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ज्ञानेश कुमार पर जन महाभियोग प्रस्ताव पेश

दिल्ली: इंडिया गठबंधन ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शनिवार को मॉक संसद का आयोजन कर उन पर लोकतांत्रिक व्यवस्था और मताधिकार को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की।

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जन महाभियोग प्रस्ताव पेश

ज्ञानेश कुमार पर जन महाभियोग प्रस्ताव पेश
ज्ञानेश कुमार पर जन महाभियोग प्रस्ताव पेश

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में विपक्षी इंडिया गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं, सांसदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों तथा जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए हैं उन लोगों के साथ कई लोगों ने हिस्सा लिया। मॉक पार्लियामेंट की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की, जबकि समाजवादी पार्टी के लोकसभा सदस्य अवधेश कुमार को उपाध्यक्ष बनाया गया।

मीरा कुमार ने मॉक संसद की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यहां नागरिक समाज के प्रतिनिधि, इंडिया गठबंधन के लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य तथा ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनके नाम अनुचित तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इस मामले में सभा में सभी दलों के लोगों को विचार रखने का अवसर मिलेगा।

ज्ञानेश कुमार पर छह आरोप लगे

उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक देश भारतीय लोकतंत्र का अनुसरण करते हैं। भारत का लोकतंत्र समानता के सिद्धांत पर आधारित है और प्रत्येक व्यक्ति को मतदान का अधिकार प्राप्त है, चाहे वह गरीब हो या अमीर, किसी भी जाति या धर्म का हो अथवा किसी भी लिंग से संबंधित हो। उन्होंने कहा कि गरीब बस्तियों में रहने वाले लोग भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके देश की किस्मत तय करते हैं।

मल्लिकार्जुन खरगे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग प्रस्ताव पेश करते हुए उन पर लोकतंत्र की मतदान प्रणाली को नुकसान पहुंचाने और लोगों को उनके मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के पीछे मतदाता सूची में अनियमिततता करना और लोगों को मताधिकार से वंचित किए जाने का मामला है।

ज्ञानेश कुमार पर जन महाभियोग प्रस्ताव पेश
ज्ञानेश कुमार पर जन महाभियोग प्रस्ताव पेश

उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर छह आरोप लगाते हुए कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव करके आपराधिक साजिश की गई तथा मतदाता सूची के केंद्रीकरण के जरिए लोगों के नाम हटाए गए इसलिए उनको हर स्थिति में पद से हटाया जाना जरूरी है।

मतदाता सूची में गड़बड़ियां की जा रही

मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों को मतदाता सूची में गड़बड़ियों से संबंधित प्रक्रिया से जानबूझकर दूर रखा और उन्हें लगातार नजरअंदाज किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र को मजबूत भी करता है और साजिश होने पर लोकतंत्र को कमजोर होने का कारण भी बन सकता है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में 1988 में संविधान संशोधन के जरिए मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई थी, जिससे युवाओं को देश की दिशा तय करने में भागीदारी का अवसर मिला।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर चुनाव आयोग काम कर रहा है तथा 2014 से सत्ता में बने रहने के लिए मतदाता सूची में गड़बड़ियां की जा रही हैं। मल्लिकार्जुन खरगे ने महाराष्ट्र और कर्नाटक का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की कथित अनियमितताओं से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए हैं।

वोट चोरी का लगाया आरोप

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नए नाम जोड़े गए, जबकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गड़बड़ियां कर्नाटक में भी हुई हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया लेकिन सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए, कितने नए नाम जोड़े गए और किन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों का पूरा विवरण सामने आने पर ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भरोसा कायम हो सकता है और वह इस भरोसे को कम करने में विफल हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी राजनीतिक हित के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों और मतदाता सूची में उनके नाम सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे पर कई ज्ञापन दिए और राष्ट्रपति के समक्ष भी लोकतंत्र की रक्षा का मामला उठाया लेकिन उनकी मांगो पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी कारण मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग प्रस्ताव लाने का कदम उठाना पड़ा।

उन्होंने राहुल गांधी पर भाजपा की तरफ से लगाये गए लोगों को भड़काने के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार खुद ही लोगों की आवाज़ दबाकर और नेट पर प्रतिबंध लगाकर युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र पर बढ़ते खतरे को रोकने के लिए कांग्रेस संघर्ष जारी रखेगी।

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