ज्योतिष-धर्म

ज्योतिष ज्ञान में सीखें ज्योतिष: जानें कुंडली में एकादशेश भाव का फल क्या है

ज्योतिष ज्ञान: राम राम जी जैसा कि आप सभी जानते है कि हम हर हफ्ते के ज्योतिष ज्ञान आप सभी के लिए ज्योतिष से जूड़े विशेष ज्ञान कुछ ना कुछ लाते हैं ठीक हर हफ्ते रविवार की तरह ज्योतिष ज्ञान में वृद्धि के लिए आज ज्योतिष ज्ञान का विषय है एकादश भाव का फल क्या हैं।

ज्योतिष ज्ञान में वृद्धि में पिछले सप्ताह में सिखा दशम भाव के ग्रह का बारहों भाव में फल क्या होता हैं। वहीं आज का विषय है एकादश भाव आय का घर बड़े भाई का पराक्रम का घर होता है। इस भाव में बैठा हुआ ग्रह को जानें.. वह क्या करेगा, उसका पावर क्या है, उसपर दृष्टि किसकी है, वह उच्च का या नीच का या स्वगृही है, कितने अंश का है, उसी के आधार पर उसका फलादेश करना है।

जाने एकादशेश का भाव में फल

  • एकादशेश अगर लग्न में होता है तो बड़े भाई के द्वारा या खुद पुरुषार्थ से धन कमाता है। वह अगर सूर्य है पावर में है तो उच्च पद पर आसीन होकर नेतृत्व करता हुआ राज करता है, राजा के समान जीवन जीता है।
  • एकादशेश अगर द्वितीय भाव में होता है तो धन का लाभ काम के अलावा और रास्ते से धन कमाता हैं।
  • एकादशेश अगर तृतीय भाव में होता है तो छोटे भाई बहन को काम में लगता परिवार का विकास करता है।
  • एकादशेश अगर चतुर्थ भाव में होता है तो माता या महिला अधिकारी से सहयोग पाता भूमि वाहन संबंधी सुख प्राप्त करता है।
  • एकादशेश अगर पंचम भाव में होता है तो पुत्र पिता धर्म मार्ग से लाभ लेता हैं।
  • एकादशेश अगर छठे स्थान में है तो संघर्ष के साथ सफलता मिलेगी, अगर नीच राशि या कमजोर है तो रोग शत्रु से घिरा हुआ होता हैं।
  • एकादशेश अगर सप्तम भाव में होता है तो वह पत्नी का व्यापार का घर होता है, वह पत्नी का सहयोग लेकर व्यापार करता हैं।
  • एकादशेश अगर अष्टम भाव में होता है तो अगर अच्छा है तो रिसर्च करता मेडिकल कॉलेज में डाक्टर बनकर ज्योतिषी भी बनता हैं, रिसर्च करता हैं, अच्छा आय से लाभ लेता हैं।
  • एकादशेश अगर नवम भाव में होता है तो वह मठ मंदिर से धन का उपार्जन करता अर्थात धर्म से धन कमाता हैं।
  • एकादशेश अगर दशम भाव में होता है तो कर्मठी होता कर्म पर विश्वास करता पुरुषार्थ से सड़क से सिंहासन पर जाता है।
  • एकादशेश अगर द्वादश भाव में होता है जहां खर्चा का घर होता हमेशा खर्चा करता अगर अच्छा ग्रह होता हैं तो अच्छे की दृष्ट होती तो धर्म मार्ग से खर्चा करना यात्रा करना विदेश घूमने जाना शौकीन प्रवृत्ति का होता है। अगर नीच भाव भाव से जुड़ा होता है तो कर्जा से पीड़ित रहता गलत मार्ग से धन खर्चा करता हैं।

NOTE:-

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