देश दुनिया

“संविधान हत्या दिवस”- देश आजाद था, पर लोकतंत्र नहीं

दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल को संविधान पर सीधा हमला बताते हुए उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी है जिन्होंने उस समय लोकतांत्रिक मूल्यों की दृढ़तापूर्वक रक्षा की थी। पीएम मोदी ने गुरुवार को देशभर में मनाए जाने वाले संविधान हत्या दिवस का उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा,” आज, हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने भारत के इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक, आपातकाल, के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की दृढ़तापूर्वक रक्षा की।

Read More: वेनेजुएला के तेल पर ट्रंप का बड़ा बयान!

आपातकाल संविधान पर आघात

आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा आघात था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं का निलंबन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियाँ तथा उन संस्थाओं पर प्रहार देखने को मिला जो हमारे लोकतंत्र की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि इसने असंख्य नागरिकों के असाधारण साहस को भी उजागर किया, जिन्होंने मौन रहने से इनकार किया और संविधान में निहित आदर्शों को बनाए रखा।

संविधान हत्या दिवस

प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी के लिए संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा- “हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हैं। अपने संविधान की भावना से प्रेरित होकर, हम ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति सदैव समर्पित रहेगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि संविधान हत्या दिवस हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन।” संविधान हत्या दिवस हर साल 25 जून को मनाया जाता है। सरकार ने 1975 में इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल के विरोध में इसे मनाने की शुरुआत की थी।

25 जून, 1975 — जब लोकतंत्र को कांग्रेस ने कुचला!

25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र का काला दिन था। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध ठहराए जाने के बाद सत्ता बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोप दिया गया। मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और हजारों लोकतंत्र समर्थकों को जेलों में ठूंस दिया गया। असहमति को अपराध बना दिया गया और पूरे देश को भय व दमन के साए में धकेल दिया गया।

Read More: अलीगंज अग्निकांड में बड़ा खुलासा, 18 इंजीनियर दोषी!

कांग्रेस और इंदिरा गांधी की तानाशाही सोच ने लोकतंत्र को बेड़ियों में जकड़ दिया। जबरन नसबंदी, राजनीतिक गिरफ्तारियां, नागरिक स्वतंत्रताओं का हनन और बेगुनाहों की मौतें उस दौर की दर्दनाक सच्चाई थीं। 21 महीनों के संघर्ष के बाद 1977 में जनता ने जवाब दिया और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हुई। 11 जुलाई 2024 को भारत सरकार ने 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” घोषित किया, ताकि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लाखों सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जा सके।

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2152158&reg=48&lang=2

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *