पीएम मोदी ने पेश किये विकसित भारत 2047 के नौ संकल्प
बेंगलुरु: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ‘विकसित भारत के लिए नौ संकल्प’ लेने का अनुरोध किया और कहा – यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित भारत 2047 बनाने की यात्रा में तेजी ला सकते हैं।
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विकसित भारत 2047 के नौ संकल्प
बताते चले कि प्रधानमंत्री ने मांड्या जिले के आदिचुंचनगिरी मठ में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा – यह पहल क्षेत्रीय सीमाओं से परे है और सामूहिक भागीदारी एवं जीवनशैली में बदलाव के लिए राष्ट्रव्यापी आह्वान का प्रतिनिधित्व करती है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों की व्यक्तिगत आदतें और दैनिक विकल्प देश के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा- “यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित कर्नाटक और विकसित भारत की ओर प्रगति को तेज कर सकते हैं।”
मैं अपने नौ आग्रह आपके सामने रखता हूं…
— BJP (@BJP4India) April 15, 2026
पहला आग्रह: पानी बचाने और पानी के बेहतर प्रबंध का संकल्प लें।
दूसरा आग्रह: एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत अपनी मां के सम्मान में पेड़ जरूर लगाएं और धरती माता की रक्षा का संकल्प लें।
तीसरा आग्रह: धार्मिक स्थल हो, सार्वजनिक स्थान हो,… pic.twitter.com/62QVVglkAw
विकास को केवल सरकार संचालित प्रयास के बजाय जन-आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि परिवर्तन की शुरुआत रोजमर्रा के व्यवहार के स्तर से होनी चाहिए।
उन्होंने नदी प्रणालियों पर निर्भर क्षेत्रों में जल संरक्षण को प्रमुख प्राथमिकता बताया, और नागरिकों से सामूहिक प्रतिज्ञा लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा- “आइए हम सब जल संरक्षण और इसके बेहतर प्रबंधन का संकल्प लें।” पर्यावरण स्थिरता पर प्रधानमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आइए हम अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाएं और धरती मां की रक्षा करें।”
I would like to propose nine areas where we can unite in collective resolve. I present to you my nine requests:
— BJP (@BJP4India) April 15, 2026
1. Pledge to conserve water and manage it responsibly.
2. Plant a tree in honour of your mother as part of the "Ek Ped Maa Ke Naam" campaign, and commit to protecting… pic.twitter.com/lhcEgsPMTW
स्वच्छता को नागरिक कर्तव्य बताते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थलों, गांवों और शहरों में साफ-सफाई बनाये रखना साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “चाहे वह धार्मिक स्थल हो, सार्वजनिक स्थान हो, गांव हो या शहर, स्वच्छता बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
आर्थिक आत्मनिर्भरता के संबंध में, प्रधानमंत्री ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और भारतीय उद्योगों को समर्थन देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ दृष्टिकोण को आर्थिक सशक्तीकरण के आधार बताते हुए कहा, “आइए हम भारतीय उत्पादों को अपनाएं और अपने उद्योगों को मजबूत करें।”
उन्होंने राष्ट्रीय जागरूकता और सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देते हुए नागरिकों से देश भर में यात्रा करने और इसकी विविधता को जानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “आइए हम पूरे भारत की यात्रा करें और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें।” उन्होंने आगे कहा कि लोगों के बीच बेहतर जुड़ाव राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को गति देगा।
प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य और पोषण पर मोटे अनाज को अपने आहार में शामिल करने पर जोर देते इस बात पर चिंता व्यक्त की कि बढ़ता मोटापा बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गयी है। इसके साथ ही नागरिकों से तेल की खपत में 10 फीसदी की कमी का आग्रह किया। कृषि को लेकर उन्होंने किसानों से कहा, “आइए हम रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।”
उन्होंने शारीरिक फिटनेस पर और जोर देते हुए कहा, “योग, खेल और फिटनेस हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।” उन्होने स्वास्थ्य देखभाल को राष्ट्रीय प्राथमिकता में स्थापित किये जाने की बात कही। इस मौके पर उन्होंने जनसेवा की मजबूत भावना का आह्वान करते हुए कहा, “जरूरतमंदों की सेवा समाज को मजबूत करती है और जीवन को बड़ा उद्देश्य देती है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये नौ संकल्प एक व्यापक जन-भागीदारी वाले शासन मॉडल का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां नागरिक स्तर पर व्यवहारिक परिवर्तन सामूहिक रूप से राष्ट्रीय परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामूहिक प्रतिबद्धता “विकसित कर्नाटक और विकसित भारत” के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
इससे पहले दिन में, उन्होंने मांड्या जिले के ऐतिहासिक आदिचुंचनगिरी मठ परिसर में ‘श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर’ का उद्घाटन किया, जो दिवंगत संत श्री बालगांगाधरनाथ स्वामीजी को समर्पित एक नया आध्यात्मिक स्थल है। आदिचुंचनगिरी की धुंध भरी पहाड़ियों के बीच स्थित यह ‘गद्दीगे’ स्मारक उस विरासत के प्रति श्रद्धांजलि है, जो दशकों से मठ की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है।

शैव मत की सदियों पुरानी नाथ परंपरा के तहत निर्मित इस मंदिर को उस गुरु-शिष्य परंपरा के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है जो इस संस्थान की आध्यात्मिक शृंखला को परिभाषित करती है। जैसे ही पहाड़ी परिसर में मंत्रोच्चार गूंजे, बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां एकत्र हुए, जिससे यह उद्घाटन भक्ति, विरासत और जन-भागीदारी के संगम में बदल गया।
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2037646®=3&lang=2
