महिला आरक्षण और परिसीमन पर सोनिया गांधी का सरकार पर हमला
दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक निजी अखबार में लिखे अपने लेख के जरिए केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर हमला बोला है।
''डिलिमिटेशन जनगणना के बाद ही होना चाहिए, जैसा अब तक होता आया है। यह भी जरूरी है कि कोई भी डिलिमिटेशन, जिससे लोकसभा की सीटें बढ़ती हों, उसे गणितीय ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी निष्पक्ष होना चाहिए।''
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– महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन के मुद्दे पर 'The Hindu' में CPP चेयरपर्सन… pic.twitter.com/rFPRUq0RWH
सोनिया गांधी ने साधा सरकार पर निशाना
Modi Govt Turns Down Dialogue, Pushes Its Own Narrative pic.twitter.com/ls5X8mDGsJ
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सोनिया गांधी ने सोमवार को यहां स्पष्ट तौर पर कहा – मौजूदा समय में असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन है, जिसे उन्होंने “बेहद खतरनाक” और “संविधान पर हमला” करार दिया। अपने लेख में उन्होंने चेतावनी दी कि संसद के विशेष सत्र में जिस तरह परिसीमन का मुद्दा सामने आ रहा है, वह लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में इस विषय को आगे बढ़ा रही है, जिसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा हो सकती है।
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Any delimitation involving an increase in the strength of the Lok Sabha must be politically – and not just arithmetically – equitable. pic.twitter.com/qqcTRcovjX
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पीएम मोदी से सोनिया का सवाल
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा- विपक्ष से समर्थन तो मांगा जा रहा है लेकिन इस अहम मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सर्वदलीय बैठक की मांग को लगातार नजरअंदाज किया गया है।
सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है।
Delimitation, Not Women’s Reservation, Is the Real Issue pic.twitter.com/z9iO9ixzys
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उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार 2029 से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला केवल गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहे राज्यों को नुकसान न हो।
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जातिगत जनगणना पर सरकार की आलोचना
इसके अलावा उन्होंने जातिगत जनगणना में देरी पर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में सर्वे कर यह साबित कर दिया है कि यह कार्य संभव है। अंत में उन्होंने 2021 की जनगणना टालने के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गये।
PM’s Real Intent: Delay and Derail the Caste Census pic.twitter.com/Vt26mFbzzw
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उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों पर जल्दबाजी के बजाय विपक्ष के साथ व्यापक चर्चा की जाय और पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाया जाया। गौरतलब है कि महिला आरक्षण पर 16-18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।
