छात्रों की महारैली में राहुल ने सरकार को घेरा
कोटा: लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को राजस्थान के कोटा में आयोजित ‘छात्रों की गूंज महारैली’ में देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के मुद्दों पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया।
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राहुल का शिक्षा व्यवस्था पर हमला
भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 17, 2026
ज़रा सोचिए – देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं – इस व्यवस्था ने हमारे… pic.twitter.com/06qcSul7ed
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था छात्रों के सपनों को पूरा करने के बजाय उन पर आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था बन गई है।

करीब एक घंटे तक चले संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि यह कार्यक्रम पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसका उद्देश्य केवल छात्रों की समस्याओं, चुनौतियों और आशंकाओं पर चर्चा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था रोजगारोन्मुख नहीं है और युवाओं को उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने में विफल रही है।
नीट परीक्षा को लेकर राहुल का दावा
पता है, भारत की सिर्फ़ 5 परीक्षाओं – NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल कितना ख़र्च करते हैं?
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 17, 2026
₹3.5 लाख करोड़।
यानी भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट का लगभग तीन गुना। शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास – इन पाँच मंत्रालयों के कुल… pic.twitter.com/ZPlj65eKNk
राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में केवल 1.2 प्रतिशत युवाओं को ही वेतनभोगी नौकरी मिल पाती है। उन्होंने कहा कि 22 लाख छात्र नीट परीक्षा में शामिल होते हैं और उनके परिवार इस परीक्षा की तैयारी पर लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो उनके अनुसार केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के वार्षिक बजट के बराबर है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नीट, जेई, यूपीएससी, एसएससी और आरआरबी जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर छात्रों और उनके परिवारों का कुल खर्च करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों के संयुक्त बजट के बराबर है।
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राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर निजी शिक्षा और कोचिंग व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि महंगे निजी स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में भारी खर्च के बावजूद युवाओं को रोजगार की कोई गारंटी नहीं मिलती। उन्होंने दावा किया कि देश में 100 इंजीनियरों में से 80 बेरोजगार हैं।
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— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 17, 2026
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की अपील
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने नीट अभ्यर्थी आकांक्षा की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि यह किसी छात्र की नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने कहा, “भारत का शिक्षा तंत्र सलेक्शन नहीं, बल्कि रिजेक्शन की प्रणाली बन गया है।”
कोटा के लिए निकल चुका हूँ पर दिल में दो नाम गूंज रहे हैं: उमेश और रिया।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 17, 2026
कल, सीकर में उमेश और देहरादून में रिया – दोनों ने Re-NEET के दबाव में अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर ली।
22 और 23 साल के बच्चे – जिन्हें सपनों के खुले आसमान में उड़ना था वो इस अन्यायी व्यवस्था से हार गए।
ये मौतें…
उन्होंने छात्रों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने और बदलाव की प्रक्रिया में भागीदारी की अपील की। राहुल गांधी ने कहा कि देश का भविष्य उसके युवाओं पर निर्भर है और ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें छात्र कम आर्थिक बोझ के साथ अपने सपनों को साकार कर सकें। कार्यक्रम के दौरान मौजूद छात्रों ने राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाए, हालांकि उन्होंने नारेबाजी से बचते हुए संवाद पर जोर देने की अपील की।
