LVM3 मिशन को मिला नया इंजन, इसरो का क्रायोजेनिक इंजन सफल
चेन्नई: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने लॉन्च व्हीकल मार्क-3 एलवीएम3 (LVM3) प्रक्षेपण यान के अगले अभियान के लिए क्रायोजेनिक इंजन का अंतिम उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

क्रायोजेनिक इंजन का अंतिम उड़ान
इसरो ने बताया कि एलवीएम3 (LVM3) प्रक्षेपण यान का सबसे ऊपरी हिस्सा (CE20) सीई20 क्रायोजेनिक इंजन से संचालित होता है। यह इंजन प्रक्षेपण यान को 19 से 22 टन तक की ताकत से आगे बढ़ाने में सक्षम है। इसी इंजन की मदद से चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और तीन व्यावसायिक अंतरिक्ष मिशनों सहित लगातार आठ एलवीएम3 (LVM3) मिशन सफल रहे हैं। यह इंजन भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित ले जाने के लिए तय सभी जरूरी मानकों पर भी खरा उतरा है।
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🇮🇳 ISRO just cleared the engine that will power India's next heavy lift rocket and eventually carry Indian astronauts to space.
— Military Observer (@TheMilObserverr) July 8, 2026
The CE20 cryogenic engine passed its Flight Acceptance Test on July 6 at ISRO's Mahendragiri facility, the first time the new Nozzle Protection System… pic.twitter.com/YYbHxXZzGR
नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम से होगी जांच
इस इंजन की जांच के लिए इसरो ने नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम (एनपीएस) नाम की नयी तकनीक विकसित की है। इसकी मदद से इंजन का परीक्षण पहले की तुलना में अधिक आसान, कम खर्चीला और ज्यादा समय तक किया जा सकता है। इससे जटिल ऊंचाई वाले परीक्षणों की जरूरत भी काफी कम हो जाती है।
(LVM3-M7) एलवीएम3-एम7 मिशन के लिए तैयार किए गए (CE20) सीई20 इंजन का अंतिम ‘हॉट टेस्ट’ पहली बार इसी नयी तकनीक के साथ किया गया। यह परीक्षण (फ्लाइट एक्सेप्टेंस) छह जुलाई को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में हुआ।
परीक्षण के दौरान इंजन को पहले 45 सेकंड तक 19.5 टन की ताकत पर और फिर 25 सेकंड तक 22 टन की पूरी क्षमता पर चलाकर उसकी कार्यक्षमता और मजबूती की जांच की गयी।
इसरो के अनुसार, परीक्षण पूरी तरह सफल रहा। इंजन और नयी सुरक्षा प्रणाली दोनों ने उम्मीद के मुताबिक काम किया। अब इंजन की अंतिम जांच और तैयारी पूरी करने के बाद इसे एलवीएम3-एम7 रॉकेट में लगाया जाएगा।
