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मंगलवार से करें बजरंग बाण, होगा सभी समस्या का निदान, जानें पाठ का सही नियम


बाबा बजरंगी बली को प्रसन्न करने के लिए और सभी आपदा को दूर करने के लिए मंगलवार को आप शक्तिशाली बजरंग बाण का पाठ करें।


Bajrang Baan Path : संकट मोचन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए और खुद के संकट को दूर करने के लिए अगर मंगलवार को आपने शक्तिशाली बजरंग बाण का पाठ किया तो सारे संकट दूर होंगे और सभी कामना भी पूर्ण होगी। वहीं धार्मिक मान्यताओं की मानें तो जो भी भक्त श्रद्धाभाव से बजरंग बाण का पाठ करता है उसके जीवन के संकट कम होते हैं और बाबा बजरंग बली की कृपा बनती है।

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जानें बजरंग बाण करने का नियम

बाबा बजरंगी बली को प्रसन्न करने के लिए और सभी आपदा को दूर करने के लिए मंगलवार को आप शक्तिशाली बजरंग बाण का पाठ करें। माना जातो है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति श्रद्धाभाव से बजरंग बाण का पाठ करता है उसके जीवन के सभी संकट दूर होने के साथ ग्रह दोष से मुक्ति मिल जाती है। मगर इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ करने के लिए आपको कुछ नियमों का पालन करना होगा वरना इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं मिलता है।

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  1. बजरंग बाण के पाठ की शुरुआत मंगलवार से करें।
  2. बजरंग बाण का पाठ करने के बाद हनुमान चालीसा जरूर पढ़ें।
  3. शास्त्रों की माने तो बजरंग बाण का पाठ लगातार 41 दिनों तक करना शुभ माना जाता है। 
  4. 41 दिनों के लिए आप पाठ शुरू करते हैं तो बीच में नहीं छोड़ना चाहिए।
  5. पाठ के दौरान शरीर की पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।
  6. पाठ के दौरान भक्त को मांस मदिरा और तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए, और सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
  7. पाठ के दौरान बाबा को पीला चंदन लगाएं, और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। 
  8. पाठ के दौरान घी का दीया भी जलाना चाहिए।
  9. बजरंग बाण के पाठ से पहले हनुमान जी के प्रभु श्री राम और माता सीता का ध्यान करें।

जानें कब और क्यों करना चाहिए बजरंग बाण

शास्त्रों की मानें तो बजरंग बाण का पाठ बहुत ही शक्तिशाली माना जाता है। इस पाठ करने और सुनने मात्र से ही लोगों के संकट दूर होते और सारी आपदाएं खत्म हो जाती हैं। साथ ही बाण की तरह निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ती होती है। कहा जाता है कि बजरंग बाण का पाठ तभी करना चाहिए जब सभी परिस्थितियां आपके खिलाफ हो जाए और कोई हल नजर न आ रहा हो। तो बजरंग बाण का पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा मिलती है, और गंभीर बीमारी से निजात पाने के लिए राहुकाल में बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। साथ ही इससे घर का वास्तुदोष दूर होता है।

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ये गलतियां ना करें

  • बजरंग बाण का पाठ किसी भी दिन ना शुरू करें।
  • मंगलवार के दिन ही पाठ शुरू करना सही रहता है।
  • बजरंग बाण का पाठ अधूरे में नहीं छोड़ना चाहिए। 
  • कम से कम 41 दिनों तक पाठ जरूर करें।
  • अगर 41 नहीं कर सकते है तो मंगलवार और शनिवार को जरूर पाठ करें।
  • पाठ के दौरान काले कपड़े ना पहनें।
  • बजरंग बाण पाठ के दिन मांसाहार का सेवन ना करें।
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बजरंग बाण पाठ

दोहा :- "निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।"
            "तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥"

चौपाई :-

जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।।

जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।।

जैसे कूदि सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।

आगे जाई लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।।

बाग़ उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।।

अक्षयकुमार को मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा।।

लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर में भई।।

अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी।।

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होय दुख हरहु निपाता।।

जै गिरिधर जै जै सुखसागर। सुर समूह समरथ भटनागर।।

ॐ हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहिंं मारु बज्र की कीले।।

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो।।

ऊँकार हुंकार प्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो।।

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ऊँ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा।।

सत्य होहु हरि शपथ पाय के। रामदूत धरु मारु जाय के।।

जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हौं दास तुम्हारा।।

वन उपवन, मग गिरिगृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।

पांय परों कर ज़ोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।

जय अंजनिकुमार बलवन्ता। शंकरसुवन वीर हनुमन्ता।।

बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक।।

भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर।।

इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की।।

जनकसुता हरिदास कहावौ। ताकी शपथ विलम्ब न लावो।।

जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा।।

चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।

उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पांय परों कर ज़ोरि मनाई।।

ॐ चं चं चं चं चपत चलंता। ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता।।

ऊँ हँ हँ हांक देत कपि चंचल। ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल।।

अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो।।

यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै।।

पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।

यह बजरंग बाण जो जापै। ताते भूत प्रेत सब काँपै।।

धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा।।

दोहा :- " प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान। "
         " तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान।। "
 

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