उत्तर प्रदेशक्राइम

Ghaziabad Howner Killing: प्रेम में अड़ी बहन को भाइयों ने उतारा मौत के घाट

ऑनर किलिंग की घटना बीते शनिवार की है जब अभियुक्त मुरादनगर गंग नहर से गुजर रहे थे तभी वहां पेट्रोलिंग कर रही पुलिसिंग टीम ने संदीग्ध अवस्था में दोनो युवकों को देखा, जब दोनों से पुलिस टीम द्वारा पूछताछ की गई तो युवकों ने बताया कि उन्होंने अपनी सगी बहन की हत्या को अंजाम दिया है। दोनों युवक अपनी नाबालिक बहन के प्रेम संबंधों से नाराजगी से नाबालिक बहन अपने हिंदू प्रेमी से विवाह की जिद पर अड़ी थी जिसके चलते दोनों भाइयों ने अपनी बहन की गमछा से गला दबाकर ऑनर किलिंग की घटना को अंजाम दे दिया, और शव को गंग नहर में फेंक दिया।

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क्राइम

Sambhal: कॉलेज के जुगाड़ वाहन चालक की हुई निर्मम हत्या, मचा कोहराम

यह पूरा मामला संभल में चंदौसी कोतवाली क्षेत्र का है जहां से ट्रैक्टर चालक की पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। वहीं सूचना मिलती ही एसपी सहित पुलिस के आला अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचे और पुलिस ने इस मामले में तीन सगे भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं, एक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। आपको बता दें चंदौसी के गांव सैदपुर निवासी अतर सिंह गांव के ही शांति देवी टीकाराम मेमोरियल इंटर कॉलेज से ट्रैक्टर ट्रॉली से स्कूली बच्चों को लाने का काम करता है,

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चुनाव

लोकसभा चुनाव : बाराबंकी के सांसद उपेन्द्र सिंह रावत का राजनीतिक सफर

उपेन्द्र सिंह रावत ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार राम सागर रावत के खिलाफ चुनाव जीत कर बाराबंकी संसदीय सीट बीजेपी से एक बार फिर जीत का परचम लहराया है। आपको बताते चले कि इस सीट पर बीजेपी ने मौजूदा सांसद प्र‍ियंका सिंह रावत का टिकट काटकर उपेंद्र सिंह रावत को टिकट दिया था। वर्तमान में उपेन्द्र सिंह रावत एक भारतीय राजनीतिज्ञ और बाराबंकी से लोकसभा सांसद हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के राजनेता भी हैं।

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लोकसभा चुनाव : हमीरपुर सीट का इतिहास और सांसदों के वादे

यूपी के बुंदेलखंड की हमीरपुर लोकसभा सीट चित्रकूट धाम बांदा मंडल का हिस्सा है। वहीं अगर बात करें मौजूदा समय की तो इस समय में इस सीट पर बीजेपी का परचम लहर रहा है। वर्तमान में यहां से कुंवर पुष्पेंद्र स‍िंह चंदेल सांसद हैं। राजनीतिक रूप से इस संसदीय सीट पर सपा, बसपा, कांग्रेस और बीजेपी चारों पार्टियां जीत दर्ज कर चुकी हैं।

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लोकसभा चुनाव : बाराबंकी जिले का शासकीय और राजनीतिक इतिहास

बाराबंकी जिले का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यहां कि मुख्य फसलें चावल, गेहूं, दालें और अन्य खाद्यान्न और गन्ना हैं। बाराबंकी को तीन नदियों में घाघरा, गोमती और कल्याणी है। वहीं इस जिले में कुछ हस्तशिल्प और लघु उद्योग भी हैं। यहां कि यब भी मान्यता है कि नवाबों के शासनकाल के बाद से ही बाराबंकी बुनाई के लिए भी प्रसिद्ध है।

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लोकसभा चुनाव : ड्रीम गर्ल मथुरा सांसद का फिल्मी दुनिया से राजनीतिक तक का सफर

हेमा ने 2003 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से राज्‍यसभा सांसद बनकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वह वर्तमान में उत्‍तरप्रदेश के मथुरा से लोकसभा सांसद हैं। हेमा मालिनी एक भारतीय अभिनेत्री, लेखिका, निर्देशक, निर्माता, नृत्यांगना और राजनीतिज्ञ हैं। उन्हें पूरी दुनिया ड्रीमगर्ल के नाम से भी जानती हैं, जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से लोकसभा सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। हेमा का जन्म तमिल भाषी चक्रवर्ती परिवार में 16 अक्टूबर 1948 को तमिलनाडु के अम्मानकुडी में हुआ था। उनके पिता का नाम वी.एस.आर. चक्रवर्ती और उनकी मां जया एक फिल्म निर्माता थीं। उन्हें चेन्नई स्थित आंध्र महिला सभा में नामांकित किया गया था।

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लोकसभा चुनाव : राधा-कृष्ण की प्रेम नगरी मथुरा का इतिहास

मथुरा, भगवान कृष्ण की जन्मस्थली और भारत की प्राचीन नगरी है। पोराणिक कथा की माने तो शूरसेन की यहाँ राजधानी थी। वहीं मथुरा को भी कई नामों से जाना है जैसे- शूरसेन नगरी, मधुपुरी, मधुनगरी, मधुरा आदि। यह नगरी यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। मथुरा ऐतिहासिक रूप से कुषाण राजवंश द्वारा राजधानी के रूप में विकसित नगर है। वहीं लोगों का यह भी मानना है कि लगभग 7500 वर्ष से यह नगर अस्तित्व में है जिसके साथ ही मथुरा धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।

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लोकसभा चुनाव : उन्नाव सांसद साक्षी महाराज का जीवन और राजनीतिक सफरनामा

साक्षी महाराज ने शुरूआत भाजपा से की थीं और लोध समुदाय से आने वाले एक अन्य भाजपा नेता कल्याण सिंह और एक अन्य भाजपा नेता कलराज मिश्रा के साथ उनके घनिष्ठ संबंध थे।
1991 में लोकसभा के लिए मथुरा से चुने गए।
1996 और 1998 फर्रुखाबाद से, जहां लोधी बहुमत है।
1999 के आम चुनाव में, भाजपा द्वारा फर्रुखाबाद से टिकट नहीं दिए जाने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार किया।

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लोकसभा चुनाव : उन्नाव सीट का इतिहास और राजनीतिक सफर

यूपी में 80 सीट है और हर सीट अलग अलग महत्व है, यूपी की 80 सीटे भारत की लोकसभा सीट में सबसे ज्यादा सीट मानी जाती हैं, वहीं आज हम आपको बताएंगे यूपी के उन्नाव सीट का इतिहास… यूपी का उन्नाव जिला पर जब फरवरी 1856 में अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था उसके बाद बनाया गया था। इसके पहले नवाबों के अधीन यह जिला अलग-अलग जिला और चकलाओं के बीच बंटा हुआ था। 1857-1858 के आजादी के संघर्ष के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन तक सत्ता का हस्तांतरण किया गया। जैसे ही आदेश बहाल किया गया था, नागरिक प्रशासन को जिले में फिर से स्थापित किया गया था जिसका नाम उन्नाव था।

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