नागरिकों की चिंता
Had a conversation with Iranian President, Dr. Masoud Pezeshkian, to discuss the serious situation in the region.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2026
Expressed deep concern over the escalation of tensions and the loss of civilian lives as well as damage to civilian infrastructure.
The safety and security of…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार रात को ईरान के राष्ट्रपति के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति और चिंताओं के बारे में बात की थी। प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान ईरान सहित इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के संबंध में भारत की प्राथमिकता पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने ऊर्जा और सामान के निर्बाध आवागमन के महत्व पर भी ज़ोर दिया। विदेश मंत्री डां एस जयशंकर ने भी अपने ईरानी समकक्ष के साथ विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की थी।
ईरानी राजदूत ने दोहराया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर अपनी रक्षा के लिए तैयार है। फतहाली ने यहां कहा- “हम कई बार घोषणा कर चुके हैं कि हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो हम उसके लिए तैयार हैं। हमने अमेरिका के साथ वार्ता फिर से शुरू की थी, लेकिन उन वार्ताओं को बातचीत को मेज पर ही बाधित कर दिया गया और नष्ट कर दिया गया। अब हम सभी सरकारों से कहते हैं कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन ईरान इसके लिए तैयार है।”
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फतहाली ने की नागरिकों पर हुए हमलों की निंदा
फतहाली ने ईरान और समूचे क्षेत्र की स्थिति पर भी बात की और हाल के सप्ताहों में हुई हिंसा का उल्लेख किया, जिसमें स्कूलों पर हमले और प्रमुख राजनीतिक, सैन्य तथा रक्षा हस्तियों की मौतें शामिल हैं। उन्होंने इन घटनाओं को “बेहद जटिल और अत्यंत चिंताजनक” बताया और गाजा में नागरिकों पर हुए हमलों की निंदा की।
उन्होंने कहा, “ये मासूम बच्चे छात्र थे, जो बेहतर भविष्य बनाने की उम्मीद में पढ़ने आए थे, लेकिन वे कब्जा करने वाले ज़ायोनी शासन और अमेरिका की हिंसा और क्रूरता का शिकार हो गये।” राजदूत ने कूटनीति के प्रति ईरान की प्राथमिकता पर जोर देते हुए कहा कि देश किसी भी सैन्य खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तेहरान के दृष्टिकोण को समझने की अपील की।

फतहाली ने भारत का किया धन्यवाद
अंतरराष्ट्रीय कुद्स दिवस सम्मेलन में फतहाली ने कहा- ” मैं भारत के लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं कि उन्होंने हमारे नेता की शहादत पर जिस तरह संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की। मैं आप सभी का गहराई से आभारी हूं। आपसे मिले ऐसे संदेश और भावनाएं भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मौजूद ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को दर्शाती हैं , यहां के लोगों की भावनाओं से इस गहरे रिश्ते का वास्तविक आकलन किया जा सकता है।”
