SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, कहा- निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी
दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग की ओर से किये गये मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता को बरकरार रखते हुए बुधवार को कहा कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए जरूरी है।
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SIR की वैधता बरकरार
शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा उसके तहत बनाए गये नियमों के अनुसार आयोग को SIR कराने का अधिकार प्राप्त है।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया, जिनमें निर्वाचन आयोग द्वारा पिछले वर्ष जून में बिहार में SIR कराने संबंधी जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी।
#WATCH दिल्ली: भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ".. आज सर्वोच्च न्यायालय ने SIR की प्रक्रिया को पूर्णतः संविधान सम्मत सिद्ध कर दिया है। ये कांग्रेस की पूर्ण पराजय है जो नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक तीनों आयामों पर कांग्रेस और विपक्ष ध्वस्त हो गया है…बिहार और बंगाल में… pic.twitter.com/5Y23a0ZaV3
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 27, 2026
कानून चुनाव आयोग को देता SIR अधिकार
न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा सुनाए गये फैसले में कहा गया कि जब कानून स्वयं चुनाव आयोग को किसी भी समय विशेष पुनरीक्षण कराने का अधिकार देता है, तो केवल इस आधार पर इस प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि यह नियमित पुनरीक्षण की सामान्य प्रक्रिया के प्रत्येक पहलू का पूरी तरह पालन नहीं करती।
#WATCH | दिल्ली: भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में शुरू हुए वोटर रोल की SIR करने के ECI के फैसले को सही ठहराने पर कहा, "सत्यमेव जयते…आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो SIR की गई है जो कर रहे हैं वो संवैधानिक भी है वो लीगल भी है जो SIR किया गया उसमें कानून का… pic.twitter.com/UN6um5ClMs
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 27, 2026
उच्चतम न्यायालय ने कहा- “हमारी सुविचारित राय में यह विवादित SIR ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ और उसके नियमों की जगह नहीं लेता है, बल्कि, यह धारा 21(3) द्वारा निर्धारित सटीक कानूनी सीमाओं के भीतर अनुच्छेद 324 के तहत दिए गए संवैधानिक आदेश में नयी जान डालता है। इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता कि आयोग ने अपनी कानूनी शक्तियों से बढ़कर कोई कार्य किया है।”
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शीर्ष अदालत ने SIR के लिए कहा
शीर्ष अदालत ने कहा कि SIR स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक आवश्यकता को आगे बढ़ाता है। न्यायालय के अनुसार, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं। वे मूल रूप से मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता पर आधारित होते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव है।
#WATCH | Delhi: Petitioner and Advocate Ashwini Upadhyay says, "Today, the Supreme Court has delivered its verdict regarding the SIR. The Supreme Court has affirmed that the entire process of the SIR is valid. It has been stated that conducting the SIR falls within the purview of… https://t.co/1B94nBxFRv pic.twitter.com/0e2VqoaWSQ
— ANI (@ANI) May 27, 2026
पीठ ने कहा कि विस्तृत विचार के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूची तैयार करने अथवा संशोधित करने की प्रक्रिया में नागरिकता से जुड़े प्रश्नों की जांच करने का अधिकार है।
आयोग ले सकता है निर्णय
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी जांच केवल मतदाता सूची में नाम शामिल करने अथवा हटाने तक सीमित उद्देश्य से ही की जा सकती है और यह प्रक्रिया उस मतदाता के पक्ष में लागू पूर्वधारणा का सम्मान करते हुए की जानी चाहिए, जिसका नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज है। न्यायालय ने कहा कि आयोग केवल चुनावी प्रयोजनों के लिए उपलब्ध सामग्री का आकलन कर निर्णय ले सकता है।
