
मोदी कैबिनेट का फैसला, फास्ट ट्रैक कोर्ट को 5 साल की मंजूरी!
दिल्ली: सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को पांच साल के लिए आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
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दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की जल्द सुनवाई
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केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बुधवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल 3788.04 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 2353.15 करोड़ रुपये और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की हिस्सेदारी 1434.89 करोड़ रुपये होगी। केंद्र का हिस्सा निर्भया फंड से दिया जाएगा।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने विशेष पॉक्सो अदालतों सहित त्वरित सुनवाई वाले विशेष अदालतों की केन्द्र प्रायोजित योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रहेगी।इसका उद्देश्य न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाना, लैंगिक अपराधों से जुड़े लंबित मामलों की संख्या कम करना और विशेष रूप से महिलाओं तथा बच्चों को समय पर न्याय दिलाना है।– एआई वीडियो#CabinetDecisions #FastTrackCourts
— सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (@MIB_Hindi) November 4, 2026
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत देशभर में विशेष अदालतों की संख्या मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 की जायेगी। इनमें दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई करने वाली फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के लिए विशेष रूप से गठित अदालतें शामिल होंगी।

नये जिलों में अदालतों का विस्तार वहां लंबित दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की संख्या के आधार पर किया जाएगा। योजना का उद्देश्य ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी लाना, लंबित मुकदमों का बोझ कम करना और पीड़ित महिलाओं एवं बच्चों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बाल यौन उत्पीड़न और बलात्कार के मामलों से निपटने के लिए 850 फास्ट-ट्रैक अदालतों को और अधिक मजबूत और विस्तारित करने का निर्णय अत्यंत सराहनीय है।महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा न्याय सुनिश्चित करने के लिए यह ऐतिहासिक प्रतिबद्धता त्वरित न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है।देश में कानून के राज को और अधिक सुदृढ़ करने वाले इस संवेदनशील निर्णय के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार।#CabinetDecisions #FastTrackCourts #pocso #WomenSafety
— Saurabh Singh (@saurabhsinghcg) November 4, 2026
फास्ट ट्रैक अदालतों की योजना 5 साल बढ़ी
उन्होंने कहा कि प्रत्येक फास्ट ट्रैक विशेष अदालत में एक न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था होगी। विशेष लोक अभियोजक को संबंधित अदालत में मामलों की प्रभावी और त्वरित पैरवी के लिए नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार योजना में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अदालतों के संचालन से संबंधित खर्चों के लिए निर्धारित वित्तीय पैटर्न के तहत सहायता उपलब्ध करायेगी। इससे अदालतों के प्रशासनिक कामकाज को सुचारु बनाने और पुराने मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है।
महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSCs) और विशेष POCSO न्यायालयों की योजना को 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए ₹3,788.04 करोड़ आवंटित किए गए हैं।अब तक 4 लाख से अधिक मामलों का निपटारा कर चुकी ये अदालतें पीड़ितों को और तेजी से न्याय दिलाने में सहायक होंगी।https://t.co/ROHoFQA1Xv
— Nitin Nabin (@NitinNabin) November 4, 2026
यह योजना दो अक्टूबर 2019 को शुरू की गयी थी। इसकी शुरुआत आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के प्रावधानों और 25 जुलाई 2019 को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गयी थी। उच्चतम न्यायालय ने उन जिलों में पॉक्सो अधिनियम के तहत विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया था, जहां ऐसे 100 से अधिक मामले लंबित थे। शुरुआत में यह योजना एक वर्ष के लिए लागू की गई थी, लेकिन बाद में इसे 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया। अब इसे अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दी गयी है।
