ज्योतिष ज्ञान में सीखें ज्योतिष: कुंडली के बारहों भाव
ज्योतिष ज्ञान: राम राम जी जैसा कि आप सभी जानते है कि प्रत्येक गुरुवार और रविवार को ज्योतिष के क्लास में गुरु का प्रसाद मानकर हम लोग सीखते हैं। ठीक हर हफ्ते रविवार की तरह ज्योतिष ज्ञान में सीखे आज का विषय कुंडली के बारहों भाव…
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कुंडली के बारहों भाव

दीप ज्ञान ज्योतिष में सीखे आज का विषय कुंडली के बारहों भाव… जैसा कि प्रत्येक गुरुवार और रविवार को हम सब ज्योतिष सीखते आए हैं महर्षि परासर ऋषि ने बताया कि कुंडली में बारह भाव होते हैं वह विभिन्न विषयों पर प्रभाव डालते हैं।
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- जैसे केंद्र में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, दशम, भाव को केंद्र कहते हैं।
- द्वितीय, पंचम, अष्टम एवं एकादश भाव को पड़फर कहते हैं।
- तृतीय, छठा, नवम एवं द्वादश भाव को अपोलिकम कहते हैं।
- छठा, अष्टम, द्वादश भाव को त्रिक कहते हैं।
- तृतीय, छठा एवं एकादश भाव को त्रिक डाय कहते हैं।
- इसी बारहों भाव का विवेचन ही कुंडली का फलादेश होता हैं।
NOTE:- शेष अगले हफ्ते मिलेगा। ज्योतिष विषय सनातन धर्म से जुड़ा हुआ है गुरु के कृपा से मिलता है। यह जानकारी गुरु कृपा से मिलती है जिन लोगों को ज्योतिष में रुचि हो वह संपर्क करें धर्म परायण होकर साधना करें, आत्म चिंतन स्वाध्याय से प्रगति होगी। मिलने के लिए नोएडा, कानपुर, लखनऊ में अतिरिक्त जानकारी के लिए 9415126330, 6386254344 पर संपर्क करें। आप का साथी ज्योतिषाचार्य राम नजर मिश्र रत्न रुद्राक्ष विशेषज्ञ…
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यह ज्ञान बहुत ही खूब सूरत है इसमें जितना घुसा जाए उतना मजा आता है जीवन का जीव का आत्म का ब्रह्मांड का प्रकृति का ज्ञान भरा पड़ा है। हमारा प्रयास है समाज में जो विद्या लुप्त होती जा रही है, उसको भ्रमित किया जा रहा है अल्प ज्ञानी उसका दुरुपयोग कर रहे है। उन तक ज्ञान का विस्तार पहुंचे, ज्योतिष संबंधी जानकारी जो हर हफ्ते दिया जाता है उसे सीखना चाहते है तो राम नजर मिश्र ज्योतिषाचार्य रत्न रुद्राक्ष विशेषज्ञ से संपर्क करें, बाकी ज्योतिष से जुड़ी विशेष जानकारी के लिए भी संपर्क करें।
