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लोकसभा में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर जताई चिंता

LokSabha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा -पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उसकी वजह से भारत के सामने आई चुनौतियों पर अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ है।

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एस जयशंकर और हरदीप पुरी ने जानकारी दी है। इस संकट को अब तीन हफ्ते से ज्यादा हो रहे हैं। पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है। इस युद्ध ने भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

पीएम मोदी ने कहा- भारत की संसद से भी यह संदेश दुनिया में जाना चाहिए कि संकट का जल्द समाधान हो। उन्होंने युद्ध के बीच स्वदेश लौटे भारतीयों की जानकारी सदन में दी और कहा कि भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारे मिशन प्रभावित देशों में लगातार भारतीयों की मदद कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा- भारत ने पिछले 11 साल में अपनी क्रूड ऑयल इम्पोर्ट का डाइवर्सिफिकेशन किया है। पहले 27 देशों से एनर्जी इम्पोर्ट होता था, आज 41 देशों से इम्पोर्ट हो रहा है। हमारी रिफाइनिंग कैपेसिटी में भी वृद्धि हुई है। हमारे पास 53 लाख मीट्रिक टन क्रूड ऑयल का रिजर्व है, हमारा लक्ष्य 65 लाख मीट्रिक टन का है। हमारा प्रयास है कि हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज सुरक्षित भारत पहुंचें। हम हर पक्ष से संवाद कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों के कारण होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं।

पिछले 10-11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर बहुत काम हुआ है। पेट्रोल में 20 परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग हो रही है। इससे भी बचत हो रही है। हमने मेट्रो का नेटवर्क बढ़ाया है। हमने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बहुत अधिक बल दिया। आज वैकल्पिक ईंधन पर जिस कदर काम हो रहा है, भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा।

एनर्जी आज इकोनॉमी की रीढ़ है। ग्लोबल एनर्जी जरूरतों को पूरा करने वाला वेस्ट एशिया है। दुनियाभर की अर्थव्यवस्था वर्तमान संकट से प्रभावित हो रही है। सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म असर के लिए भी रणनीति के साथ काम कर रही है। हम हर स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा कर रहे हैं। जहां भी जरूरत है, सपोर्ट दिया जा रहा है।

इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया है, जो हर रोज मिलता है। साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे। भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है। खरीफ सीजन की ठीक से बुवाई हो सके। सरकार ने खाद्य की पर्याप्त व्यवस्था की है. हमने पहले भी किसानों पर संकटों का बोझ नहीं पड़ने दिया था। दुनिया के बाजार में यूरिया की एक बोरी तीन हजार रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन भारत के किसानों को वही बोरी तीन सौ रुपये से भी कम कीमत पर दी गई थी।

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