लोकसभा में ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव खारिज, शाह ने विपक्ष पर हमला
दिल्ली: लोकसभा ने अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाया गया विपक्ष का संकल्प लंबी चर्चा के बाद बुधवार को ध्वनि मत से खारिज कर दिया। बताते चले कि कांग्रेस के डॉ. मोहम्मद जावेद समेत कुछ अन्य ने ओम बिरला पर सदन में पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए बजट सत्र के पहले चरण के दौरान उन्हें पद से हटाने का संकल्प दिया था।
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राहुल गांधी की झूठ से भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सदन में बहस की अनुमति न देकर ओम बिरला जी ने दशकों पुरानी संसदीय परंपरा का पालन किया है। pic.twitter.com/P7chmQzKCS
— Amit Shah (@AmitShah) March 11, 2026
जो सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन नौ मार्च की कार्यसूची में शामिल था लेकिन उस दिन इसे पेश नहीं किया गया। मंगलवार को पेश किए जाने के साथ इस पर दो दिन चर्चा हुई और सदन ने आज संकल्प को ध्वनि मत से खारिज कर दिया। संकल्प पर चर्चा में 42 से अधिक सदस्यों ने हिस्सा लिया।
गृहमंत्री ने विपक्ष के आरोप को किया खारिज
बताते चले कि चर्चा के दौरान भी विपक्षी सदस्यों ने अध्यक्ष पर विपक्ष के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करने के आरोप लगाये। गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी सदस्यों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ओम बिरला सदन का संचालन सबके साथ समान भाव से करते हैं और उनकी नैतिकता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
उनका कहना था कि इतिहास में तीन संकल्प अध्यक्ष को हटाने के लिए लोकसभा में आये हैं लेकिन संकल्प के निपटान तक सदन में नहीं आने की नैतिकता का परिचय सिर्फ ओम बिरला ने ही दिया है। पहले अध्यक्ष प्रस्ताव आने के बाद भी सदन की कार्यवाही का संचालन करते रहे हैं लेकिन ओम बिरला ने संकल्प दिये जाने के साथ ही नैतिक आधार पर यह घोषणा कर दी थी कि वह इस पर चर्चा होने तक सदन का संचालन नहीं करेंगे।
ओम बिरला पर विपक्ष ने लगाया भेदभाव का आरोप
ओम बिरला के खिलाफ लाये गये संकल्प में आरोप लगाया गया था कि वह सदन में विपक्ष के नेता तथा अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं देते हैं और उन्होंने विपक्ष की महिला सांसदों पर निराधार आरोप लगाये हैं। उन्होंने लोक हित के मुद्दे उठाने पर विपक्ष के सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया तथा वह पूर्व प्रधानमंत्रियों के विरुद्ध आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां करने से सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को रोकते नहीं हैं।
संसद में बोलने के नियम होते हैं, यह कोई मेला नहीं है, जहाँ कैसे भी बोल लो। pic.twitter.com/XKczdBdQX4
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इस तरह वह अपने पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण से सभा के सदस्यों के अधिकारों की अवहेलना करते हैं और ऐसी घोषणाएं करते हैं और ऐसे निर्णय लेते हैं जो अधिकारों को प्रभावित और कमजोर करते हैं। इसमें यह आरोप भी लगाया गया था कि वह सभी विवादास्पद मामलों में सत्तारूढ़ दल के दृष्टिकोण का खुलकर समर्थन करते हैं। उनकी ये बातें सभा के संचालन तथा सदन में लोगों की चिंताओं और शिकायतों को व्यक्त करने के लिये एक गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं इसलिए उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
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ओम बिरला की निष्ठा पर सवाल निंदनीय है – अमित शाह
संकल्प पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही में सत्तारूढ दल के सदस्यों के साथ नरमी बरतने और पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया लेकिन अमित शाह ने इन सब आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा – ओम बिरला अत्यंत शिष्टाचार, सबके साथ समान व्यवहार, नियमों का पालन करते हुए पारदर्शी तरीके तथा निष्ठापूर्वक सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं। उनका कहना था कि ओम बिरला की निष्ठा पर सवाल निंदनीय है और अध्यक्ष के खिलाफ इस तरह से प्रस्ताव लाना सदन की गरिमा तथा प्रतिष्ठा के खिलाफ है।
जब सदन में 157 घंटे कांग्रेस ने बोला, तब राहुल गांधी को बोलने से किसने रोका था… pic.twitter.com/TpQ6Z3w0Kl
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अमित शाह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि वह सदन में नहीं आते हैं और कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेते हैं और विदेश में जाकर देश की बुराई करते हैं। इसी बीच विपक्षी दलों के सदस्यों ने श्री शाह पर असंसदीय शब्द के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए सदन में भारी हंगामा शुरु कर दिया और अब तक हल्की टोकाटाकी के बीच श्री शाह का भाषण सुन रहे विपक्षी सदस्य सदन के बीचोंबीच आ गये। वे नारेबाजी करते हुए श्री शाह से माफी मांगने की मांग करने लगे।
अमित शाह ने जमकर किया विपक्ष पर हमला
धारा 370 हटाने से लेकर वंदे मातरम् पर चर्चा तक, संसद की महत्त्वपूर्ण चर्चाओं से नदारद रहे राहुल गांधी। pic.twitter.com/HGePd3Uw0p
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पीठासीन अधिकारी जगदम्बिका पाल ने सदस्यों को आश्वासन दिया कि यदि कोई असंसदीय शब्द अमित शाह के भाषण में प्रयोग हुआ होगा तो उसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा। उन्होंने सभी सदस्यों से अपने स्थान पर जाने का आग्रह किया लेकिन सदस्य नहीं माने तो अमित शाह ने अपना भाषण आगे बढ़ाते हुए विपक्ष पर फिर हमला शुरु कर दिया।
अमित शाह का भाषण समाप्त होने के बाद पीठासीन अधिकारी ने डॉ जावेद को संकल्प पर बोलने के लिए कहा लेकिन विपक्षी सदस्य हंगामा करते रहे। पीठासीन अधिकारी ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपनी सीटों पर जाकर डॉ जावेद को बोलने दें लेकिन हंगामा बढ़ता गया तो श्री जगदम्बिका पाल ने सदन से संकल्प पर राय जानने के लिए पेश कर दिया। सदन ने संकल्प को ध्वनि मत से खारिज कर दिया।
