ज्योतिष ज्ञान में सीखें ज्योतिष: ग्रहों का देवासुर संग्राम
ज्योतिष ज्ञान: राम राम जी जैसा कि आप सभी जानते है कि प्रत्येक गुरुवार और रविवार को ज्योतिष के क्लास में गुरु का प्रसाद मानकर हम लोग सीखते हैं। ठीक हर हफ्ते रविवार की तरह ज्योतिष ज्ञान में सीखे आज का विषय केंद्र के ग्रह आपस में एक दूसरे के विरोधी होते हैं।

ग्रहों का देवासुर संग्राम
ज्योतिष ज्ञान में सीखे आज का विषय केंद्र के ग्रह आपस में एक दूसरे के विरोधी होते हैं, जैसा कि प्रत्येक गुरुवार और रविवार को हम सब ज्योतिष सीखते आए हैं महर्षि परासर ऋषि ने बताया कि केंद्र 1, 4, 7, 10 प्रथम-चतुर्थ-सप्तम-दशम भाव एक दूसरे से भिन्न होते यही देवासुर संग्राम है।
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- काल पुरुष की कुंडली को देखे प्रथम भाव का स्वामी मंगल, चतुर्थ भाव का स्वामी चंद्रमा देव ग्रह हैं।
- सप्तम भाव का स्वामी शुक्र और दशम भाव का स्वामी शनि ग्रह यह असुर ग्रह है।
- यह एक दूसरे को आपस में शत्रु भाव से देखते हैं।

गूढ़ रहस्य : इनके पावर को अपने अनुकूल करना यही ज्योतिष की कला है, जो ज्योतिषी को सीखना चाहिए। यह गूढ़ रहस्य गुरु कृपा से मिलती हैं।
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यह ज्ञान बहुत ही खूब सूरत है इसमें जितना घुसा जाए उतना मजा आता है जीवन का जीव का आत्म का ब्रह्मांड का प्रकृति का ज्ञान भरा पड़ा है। हमारा प्रयास है समाज में जो विद्या लुप्त होती जा रही है, उसको भ्रमित किया जा रहा है अल्प ज्ञानी उसका दुरुपयोग कर रहे है। उन तक ज्ञान का विस्तार पहुंचे, ज्योतिष संबंधी जानकारी जो हर हफ्ते दिया जाता है उसे सीखना चाहते है तो राम नजर मिश्र ज्योतिषाचार्य रत्न रुद्राक्ष विशेषज्ञ से संपर्क करें, बाकी ज्योतिष से जुड़ी विशेष जानकारी के लिए भी संपर्क करें।
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