“संविधान हत्या दिवस”- देश आजाद था, पर लोकतंत्र नहीं
दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल को संविधान पर सीधा हमला बताते हुए उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी है जिन्होंने उस समय लोकतांत्रिक मूल्यों की दृढ़तापूर्वक रक्षा की थी। पीएम मोदी ने गुरुवार को देशभर में मनाए जाने वाले संविधान हत्या दिवस का उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा,” आज, हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने भारत के इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक, आपातकाल, के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की दृढ़तापूर्वक रक्षा की।
Read More: वेनेजुएला के तेल पर ट्रंप का बड़ा बयान!
➡️ Voices were silenced.
— BJP (@BJP4India) June 25, 2026
➡️ Families were shattered.
➡️ Lives were ruined.
➡️ The Constitution was brutally violated.
𝐓𝐡𝐞 𝐄𝐦𝐞𝐫𝐠𝐞𝐧𝐜𝐲 𝐫𝐞𝐦𝐚𝐢𝐧𝐬 𝐨𝐧𝐞 𝐨𝐟 𝐭𝐡𝐞 𝐝𝐚𝐫𝐤𝐞𝐬𝐭 𝐜𝐡𝐚𝐩𝐭𝐞𝐫𝐬 𝐢𝐧 𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚'𝐬 𝐝𝐞𝐦𝐨𝐜𝐫𝐚𝐭𝐢𝐜 𝐡𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲,… pic.twitter.com/bWi3O1YqRG
आपातकाल संविधान पर आघात
आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा आघात था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं का निलंबन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियाँ तथा उन संस्थाओं पर प्रहार देखने को मिला जो हमारे लोकतंत्र की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि इसने असंख्य नागरिकों के असाधारण साहस को भी उजागर किया, जिन्होंने मौन रहने से इनकार किया और संविधान में निहित आदर्शों को बनाए रखा।
संविधान हत्या दिवस
25 जून 1975, जिस रात कांग्रेस की सत्ता मजबूत हुई, लेकिन लोकतंत्र कमजोर पड़ गया।
— BJP (@BJP4India) June 25, 2026
संविधान की आत्मा को कुचला गया, नागरिकों के अधिकार छीन लिए गए और पूरे देश पर आपातकाल का अंधेरा छा गया।
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला अध्याय।#SamvidhanHatyaDiwas pic.twitter.com/2JgR8f6Dwu
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी के लिए संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा- “हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हैं। अपने संविधान की भावना से प्रेरित होकर, हम ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति सदैव समर्पित रहेगा।”
जब सत्ता ने माइक छीन लिया,
— BJP (@BJP4India) June 25, 2026
तब इतिहास ने गवाही दर्ज कर ली।
25 जून 1975, जब आवाज दबाना शासन और डर फैलाना कांग्रेस की व्यवस्था बन गया था।#SamvidhanHatyaDiwas pic.twitter.com/1x8jYRVwTS
पीएम मोदी ने कहा कि संविधान हत्या दिवस हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन।” संविधान हत्या दिवस हर साल 25 जून को मनाया जाता है। सरकार ने 1975 में इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल के विरोध में इसे मनाने की शुरुआत की थी।
देश आजाद था, पर लोकतंत्र नहीं।
— BJP (@BJP4India) June 25, 2026
आवाजों पर पहरा था,
अधिकार बंधक थे,
सरकार बेलगाम थी।
25 जून 1975, भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला दिन, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।#SamvidhanHatyaDiwas pic.twitter.com/8TBwh6h8Hy
25 जून, 1975 — जब लोकतंत्र को कांग्रेस ने कुचला!
25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र का काला दिन था। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध ठहराए जाने के बाद सत्ता बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोप दिया गया। मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और हजारों लोकतंत्र समर्थकों को जेलों में ठूंस दिया गया। असहमति को अपराध बना दिया गया और पूरे देश को भय व दमन के साए में धकेल दिया गया।
Read More: अलीगंज अग्निकांड में बड़ा खुलासा, 18 इंजीनियर दोषी!
25 जून, 1975 — जब लोकतंत्र को कांग्रेस ने कुचला!
— BJP (@BJP4India) June 25, 2026
25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र का काला दिन था। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध ठहराए जाने के बाद सत्ता बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोप दिया गया।
मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई,… pic.twitter.com/Bp8B3oBWC3
कांग्रेस और इंदिरा गांधी की तानाशाही सोच ने लोकतंत्र को बेड़ियों में जकड़ दिया। जबरन नसबंदी, राजनीतिक गिरफ्तारियां, नागरिक स्वतंत्रताओं का हनन और बेगुनाहों की मौतें उस दौर की दर्दनाक सच्चाई थीं। 21 महीनों के संघर्ष के बाद 1977 में जनता ने जवाब दिया और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हुई। 11 जुलाई 2024 को भारत सरकार ने 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” घोषित किया, ताकि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लाखों सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जा सके।
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2152158®=48&lang=2
