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धर्मेंद्र प्रधान की नई शिक्षा नीति और बवाल

धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री बनने के बाद क्या-क्या काम और बदलाव किए?

भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2021 में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को तेजी से लागू करने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, भारतीय भाषाओं में शिक्षा, कौशल विकास और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। हालांकि, उनके कार्यकाल में NEET पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों को लेकर सरकार की आलोचना भी हुई। आइए विस्तार से जानते हैं कि शिक्षा मंत्री बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने कौन-कौन से प्रमुख काम और बदलाव किए।

धर्मेंद्र प्रधान की नई शिक्षा नीति और बवाल
धर्मेंद्र प्रधान की नई शिक्षा नीति और बवाल

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करने पर जोर

    धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को जमीन पर लागू करने को प्राथमिकता दी।

    इसके तहत कई बड़े बदलाव किए गए—

    • 5+3+3+4 शिक्षा संरचना को बढ़ावा।
    • बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर विशेष ध्यान।
    • रटने की बजाय कौशल आधारित शिक्षा पर जोर।
    • बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहन।
    • विद्यार्थियों को विषय चुनने की अधिक स्वतंत्रता।

    इस नीति का उद्देश्य शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाना है।

    भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा

      धर्मेंद्र प्रधान लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि उच्च शिक्षा केवल अंग्रेजी तक सीमित न रहे।

      • इंजीनियरिंग की पढ़ाई कई भारतीय भाषाओं में शुरू हुई।
      • मेडिकल की किताबों का हिंदी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया।
      • तकनीकी शिक्षा को मातृभाषा में उपलब्ध कराने के प्रयास तेज हुए।

      इसका उद्देश्य ग्रामीण और हिंदी भाषी छात्रों को बेहतर अवसर देना है।

      डिजिटल शिक्षा का विस्तार

        कोविड महामारी के बाद डिजिटल शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए गए।

        • मुख्य पहल—DIKSHA प्लेटफॉर्म का विस्तार।
        • SWAYAM ऑनलाइन कोर्स को बढ़ावा।
        • PM eVIDYA कार्यक्रम का विस्तार।
        • डिजिटल लाइब्रेरी और ई-कंटेंट उपलब्ध कराया गया।

        इससे दूर-दराज के छात्रों तक शिक्षा पहुंचाने की कोशिश की गई।

        धर्मेंद्र प्रधान की नई शिक्षा नीति और बवाल
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        राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (NCF) में बदलाव

          नई शिक्षा नीति के अनुसार नया National Curriculum Framework तैयार किया गया।

          • इसके तहत—गतिविधि आधारित शिक्षा।
          • अनुभव आधारित सीखने पर जोर।
          • बोर्ड परीक्षाओं का दबाव कम करने की कोशिश।
          • जीवन कौशल और व्यावहारिक शिक्षा को शामिल किया गया।
          धर्मेंद्र प्रधान की नई शिक्षा नीति और बवाल
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          बोर्ड परीक्षाओं में सुधार

            शिक्षा मंत्रालय ने बोर्ड परीक्षाओं को अधिक छात्र-अनुकूल बनाने की दिशा में कई कदम उठाए।

            • इनमें शामिल हैं—वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षा कराने की योजना।
            • वस्तुनिष्ठ और विश्लेषणात्मक प्रश्नों का संतुलन।
            • केवल रटने की बजाय समझ पर आधारित मूल्यांकन।

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            कौशल आधारित शिक्षा पर फोकस

              धर्मेंद्र प्रधान ने स्कूल स्तर से ही स्किल एजुकेशन को बढ़ावा दिया।

              इसके तहत—

              • व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा।
              • उद्योगों के साथ साझेदारी।
              • इंटर्नशिप और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण।
              • भविष्य की तकनीकों जैसे AI, Robotics और Coding पर जोर।
              धर्मेंद्र प्रधान की नई शिक्षा नीति और बवाल
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              राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय की पहल

                देश में डिजिटल माध्यम से उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय की अवधारणा को आगे बढ़ाया गया।

                • इसका उद्देश्य—दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।
                • ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रम।
                • डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उच्च शिक्षा।

                शोध और नवाचार को बढ़ावा

                  उच्च शिक्षा संस्थानों में रिसर्च को मजबूत करने के लिए कई पहल की गईं।

                  • स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा।
                  • Innovation Cells की स्थापना।
                  • शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहन।
                  • उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग।

                  विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए रास्ता

                    नई शिक्षा नीति के तहत प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने का रास्ता आसान बनाया गया।

                    • इसका उद्देश्य—छात्रों को विदेश गए बिना वैश्विक स्तर की शिक्षा।
                    • प्रतिस्पर्धा बढ़ाना।
                    • उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना।
                    धर्मेंद्र प्रधान की नई शिक्षा नीति और बवाल
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                    प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव

                      CUET (Common University Entrance Test) को व्यापक रूप से लागू किया गया।

                      इसके फायदे बताए गए—सभी छात्रों के लिए समान अवसर।
                      अलग-अलग विश्वविद्यालयों की अलग प्रवेश परीक्षा की आवश्यकता कम।
                      मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया।

                      हालांकि शुरुआती वर्षों में तकनीकी समस्याओं और परीक्षा प्रबंधन को लेकर शिकायतें भी सामने आईं।

                      राष्ट्रीय शिक्षा प्रौद्योगिकी मंच (NETF) की दिशा में काम

                        शिक्षा में नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई डिजिटल पहल शुरू की गईं।

                        • इनका उद्देश्य—AI आधारित शिक्षा।
                        • स्मार्ट क्लासरूम।
                        • ऑनलाइन मूल्यांकन।
                        • डिजिटल संसाधनों का विस्तार।
                        धर्मेंद्र प्रधान की नई शिक्षा नीति और बवाल
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                        उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार

                          • केंद्र सरकार ने कई नए संस्थानों और सीटों के विस्तार पर काम किया।
                          • IIT
                          • IIIT
                          • IIM
                          • केंद्रीय विश्वविद्यालय
                          • मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने की दिशा में प्रयास

                          परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कोशिश

                            सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की बात कही।

                            • इसके तहत—डिजिटल निगरानी।
                            • प्रश्नपत्र सुरक्षा।
                            • परीक्षा एजेंसियों में सुधार।
                            • तकनीकी निगरानी बढ़ाने के प्रयास।

                            NEET और अन्य परीक्षाओं पर विवाद

                              धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में सबसे बड़ी चुनौती प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद रहे।

                              • इनमें शामिल हैं—NEET-UG पेपर लीक के आरोप।
                              • परीक्षा प्रबंधन को लेकर सवाल।
                              • छात्रों के प्रदर्शन।
                              • विपक्ष द्वारा इस्तीफे की मांग।

                              सरकार ने इन मामलों में जांच एजेंसियों से जांच कराई, कई गिरफ्तारियां हुईं और परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए कानून एवं सुरक्षा उपायों की बात कही।

                              शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर

                                धर्मेंद्र प्रधान ने भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान परंपरा को शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

                                • इसके अंतर्गत—भारतीय भाषाओं का महत्व।
                                • पारंपरिक ज्ञान।
                                • भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों का अध्ययन।
                                • भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों को बढ़ावा।

                                प्रमुख बदलाव

                                1. मुगल काल से जुड़े कुछ अध्यायों और हिस्सों में बदलाव

                                कुछ कक्षाओं में मुगल साम्राज्य और दिल्ली सल्तनत से संबंधित सामग्री को कम किया गया या पुनर्गठित किया गया।
                                कुछ संस्करणों में “Kings and Chronicles: The Mughal Courts” जैसे अध्याय हटाए गए या बदले गए।

                                धर्मेंद्र प्रधान की नई शिक्षा नीति और बवाल
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                                1. आपातकाल (Emergency) पर अधिक सामग्री
                                  नई पुस्तकों में 1975–77 के आपातकाल पर अधिक विस्तार से चर्चा शामिल की गई।
                                  सरकार का तर्क रहा कि विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण दौर की जानकारी होनी चाहिए।
                                2. भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत पर अधिक जोर
                                  प्राचीन भारत, भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और भारतीय सभ्यता से जुड़े विषयों को अधिक महत्व देने के प्रयास किए गए।
                                  भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास प्रस्तुत करने पर बल दिया गया।
                                3. विभाजन (Partition) से जुड़े विवरणों में संशोधन
                                  कुछ नई पुस्तकों में भारत-विभाजन के वर्णन और संदर्भों में बदलाव किए गए।
                                  इन परिवर्तनों को लेकर अलग-अलग पक्षों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दीं।
                                4. कुछ अध्यायों का पुनर्गठन या हटाया जाना
                                  अलग-अलग कक्षाओं में कुछ अध्याय हटाए गए या संक्षिप्त किए गए।
                                  उदाहरण के लिए, पहले भी कक्षा 10 की इतिहास पुस्तक से “Nationalism in Indo-China”, “The Age of Industrialisation” से जुड़े कुछ हिस्सों और “Print Culture and the Modern World” जैसे अध्यायों में बदलाव किए गए थे।
                                5. नए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) के अनुसार नई किताबें
                                  2024–25 और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से नई NCERT किताबें जारी की गईं।
                                  इनमें इतिहास, सामाजिक विज्ञान और नागरिक शास्त्र की सामग्री का नया ढांचा अपनाया गया।

                                उपलब्धियां और चुनौतियां

                                धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था में कई संरचनात्मक बदलावों की शुरुआत हुई। नई शिक्षा नीति को लागू करने, डिजिटल शिक्षा के विस्तार, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा, कौशल आधारित शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया में सुधार जैसे कदमों को सरकार ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया है।

                                दूसरी ओर, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन, और छात्रों के विरोध प्रदर्शन जैसे मुद्दों ने उनके कार्यकाल को चुनौतीपूर्ण भी बनाया। इन मामलों पर विपक्ष ने सरकार की आलोचना की, जबकि सरकार का कहना रहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।

                                निष्कर्ष: धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री बनने के बाद भारतीय शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े सुधारों की दिशा में काम हुआ है। नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षा, मातृभाषा में पढ़ाई, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा उनके कार्यकाल की प्रमुख विशेषताएं रही हैं। वहीं, परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों ने यह भी दिखाया कि सुधारों के साथ-साथ मजबूत और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। आने वाले वर्षों में इन पहलों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें देशभर में कितनी प्रभावी और समान रूप से लागू किया जाता है।

                                the voice of hind news channel

                                https://www.education.gov.in/en/national-education-policy

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